“हर रोज गिरकर भी, मुक्कमल खड़े हैं.!
ए जिंदगी देख,मेरे हौसले तुझसे भी बड़े हैं..”
उपरोक्त पंक्तियां प्रयागराज की शिक्षिका वंदना सिंह पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं।प्रयागराज की शिक्षिका व समाज सेविका वंदना सिंह ने अपने हौसले और जज्बे से आज अपना एक मुकाम बनाया है। उन्होंनें हजारों महिलाओं का जीवन बदल दिया है।अपने प्रयासों से उनके लिए स्वरोजगार के अवसर सृजन किए हैं और उनका जीवन बेहतर बनाया है।वंदना सिंह वर्तमान में चन्द्र शेखर आजाद इंटर कालेज सोरांव में अंग्रेजी की प्रवक्ता हैं।शिक्षक के तौर पर उन्होंने समाज में मिशाल कायम किया है।नौकरी की शुरुआत उन्होंने दिल्ली में मल्टीनेशनल कंपनी में एचआर मैनेजर के पद पर से की थी.जिंदगी में सब कुछ अच्छे से चल रहा था कि अचानक से जीवन में पति का साथ छूट गया. जिंदगी में अंधेरा छा गया. एक बेटी जो उस समय महज सात वर्ष की थी उसका भी सहारा बनना था.उन्होंने अपने को संभाल कर एक कठिन निर्णय लेते हुए नौकरी छोड़कर बेटी के साथ अपने शहर प्रयागराज आ गयी.उम्र भी इनकी बहुत ज्यादा नहीं थी.परन्तु इन्होंने अकेले बेटी के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया और समाजसेवा को समर्पित हो गयी.नौकरी से बचे समय में वह समाजसेवा करती हैं. समाज में बेटियों,महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा की बात हो या घर से निष्कासित बुजुर्गों की सहायता अथवा जरूरतमंद निराश्रितों की मदद हो वह हमेशा उनका सहारा बनकर खड़ी रहती हैं।उनके सामाजिक कार्य उनकी पहचान बन चुके हैं .आपसी सहयोग से वह हर समय जरूरतमंदों के लिए सहायता के लिए प्रयासरत रहती हैं. जरूरतमंद बच्चों की फीस से लेकर कॉपी किताब तक की व्यवस्था के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं. बालिकाओं के लिए शिक्षा स्वास्थ्य को लेकर जन जन जागरूकता अभियान के तहत संगोष्ठी सेमिनार सम्मेलन आयोजित करके उन्हें हमेशा जागरूक करने का भी कार्य करती रहती हैं वह ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में आत्मविश्वास भरने के लिए वह उनकी समय-समय पर काउंसलिंग तो करती ही है.बालिकाओं की स्वयं सुरक्षा के कौशल भी विकसित करती रहती हैं वह समाज में जरूरतमंद बेटियों महिलाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए समाज में संघर्ष करके उन्हें हमेशा आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत रहती हैं.रक्तदान के द्वारा भी मदद के लिए सदैव तत्पर रहती हैं. बेटियों और महिलाओं के लिए शिक्षा की व्यवस्था उनकी सुरक्षा तथा मान सम्मान बढ़ाने के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं. आज वह सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए भी हमेशा जन जागरूकता अभियान चलाती रहती हैं वह चाहे गरीबों को सरकारी मदद हो या महिला उत्पीड़न हो अपनी संस्था के माध्यम से मदद को सदैव तैयार रहती हैं.वंदना सिंह आज न केवल अपने विद्यालय की लड़कियों बल्कि समाज की लड़कियों के बीच में जाकर उन्हें आत्म रक्षा के गुण सिखाती है।उन्हें आत्मनिर्भर बनने,पढ़ने,कुरीतियों से लड़ने व अत्याचार के खिलाफ बोलने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं।वंदना सिंह को हमेशा से पढ़ने का शौक रहा वह पीसीएस और आईएएस की प्रारंभिक परीक्षाओं को पास किया परन्तु आखिरी सफलता न मिल पाने व बीच में शादी हो जाने से प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना जरूर टूटा परन्तु वह पढ़ाई को जारी रखी.वह पांच विषयों से परास्नातक है.अंग्रेजी, समाजशास्त्र, शिक्षा शास्त्र, दर्शन शास्त्र के अलावा वह एमबीए डिग्री धारक के साथ बीएड भी की है।आज भी समय निकाल कर वह समाचारपत्र,पत्रिकाओं के लिए स्वतंत्र लेखन का कार्य भी करती हैं।वह बेबाकी से अपनी बात रखने के लिए भी जानी जाती हैं।बच्चों को पढ़ाने के साथ साथ वह आज भी साहित्यिक पुस्तकें व अत्याधुनिक शोध आदि से अपने को अपडेट रखती हैं।वंदना सिंह अपनी बेटी वंशिका सिंह जो कक्षा 11वीं की छात्रा है उसके लिए माता पिता दोनों की भूमिका निभा रहीं है।अच्छी शिक्षा व अच्छी परवरिश दे रहीं है।वह कहती हैं इस समाज में एक महिला के लिए यह इतना आसान नहीं है परन्तु बहुत मुश्किल भी नहीं है.मैं अपनी बेटी की परवरिश करते हुए सारी सच्चाई और वर्तमान परिस्थितियों से भी अवगत कराती रहती हूं।आज मेरी बेटी मेरी सबसे अच्छी दोस्त भी है।वैसे तो वह विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के साथ बीस वर्षों से देश भर में समाज सेवा कर रहीं हैं.परन्तु प्रयागराज में स्थायी रूप से आ जाने के बाद 2017 में पहल जनकल्याण समिति एवं सेवा संस्थान की स्थापना किया जिसकी वह अध्यक्ष है.जिसके माध्यम से वह समाज के जरूरत मंदो की सेवा कर रहीं है.आज उनकी संस्था प्रतिवर्ष हजारों लोगों को कंबल व वस्त्र का वितरण करती है.सैकड़ो बच्चों की पढ़ाई का खर्च संस्था उठा रही है.इसके अतिरिक्त इनकी संस्था ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के सिलाई कढ़ाई का प्रशिक्षण भी प्रदान कर रही है.संस्था ने प्रयागराज नगर क्षेत्र के दो प्राथमिक विद्यालयों प्राथमिक विद्यालय रसूलाबाद व प्राथमिक विद्यालय ममफोर्डगंज को आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराने के लिए गोद भी लिया है।जिसमें प्राथमिक विद्यालय रसूलाबाद को समस्त आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा दी गयी है.ममफोर्डगंज प्राथमिक विद्यालय को अब संतृप्त किया जा रहा है।इनकी संस्था ग्रामीण क्षेत्रों में मेडिकल कैम्प के माध्यम से स्वास्थ्य जागरूकता भी फैला रही है व उन्हें निःशुल्क दवा भी उपलब्ध करायी जा रही है।वंदना सिंह ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं और महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का कार्य करती रहती है।उन्होंने बालिकाओं और महिलाओं के लिए एक बड़ा अभियान चला रखी हैं।वह बालिकाओं व महिलाओं को अपनी संस्था के माध्यम से मुफ्त सैनेटरी पैड का वितरण कर रही हैं।अभी तक अपने लोगों की मदद से प्रयागराज व आसपास के जनपदों में पिछले दो वर्ष में लगभग एक लाख मुफ्त सैनेटरी पैड का वितरण कर चुकी हैं।आज वह समाज में पैड वुमन के नाम से भी जानी जाने लगी है।वह समाज में महिलाओं को जागरूक करने व पीरियड्स में सैनेटरी पैड के उपयोग करने को प्रोत्साहित कर उन्हें तमाम अनचाही बीमारियों से बचाने का कार्य कर रही हैं। उनके इस प्रयास की चर्चा न केवल पूरे देश में हो रही है बल्कि विदेशों से भी उन्हें प्रशंसा प्राप्त हो रही है.पिछले वर्ष जब सारा विश्व कोरोना की महामारी से जूझ रहा था।वंदना सिंह ने अपनी संस्था के माध्यम से लोगों को मास्क, सैनेटाइजर का वितरण किया।जरूरत मंदों को खाना ,राशन आदि का वितरण भी बढ़ चढ़ कर वितरण किया। शैक्षिक और सामाजिक क्षेत्र में इनके योगदान के लिए इन्हें विभिन्न राज्यों और संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किया गया है।बेस्ट टीचर एवार्ड, सरस्वती सम्मान, प्रयाग गौरव सम्मान, कोरोना योद्धा सम्मान आदि पुरस्कारों से वह सम्मानित हो चुकी हैं।

