मुजफ्फरनगर। शहर में महर्षि भगवान वाल्मीकि जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम उस समय विवाद का केंद्र बन गया, जब प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव राकेश शर्मा के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। नॉवेल्टी चौक का नाम महर्षि भगवान वाल्मीकि के नाम पर रखने की पुरानी मांग को लेकर शुरू हुई बहस देखते ही देखते बढ़ गई। इस दौरान माइक को लेकर दोनों नेताओं के बीच खींचतान की स्थिति बन गई। आरोप है कि सपा नेता राकेश शर्मा ने मंत्री कपिल देव अग्रवाल के हाथ से माइक लेने की कोशिश की, लेकिन मंत्री ने माइक नहीं छोड़ा। घटनाक्रम के दौरान दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच भी कहासुनी होने की बात सामने आई है। सोमवार शाम करीब पांच बजे नॉवेल्टी चौक के पास हुए इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

विवाद की मुख्य वजह पिछले वर्ष नॉवेल्टी चौक का नाम महर्षि भगवान वाल्मीकि के नाम पर रखने को लेकर दिया गया कथित आश्वासन बताया जा रहा है। सपा नेता राकेश शर्मा का कहना है कि पिछले साल इस संबंध में मांग उठाई गई थी और नामकरण का आश्वासन भी मिला था, लेकिन अब तक मांग पूरी नहीं हुई। वहीं, राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल की ओर से ओमेगा होटल वाले मार्ग का नाम महर्षि भगवान वाल्मीकि के नाम पर रखने की बात कही गई। इसी मुद्दे पर कार्यक्रम में सवाल-जवाब का सिलसिला बढ़ा और मामला तीखी बहस तक पहुंच गया।

वाल्मीकि जयंती के कार्यक्रम में नामकरण की मांग पर उठे सवाल
मुजफ्फरनगर शहर के नॉवेल्टी चौक के पास सोमवार शाम महर्षि भगवान वाल्मीकि जयंती के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव राकेश शर्मा सहित कई लोग मौजूद थे। इस दौरान वाल्मीकि समाज के कुछ लोगों ने सार्वजनिक स्थल का नाम महर्षि भगवान वाल्मीकि के नाम पर रखने की मांग उठाई।
लोगों का कहना था कि पिछले वर्ष भी नॉवेल्टी चौक के नामकरण का मुद्दा उठाया गया था। उस समय मांग पूरी करने का आश्वासन दिए जाने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसी को लेकर समाज के लोग जवाब चाहते थे कि नामकरण की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है और इस संबंध में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
कार्यक्रम के दौरान राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल लोगों से बातचीत कर रहे थे। इसी बीच सपा नेता राकेश शर्मा ने भी नामकरण को लेकर सवाल उठाए। दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ी तो माहौल गर्म हो गया और बहस शुरू हो गई।
मंत्री के हाथ से माइक लेने की कोशिश, दोनों नेताओं में बढ़ी बहस
कार्यक्रम के दौरान राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल जब अपनी बात रख रहे थे, तभी राकेश शर्मा ने कथित तौर पर उनके हाथ से माइक लेने की कोशिश की। मंत्री ने माइक नहीं छोड़ा, जिसके बाद दोनों नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
इस दौरान मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने माइक लेने को लेकर सवाल उठाए। बातचीत के बीच दोनों नेताओं के तेवर तल्ख होते नजर आए। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच भी हलचल बढ़ गई और समर्थकों के आमने-सामने आने से माहौल तनावपूर्ण हो गया।
घटनाक्रम के दौरान कहासुनी और धक्का-मुक्की की स्थिति बनने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, पूरे घटनाक्रम के सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद मामला चर्चा में आ गया।
राकेश शर्मा बोले, पिछले साल नामकरण का दिया गया था आश्वासन
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव राकेश शर्मा ने विवाद की वजह बताते हुए कहा कि पिछले वर्ष महर्षि भगवान वाल्मीकि जयंती के अवसर पर वाल्मीकि समाज के लोगों ने नॉवेल्टी चौक का नाम महर्षि भगवान वाल्मीकि के नाम पर रखने की मांग उठाई थी।
राकेश शर्मा के मुताबिक, उस समय राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने समाज के लोगों को मांग पूरी करने का आश्वासन दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने स्वयं महर्षि भगवान वाल्मीकि की प्रतिमा स्थापित कराने की घोषणा की थी।
सपा नेता का कहना है कि इस वर्ष जयंती कार्यक्रम में समाज के लोग पिछले वर्ष दिए गए आश्वासन पर हुई कार्रवाई के बारे में जानकारी चाहते थे। उनका सवाल था कि जब नॉवेल्टी चौक के नामकरण की बात कही गई थी तो अब तक इस दिशा में क्या प्रगति हुई है।
राकेश शर्मा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि समाज के लोगों को अपने अधिकारों और मांगों को लेकर सवाल पूछने का अधिकार है। उनके अनुसार, नामकरण की मांग पहले भी उठाई गई थी और समाज के लोग अब इस पर ठोस कार्रवाई चाहते हैं।
नॉवेल्टी चौक या ओमेगा होटल वाला मार्ग, इसी मुद्दे पर बढ़ा विवाद
पूरे घटनाक्रम में नॉवेल्टी चौक और ओमेगा होटल वाले मार्ग के नामकरण को लेकर सामने आया मतभेद अहम बताया जा रहा है। राकेश शर्मा के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने नॉवेल्टी चौक के बजाय ओमेगा होटल वाले मार्ग का नाम महर्षि भगवान वाल्मीकि के नाम पर रखने की बात कही।
इस पर कार्यक्रम में मौजूद वाल्मीकि समाज के कुछ लोगों ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि उनकी मांग नॉवेल्टी चौक का नाम बदलने की थी, जबकि अब दूसरे मार्ग के नामकरण की बात की जा रही है।
इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच सवाल-जवाब शुरू हुए। नामकरण के स्थान को लेकर सहमति नहीं बन पाने के कारण बातचीत तीखी बहस में बदल गई। देखते ही देखते विवाद माइक तक पहुंच गया और कार्यक्रम का माहौल गरमा गया।
स्थानीय स्तर पर उठी इस मांग को लेकर अब यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि पिछले वर्ष कथित तौर पर दिया गया आश्वासन किस स्तर पर था और उसके बाद नामकरण की प्रक्रिया में क्या कार्रवाई हुई।
कपिल देव अग्रवाल का दावा, जल्द पारित होगा नामकरण का प्रस्ताव
राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने भी नामकरण के मुद्दे पर अपना पक्ष रखा। उनके अनुसार, वाल्मीकि समाज की ओर से ओमेगा होटल वाले मार्ग का नाम महर्षि भगवान वाल्मीकि के नाम पर रखने की बात कही गई है।
मंत्री ने दावा किया कि इस संबंध में जल्द ही प्रस्ताव पारित हो जाएगा। हालांकि, प्रस्ताव किस संबंधित निकाय या विभाग के समक्ष रखा जाएगा और उसे औपचारिक मंजूरी कब तक मिलेगी, इस संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान माइक लेने की कोशिश पर भी आपत्ति जताई और सवाल उठाया कि किसी के हाथ से माइक लेने का अधिकार किसे है। इस मुद्दे पर दोनों नेताओं के बीच हुई नोकझोंक ने नामकरण की मूल मांग को पीछे छोड़कर घटनाक्रम को राजनीतिक चर्चा का विषय बना दिया।
