त्योहारों में खाद्य विभाग की छापेमारी के नाम पर व्यापारियों का उत्पीड़न बंद हो! ऑनलाइन कंपनियों पर भी उठे सवाल, राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन

त्योहारों में खाद्य विभाग की छापेमारी के नाम पर व्यापारियों का उत्पीड़न बंद हो! ऑनलाइन कंपनियों पर भी उठे सवाल, राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन

मुजफ्फरनगर। छोटे, मध्यम और फुटकर व्यापारियों की समस्याओं को लेकर समाजवादी व्यापार सभा ने प्रदेश की राज्यपाल के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। जिलाध्यक्ष अब्दुल मुत्तलिब के नेतृत्व में पहुंचे व्यापारियों ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की जांच और सैंपलिंग प्रक्रिया में कथित उत्पीड़न पर रोक लगाने तथा ऑनलाइन व्यापारिक कंपनियों के बढ़ते प्रभाव से प्रभावित हो रहे स्थानीय बाजारों को संरक्षण देने की मांग उठाई।

व्यापारियों ने आरोप लगाया कि त्योहारों के दौरान मिठाई विक्रेताओं, हलवाइयों, किराना दुकानदारों और अन्य खाद्य कारोबारियों के प्रतिष्ठानों पर जांच एवं नमूने लेने की कार्रवाई के नाम पर अनावश्यक दबाव बनाया जाता है। इस दौरान अवैध वसूली की शिकायतें भी सामने आती हैं। व्यापार सभा ने स्पष्ट किया कि संगठन मिलावटखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई का समर्थक है, लेकिन इसकी आड़ में ईमानदारी से कारोबार करने वाले व्यापारियों को परेशान करना उचित नहीं है।

मिलावटखोरों पर कार्रवाई का समर्थन, ईमानदार व्यापारियों को राहत देने की मांग

ज्ञापन में कहा गया कि दीपावली सहित अन्य त्योहारों के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से हलवाइयों, मिठाई विक्रेताओं, परचून और किराना दुकानदारों के प्रतिष्ठानों पर जांच एवं सैंपलिंग की जाती है। मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन जांच के नाम पर व्यापारियों को भयभीत करना, अनावश्यक रूप से परेशान करना अथवा अवैध वसूली करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

व्यापार सभा ने मांग की कि खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच प्रक्रिया पूरी तरह नियमानुसार और पारदर्शी होनी चाहिए। नमूने लेते समय संबंधित व्यापारी को नियमानुसार रसीद, आवश्यक दस्तावेज और जांच से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। इससे कार्रवाई की निष्पक्षता बनी रहेगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश नहीं रहेगी।

ऑनलाइन कंपनियों के बढ़ते कारोबार से स्थानीय बाजार प्रभावित

व्यापारियों ने ज्ञापन में बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों और ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि ऑनलाइन कारोबार के विस्तार से स्थानीय बाजारों में छोटे दुकानदारों के सामने प्रतिस्पर्धा की चुनौती बढ़ गई है। रेडीमेड, कपड़ा, किराना, परचून, गुमटी और अन्य फुटकर कारोबार से जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका स्थानीय व्यापार पर निर्भर है।

व्यापारियों के अनुसार, बड़ी कंपनियों की ओर से दी जाने वाली अत्यधिक छूट और मूल्य निर्धारण की नीतियों के कारण छोटे दुकानदारों के लिए बाजार में टिके रहना मुश्किल हो रहा है। इसका असर केवल दुकानदारों के कारोबार पर ही नहीं, बल्कि स्थानीय रोजगार और बाजार की आर्थिक व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।

व्यापार सभा ने कहा कि संगठन तकनीकी विकास या ऑनलाइन व्यापार के विरोध में नहीं है, लेकिन सभी व्यापारियों को प्रतिस्पर्धा के समान अवसर मिलने चाहिए। बड़ी कंपनियों की संभावित अनुचित व्यापारिक गतिविधियों की नियमानुसार जांच होनी चाहिए और स्थानीय दुकानदारों को संरक्षण देने के लिए प्रभावी नीति बनाई जानी चाहिए।

आठ सूत्रीय मांगों के जरिए उठाए व्यापारियों के मुद्दे

ज्ञापन में व्यापार सभा ने आठ सूत्रीय मांगें प्रशासन और प्रदेश सरकार के सामने रखीं। इनमें खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच एवं सैंपलिंग प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने, व्यापारियों को धमकाने या अवैध वसूली की शिकायतों की जांच कर दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग शामिल है।

इसके साथ ही सैंपलिंग के दौरान व्यापारियों को नियमानुसार रसीद और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने, मुजफ्फरनगर में छोटे व्यापारियों की शिकायतों के समाधान के लिए जिला स्तरीय शिकायत निवारण व्यवस्था स्थापित करने तथा त्योहारों के दौरान जागरूकता और विधिसम्मत कार्रवाई को प्राथमिकता देने की मांग की गई।

व्यापार सभा ने ऑनलाइन कंपनियों की ओर से अत्यधिक छूट और अनुचित मूल्य निर्धारण से जुड़ी संभावित गतिविधियों की जांच कराने, छोटे व्यापारियों को डिजिटल व्यापार से जोड़ने के लिए आर्थिक एवं तकनीकी सहायता देने और स्थानीय बाजारों तथा परंपरागत कारोबार को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं लागू करने की भी मांग उठाई।

छोटे व्यापारियों की आजीविका बचाने के लिए सरकार से हस्तक्षेप की अपील

व्यापार सभा के पदाधिकारियों ने कहा कि छोटे दुकानदारों का कारोबार केवल उनकी व्यक्तिगत आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि इससे हजारों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। स्थानीय व्यापार कमजोर होने से रोजगार और बाजार की आर्थिक व्यवस्था पर भी असर पड़ता है। इसलिए सरकार को छोटे व्यापारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उनके सम्मान, सुरक्षा और आजीविका की रक्षा के लिए समयबद्ध कदम उठाने चाहिए।

ज्ञापन में कहा गया कि कानून का पालन सभी के लिए जरूरी है। मिलावटखोरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन किसी भी ईमानदार व्यापारी का आर्थिक, मानसिक या सामाजिक उत्पीड़न नहीं होना चाहिए। व्यापारियों ने राज्यपाल से पूरे मामले का संज्ञान लेकर संबंधित विभागों और प्रदेश सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया।

गौरव जैन सहित अनेक व्यापारी प्रतिनिधि रहे मौजूद

ज्ञापन सौंपने के दौरान गौरव जैन (पूर्व प्रत्याशी एमएलसी), साजिद हसन, नियाज अहमद, इसरार अल्वी, गोल्डी राणा, बाबर, जुबेर, गुलनाज परवीन, मोहम्मद उमर, दानिश एडवोकेट, फहीम, ताहिर, साबिर, सबलू, नईम, गय्युर, सलमान, शाहमीर सालार, मुजफ्फर, मोहसिन, नौशाद कुरैशी, अदब सहित अनेक व्यापारी प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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