बागपत। श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर बागपत में दसलक्षण पर्व के चौथे दिन श्री 1008 सुपार्श्वनाथ भगवान के विधान का आयोजन किया गया। इस दौरान उत्तम शौच धर्म की पूजा की गई।

सर्वप्रथम प्रातः बेला में मध्य प्रदेश से पधारे पंडित सुलभ जैन शास्त्री व मयंक जैन शास्त्री बागपत के कुशल निर्देशन में श्री 1008 अजीतनाथ भगवान, श्री शांतिनाथ भगवान, श्री नेमिनाथ भगवान व श्री पार्श्वनाथ भगवान का शुद्ध जल से मंत्रोचार द्वारा अभिषेक किया गया। श्री चौबीसी विधान में आज श्री सुपार्श्व नाथ भगवान विधान का आयोजन किया गया। आज की शान्तिधारा का सौभाग्य पंकज जैन, वैभव जैन, बालेश जैन, आयन जैन बागपत को प्राप्त हुआ। विधान में प्रातः आरती अनिता जैन पत्नी प्रहलाद जैन के परिवार की और से संपन्न कराई गई। उसके उपरांत नित्य नियम की पूजा प्रारंभ हुई और श्री 1008 श्री सुपार्श्वनाथ भगवान विधान की क्रियाएं प्रारंभ हुई। आज विधान में 75 अर्घ्य मांडले पर अर्पित किए गए। शाम को शास्त्र सभा में पंडित सुलभ जैन ने बताया कि उत्तम शौच धर्म – पवित्रता का जो भाव है,निर्मलता का जो भाव है स्वाभिमान का जो भाव है वह शौच धर्म है। भावों की शुद्धता होना इसी का नाम शौच धर्म है। शौच धर्म लोभ कषाय के अभाव में प्रकट होता है। शौच धर्म को प्राप्त करने वाले का हृदय संतोष से परिपूर्ण होता है। शास्त्र सभा के उपरांत संगीतमय महाआरती हुई, जिसमे महिलाओं और बच्चों ने भगवान के सम्मुख दीपक लेकर नृत्य किया। उसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम तंबोला हुए, जिसमें बच्चों से धार्मिक क्रियाओं के बारे में पूछे गए और उसके उपरांत सभी को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में विनीत जैन, संजीव जैन, सार्थक जैन, यश जैन, तरुण जैन, निशु जैन, ऋषभ जैन, कमल जैन, अनमोल जैन, सुषमा जैन, बबीता जैन, कोमल जैन, पलकी जैन, नीलम जैन, अनिता जैन आदि मौजूद रहे।