फिलहाल मंत्री के दावे के अनुसार प्रस्ताव जल्द पारित होने की उम्मीद जताई गई है, लेकिन नॉवेल्टी चौक के नामकरण को लेकर उठी पुरानी मांग का क्या होगा, इस पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
वायरल वीडियो के बाद शहर में चर्चा, नामकरण का मुद्दा फिर सुर्खियों में
सोमवार शाम हुए घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला शहर की चर्चाओं में आ गया है। वीडियो में माइक को लेकर दोनों नेताओं के बीच तनातनी का घटनाक्रम चर्चा का विषय बना हुआ है। विवाद के बाद नामकरण को लेकर दोनों पक्षों के रुख पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
एक ओर सपा नेता राकेश शर्मा पिछले वर्ष के कथित आश्वासन के आधार पर नॉवेल्टी चौक का नाम महर्षि भगवान वाल्मीकि के नाम पर रखने की मांग उठा रहे हैं। दूसरी ओर, मंत्री कपिल देव अग्रवाल ओमेगा होटल वाले मार्ग के नामकरण का प्रस्ताव जल्द पारित होने का दावा कर रहे हैं।
इस पूरे मामले में मूल सवाल यही है कि सार्वजनिक स्थल के नामकरण को लेकर समाज की मांग पर अब तक क्या कार्रवाई हुई और आगे किस स्थान के नामकरण को मंजूरी दी जाएगी। संबंधित निकाय की औपचारिक प्रक्रिया और प्रस्ताव की स्थिति सामने आने के बाद ही इस बारे में स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।
विधानसभा चुनाव से पहले स्थानीय मुद्दे पर राजनीतिक टकराव
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच स्थानीय मुद्दों को लेकर बयानबाजी और सार्वजनिक मंचों पर टकराव चर्चा में रहते हैं। मुजफ्फरनगर में वाल्मीकि जयंती के कार्यक्रम के दौरान भाजपा सरकार के मंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव के बीच हुई नोकझोंक भी इसी संदर्भ में चर्चा का विषय बनी है।
हालांकि, इस विवाद का प्रत्यक्ष मुद्दा महर्षि भगवान वाल्मीकि के नाम पर सार्वजनिक स्थल का नामकरण है। समाज की ओर से उठाई गई मांग, पिछले वर्ष दिए गए कथित आश्वासन और अब दूसरे मार्ग के नामकरण की बात के बीच मतभेद सामने आया है।
इस मामले में नामकरण की प्रक्रिया पूरी होना और प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी मिलना ही आगे की स्थिति स्पष्ट करेगा। फिलहाल विवाद के बाद दोनों नेताओं के बीच हुई नोकझोंक और माइक को लेकर खींचतान की चर्चा जारी है।
पुराने आश्वासन पर कार्रवाई का इंतजार
महर्षि भगवान वाल्मीकि जयंती के कार्यक्रम में हुए विवाद ने नॉवेल्टी चौक के नामकरण की मांग को एक बार फिर सामने ला दिया है। सपा नेता राकेश शर्मा पुराने आश्वासन का हवाला देते हुए नॉवेल्टी चौक के नामकरण की मांग पर कायम हैं, जबकि राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने ओमेगा होटल वाले मार्ग का नाम महर्षि भगवान वाल्मीकि के नाम पर रखने का प्रस्ताव जल्द पारित होने का दावा किया है।
अब निगाहें संबंधित निकाय की कार्रवाई पर टिकी हैं। यह स्पष्ट होना बाकी है कि नॉवेल्टी चौक के नामकरण की मांग पर क्या निर्णय लिया जाएगा और ओमेगा होटल वाले मार्ग के संबंध में प्रस्ताव किस प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा।
फिलहाल मुजफ्फरनगर में वाल्मीकि जयंती के कार्यक्रम के दौरान मंत्री कपिल देव अग्रवाल और सपा नेता राकेश शर्मा के बीच माइक को लेकर हुई खींचतान ने नामकरण के मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। सवाल यह है कि नॉवेल्टी चौक के नामकरण की पुरानी मांग पर निर्णय होगा या ओमेगा होटल वाले मार्ग के नामकरण के प्रस्ताव को मंजूरी मिलेगी। इसका जवाब संबंधित निकाय की आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

