‘राहुल गांधी के PA और सुरक्षाकर्मी ले रहे सारे फैसले’…गुलाम नबी आजाद के 5 पन्नों के इस्तीफे की बड़ी बातें

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने शुक्रवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता समेत सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजे पांच पेजों के इस्तीफे में आजाद ने कहा कि वह ‘भारी मन’ से यह कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ से पहले ‘कांग्रेस जोड़ो यात्रा’ निकाली जानी चाहिए थी।

आजाद ने कहा कि पार्टी में किसी भी स्तर पर चुनाव संपन्न नहीं हुए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि कांग्रेस लड़ने की अपनी इच्छाशक्ति और क्षमता खो चुकी है। आजाद पार्टी के ‘जी23′ समूह के प्रमुख सदस्य रहे हैं। हाल ही में उन्होंने जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के चुनाव अभियान समिति के प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया था।

गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे की बड़ी बातें

  • राहुल गांधी अपने आस-पास अनुभवहीन लोगों को रखते हैं और उन्होंने वरिष्ठ नेताओं को साइडलाइन कर दिया। राहुल गांधी पर पहले भी पार्ट टाइम पॉलिटिशियन होने के आरोप लगते रहे हैं। हार्दिक पटेल और हिमंत बिस्वा सरमा ने उन पर समय न देने का आरोप लगाया था।
  •  कांग्रेस ने अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस चलाने वाली राष्ट्रीय कार्यसमिति ने इच्छाशक्ति और क्षमता खो दी है।
  •  कांग्रेस को ‘भारत जोड़ो यात्रा’ शुरू करने से पहले पार्टी नेतृत्व को ‘कांग्रेस जोड़ो यात्रा’ करनी चाहिए थी।
  • राहुल गांधी के राजनीति में आने के बाद जब उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया था। उन्होंने कांग्रेस के कार्य करने के तौर-तरीकों को खत्म कर दिया, संपूर्ण सलाहकार तंत्र को ध्वस्त कर दिया। इसके साथ ही राहुल का प्रधानमंत्री द्वारा जारी किया गया अध्यादेश फाड़ना उनकी अपरिवक्ता दिखाता है, इससे 2014 में हार का सामना करना पड़ा। राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस ने कई राज्यों से अपनी पकड़ खो दी।
  • कांग्रेस अध्यक्ष पद पर चुनाव न कराने पर गांधी परिवार पर निशाना साधा। अपनी चिट्ठी में आजाद ने लिखा कि संगठन में किसी भी स्तर पर कहीं भी चुनाव नहीं हुआ।
  •  जी-23 के नेताओं ने कांग्रेस की कमजोरियां बताई तो उन सभी नेताओं को अपमानित किया गया।
  •  राहुल के पार्टी में आने से चर्चा की परंपरा खत्म हो गई। 2019 की हार के बाद पार्टी की हालत और बदतर हो गई।
  • आज कांग्रेस रिमोट कंट्रोल मॉडल से चल रही है। राहुल गांधी के पीए और सुरक्षाकर्मी पार्टी के बारे में फैसला ले रहे हैं। राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस 49 विधानसभा चुनाव में से 39 में हार चुकी है। बाकी 10 में से केवल चार में पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और बाकी छह मौकों पर पार्टी गठबंधन के साथ गई।

बता दें कि कुछ दिन पहले ही आजाद की नाराजगी उस समय भी सामने आई थी जब उन्होंने जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस के प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाए जाने के कुछ ही घंटों में उस पद से इस्तीफा दे दिया था। गुलाम नबी आजाद ने 1970 के दशक में कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे। 1973 में उन्हें जम्मू-कश्मीर के भलेसा ब्लॉक कांग्रेस का सचिव बनाया गया था। 1980 में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार लोकसभा सांसद बने। अपने पांच दशकों लम्बे राजनीतिक करियर में आजाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री, राज्यसभा में कांग्रेस दल के नेता और केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। इसी साल केंद्र सरकार ने राजनीति में उनके योयगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया।

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