भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के दतिया में कुपोषण को दूर करने के लिए चलाए जा रहे ‘मेरा बच्चा अभियान’ की प्रशांसा की है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार दतिया ज़िले में बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने के लिए सितंबर 2019 से ‘मेरा बच्चा अभियान’ चलाया गया है। अभियान में ज़िले के चिन्हित कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने के प्रयास किए गए। बच्चों के कम वज़न, ठिगनापन और शारीरिक परेशानी को दूर करने के लिए पोषण के उद्देश्य से ज़िले में यह अभियान चलाया गया।
दतिया ज़िले में वर्ष 2019 में 994 अति कुपोषित और 11 हजार 604 कुपोषित बच्चे थे। वर्तमान में जिले में 217 अति कुपोषित और 836 कुपोषित बच्चे है। इन बच्चों को अधिकारी-कर्मचारियों तथा जन-प्रतिनिधियों द्वारा गोद लेकर पोषण गैप और नॉलेज गैप को कम करके कुपोषण से सुपोषण की ओर ले जाया जा रहा है। प्रत्येक तीन माह में सुपोषण मेलों में बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया जाता है। इसमें स्वास्थ्य और आयुष विभाग एवं जन-भागीदारी से दवाइयां एवं स्वच्छता तथा सुपोषण किट का वितरण किया जाता है। जो व्यक्ति या अधिकारी कुपोषित बच्चे को तीन माह में स्वस्थ बनाता है उसे ‘पोषण वीर सम्मान’ से सम्मानित किया जाता है।
इस अभियान में जन-भागीदारी बढ़ाने के लिए पोषण मटका कार्यक्रम भी संचालित किया गया। इसमें वार्ड, गांव की महिलाएं अपने घर से एक मुट्ठी अनाज लेकर आती है, जो पोषण मटके में एकत्र होता है। अनाज का उपयोग शनिवार को बाल भोज के लिए किया जाता है। पोषण के प्रति जन-जागरूकता लाने के लिए पोषण गीत, भजन तथा पोषण गुरुओं का सहारा लिया गया। सभी आंगनवाड़ी केंद्र में भजनों के माध्यम से महिलाओं को एकत्रित किया गया और गीतों से हर घर तक पोषण की समझ को पहुंचाया गया।
स्कूलों में भी सुबह के समय की जाने वाली प्रार्थना एवं राष्ट्र गान के बाद पोषण गुरू पोषण पर चर्चा करते हैं। आँगनवाड़ी केन्द्र में आकर महिलाओं और बच्चों को भी विस्तार से पोषण संबंधी जानकारी देते हैं। गीतों और भजनों से महिलाओं और बच्चों की आंगनवाड़ी केन्द्र में उपस्थिति बढ़ी है। साथ ही दतिया ज़िले में कुपोषण दर भी कम हुई है।
वर्तमान में अभियान में बच्चे के जन्म से पहले गर्भवती माता का ध्यान रखने संस्थागत जन्म और बच्चे को 6 माह तक केवल स्तनपान कराने आदि बातों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दतिया ज़िले को 21 अप्रैल 2022 को लोक प्रशासन से उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार प्राप्त हुआ था। इस अभियान में ज़िले में लगभग 526 अधिकारी और जन-प्रतिनिधियों के समूह बनाए गए, जो गाँव के कुपाषित बच्चों के सुपोषित करने की ज़िम्मेदारी लेते हैं और बच्चों से संबंधित समस्याओं का समाधान करते हैं।

