चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के गणित विभाग में चल रही वैदिक गणित की सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला के पांचवे दिन के प्रथम सत्र में जयपुर के आर्यन

वैदिक मैथमेटिक्स के अध्यक्ष नवीन भार्गव ने आधुनिक युग में वैदिक गणित की आवश्यकता पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि आधुनिक गणित में लिए गए 98% सूत्र वैदिक गणित से ही लिए गए हैं उन्होंने वैदिक गणित को आधुनिक गणित से बेहतर बताते हुए कहा है कि इसकी सहायता से साठ गुना तक तेज गणना की जा सकती हैं। विलोकनम सूत्र की सहायता से मात्र 5 सेकेंड के भीतर 2 अंकों और 3 अंकों की संख्याओं का वर्ग और घन किया जा सकता है और वर्गमूल घनमूल भी निकाला जा सकता है। आधुनिक गणित में त्रिकोणमिति में दो भुजाओं का पता होने पर ही तीसरी भुजा का पता लगा सकते हैं जबकि वैदिक गणित की सहायता से एक भुजा के पता होने पर भी दो भुजाओं का पता लगाया जा सकता है इस सत्र की अध्यक्षता गणित विभाग के डॉ संदीप ने की। यह सत्र सभी प्रतिभागियों के लिए बहुत रुचिमय और जानकारी पूर्ण रहा।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर अनुराधा गुप्ता ने धवजांक और परावर्त्य विधि की सहायता से छह व सात अंकों से बड़ी संख्या में भाग करने की चार सरल विधियों के बारे में विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि वैदिक विधि की सहायता से हम बीजगणितीय भाग गणित की तरह ही आसानी से कर सकते हैं उन्होंने विनकुलम, सूत्र का प्रयोग करके भाग को सरल तरीके से समझाया। परावर्त्य विधि की सहायता से उच्च घात वाले बहुपद को भाग करने के तरीकों के बारे में बताया। इस क्षेत्र में आगे क्या शोध किए जा सकते हैं उन्होंने इस विषय पर भी चर्चा की।इस सत्र की अध्यक्षता गणित विभाग के प्रोफेसर मुकेश शर्मा ने की। गणित विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शिवराज सिंह, डॉ सरू कुमारी ने प्रतीक चिन्ह देकर डॉ अनुराधा गुप्ता को सम्मानित किया।
कार्यक्रम के तीसरे सत्र में श्री सत्य साईं इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन के प्रोफेसर उदय किरण ने परावर्त्य सूत्र की फिलॉसफी पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि परावर्त्य सूत्र की सहायता से आंशिक भिन्न, बहुपद का शेषफल प्राप्त करना जैसी विधियों के बारे में बताया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की प्रोफेसर निधि हांडा ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर सोनिया गुप्ता ने किया। कार्यक्रम में रिंकी, वैशाली, उम्मेफरवा, दीप्ति, रश्मि आदि रहे।

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