अमित शाह के ‘अंगद के पैर’ वाले बयान पर शंकराचार्य का पलटवार: बोले- सत्ता की मजबूती नहीं, धर्म और न्याय से तय होता है रामराज्य

अमित शाह के ‘अंगद के पैर’ वाले बयान पर शंकराचार्य का पलटवार: बोले- सत्ता की मजबूती नहीं, धर्म और न्याय से तय होता है रामराज्य

वाराणसी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार की स्थिति की तुलना ‘अंगद के पैर’ से किए जाने पर ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि अंगद का पैर किसी सत्ता या अहंकार के बल पर नहीं, बल्कि सत्य, धर्म और न्याय की शक्ति के आधार पर स्थिर था।

शंकराचार्य ने कहा कि राजनीतिज्ञों को यह समझना चाहिए कि धर्मग्रंथों के प्रसंगों और प्रतीकों का अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार इस्तेमाल करना धर्म का सम्मान नहीं, बल्कि उसका सरलीकरण है। अंगद जी ने रावण की सभा में स्पष्ट किया था कि उनका पैर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के धर्म, सत्य और न्याय की नीति के प्रभाव से अडिग है। ऐसे में अंगद के पैर के प्रसंग को सत्ता के अहंकार और राजनीतिक मजबूती से जोड़ना उचित नहीं है।

उन्होंने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस शासन में बटुकों की चोटियां खींचे जाने, संतों पर निर्ममतापूर्वक प्रहार किए जाने और लाखों गौमाताओं के कटने जैसे आरोप हों, उस शासन की तुलना रामराज्य से कदापि नहीं की जा सकती।

शंकराचार्य ने कहा कि रामराज्य की मूल भावना धर्म, न्याय, करुणा, मर्यादा और लोककल्याण पर आधारित थी। इसलिए किसी भी सरकार का मूल्यांकन सत्ता की मजबूती के आधार पर नहीं, बल्कि उसके शासन में धर्म, न्याय और जनकल्याण की स्थिति के आधार पर किया जाना चाहिए।

बुधवार को शंकराचार्य के स्थानीय मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने यह जानकारी दी।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *