मुजफ्फरनगर। शाहपुर थाना क्षेत्र के गांव कुटबा में हुई फायरिंग की घटना में नामजद आरोपी जयकुमार उर्फ कुक्कू की स्थिति को लेकर पुलिस और उसके परिजनों के बयानों में अंतर सामने आया है। परिजनों का दावा है कि पुलिस ने जयकुमार को हिरासत में ले लिया था। इसी जानकारी के आधार पर सोमवार सुबह परिवार के लोग उससे मिलने शाहपुर थाने पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें बताया गया कि जयकुमार रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात थाने से चला गया। दूसरी ओर, सीओ बुढ़ाना गजेंद्र पाल सिंह का कहना है कि जयकुमार फायरिंग की घटना के बाद से ही फरार है। पुलिस अधिकारी के इस बयान और परिजनों के दावे के बीच आरोपी की वास्तविक स्थिति को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

मामले में अभी तक जयकुमार को औपचारिक रूप से हिरासत में लिए जाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था, पूछताछ के लिए बुलाया था या उसके संबंध में परिजनों को कोई दूसरी जानकारी मिली थी। यदि आरोपी थाने में मौजूद था तो उसके वहां से जाने की परिस्थितियों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।

आरोपी से मिलने पहुंचे परिजन, थाने में मिली अलग जानकारी
सोमवार सुबह जयकुमार उर्फ कुक्कू के भाई रामकुमार और कृष्णपाल सहित परिवार के कई सदस्य शाहपुर थाने पहुंचे। परिवार की महिलाएं भी उनके साथ थीं। परिजनों के मुताबिक, उन्हें जानकारी मिली थी कि पुलिस ने जयकुमार को पकड़ लिया है। इसी कारण वे उसकी स्थिति जानने और उससे मिलने के लिए थाने पहुंचे थे।
परिवार के लोगों का कहना है कि जब उन्होंने पुलिसकर्मियों से जयकुमार के बारे में जानकारी मांगी तो उन्हें बताया गया कि वह रात में थाने से चला गया है। यह सुनकर परिजन हैरान रह गए। उनका सवाल था कि यदि जयकुमार पुलिस की हिरासत में था तो वह थाने से किस तरह चला गया और उसे जाने देने की परिस्थितियां क्या थीं।
परिजनों के इस दावे के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया। हालांकि, थाने में जयकुमार की मौजूदगी, उसे हिरासत में लेने और उसके वहां से जाने के संबंध में कोई आधिकारिक रिकॉर्ड या विस्तृत पुलिस स्पष्टीकरण सामने आने की जानकारी नहीं है।
स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने पर थाने में हुई नोकझोंक
जयकुमार के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने पर परिजनों ने शाहपुर थाने में पुलिस से सवाल-जवाब किए। इस दौरान काफी देर तक बातचीत होती रही और हंगामे जैसी स्थिति बनी रही। परिवार के लोग जानना चाहते थे कि जयकुमार को वास्तव में पुलिस ने पकड़ा था या नहीं और यदि वह थाने में था तो अब कहां है।
परिजनों का कहना था कि वे अपने परिवार के सदस्य से मिलने और उसकी स्थिति जानने आए थे, लेकिन उन्हें ऐसा जवाब मिला जिससे उनकी उलझन और बढ़ गई। परिवार ने पुलिस से पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
काफी देर तक थाने में रहने के बाद परिजन वापस गांव लौट गए। उनके जाने के बाद भी जयकुमार की वास्तविक स्थिति को लेकर उठे सवालों का स्पष्ट उत्तर सामने नहीं आया।
सीओ बुढ़ाना का दावा, घटना के बाद से फरार है आरोपी
मामले में सीओ बुढ़ाना गजेंद्र पाल सिंह का बयान परिजनों के दावे से अलग है। सीओ के अनुसार, 21 अक्टूबर की रात गांव कुटबा में फायरिंग की सूचना डायल-112 के माध्यम से पुलिस को मिली थी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले में शिकायतकर्ता चंचल कुमार की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया।
सीओ ने बताया कि फायरिंग की घटना में नामजद जयकुमार उर्फ कुक्कू घटना के बाद से फरार है। पुलिस के इस बयान के मुताबिक, आरोपी को गिरफ्तार किए जाने की पुष्टि नहीं होती।
हालांकि, परिजनों का कहना है कि उन्हें जयकुमार के पकड़े जाने की जानकारी मिली थी और इसी आधार पर वे थाने पहुंचे थे। ऐसे में दोनों पक्षों की बातों के बीच अंतर बना हुआ है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि परिजनों को जयकुमार की हिरासत की जानकारी कहां से मिली और थाने पहुंचने पर उन्हें उसके रात में चले जाने की बात किस आधार पर बताई गई।
लाइब्रेरी से घर लौट रहे भाइयों पर फायरिंग का आरोप
पूरा मामला शाहपुर थाना क्षेत्र के गांव कुटबा में 21 अक्टूबर की रात हुई फायरिंग की घटना से जुड़ा है। शिकायतकर्ता चंचल कुमार के अनुसार, वह अपने छोटे भाई आयुष के साथ लाइब्रेरी में पढ़ाई करने के बाद घर लौट रहा था।
चंचल कुमार का आरोप है कि रात करीब नौ बजे जब दोनों भाई लाइब्रेरी के गेट पर पहुंचे तो जयकुमार उर्फ कुक्कू ने कथित तौर पर उन पर फायरिंग कर दी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि फायरिंग जान से मारने की नीयत से की गई थी।
घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी। इस प्रकरण में जयकुमार को नामजद आरोपी बनाया गया है। हालांकि, फायरिंग की घटना से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगी।
हिरासत को लेकर कई सवाल, आधिकारिक रिकॉर्ड से स्पष्ट होगी स्थिति
जयकुमार की स्थिति को लेकर परिजनों और पुलिस अधिकारी के अलग-अलग बयानों ने मामले में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि क्या जयकुमार को वास्तव में पुलिस ने हिरासत में लिया था। यदि उसे पकड़ा गया था तो उसकी गिरफ्तारी या हिरासत से संबंधित कोई आधिकारिक प्रविष्टि दर्ज की गई थी या नहीं।
इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि यदि जयकुमार थाने में मौजूद था तो वह किन परिस्थितियों में वहां से गया। क्या उसे पूछताछ के लिए बुलाया गया था, क्या वह किसी अन्य प्रक्रिया के तहत थाने पहुंचा था या परिजनों को मिली जानकारी में कोई गलतफहमी थी—इन पहलुओं पर अभी स्थिति साफ नहीं है।
दूसरी ओर, सीओ बुढ़ाना का कहना है कि आरोपी घटना के बाद से फरार है। ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि परिजनों को उसकी कथित हिरासत के बारे में जानकारी किस माध्यम से मिली। इन सवालों का जवाब संबंधित पुलिस रिकॉर्ड, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों से ही स्पष्ट हो सकता है।
पुलिस की विस्तृत सफाई का इंतजार
कुटबा फायरिंग कांड में नामजद आरोपी की स्थिति को लेकर अब पुलिस की विस्तृत सफाई महत्वपूर्ण हो गई है। मामले में परिजनों के दावे और सीओ के बयान के बीच अंतर को दूर करने के लिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि जयकुमार को कभी औपचारिक रूप से हिरासत में लिया गया था या नहीं।
यदि उसे हिरासत में नहीं लिया गया था तो परिजनों को मिली जानकारी और थाने में कथित तौर पर दिए गए जवाब के संबंध में स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। वहीं, यदि वह किसी समय पुलिस की हिरासत में था तो उसकी मौजूदगी और थाने से जाने की परिस्थितियों का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल पुलिस की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार जयकुमार घटना के बाद से फरार बताया जा रहा है, जबकि उसके परिजन उसे पकड़े जाने का दावा कर रहे हैं। दोनों बयानों के बीच वास्तविक स्थिति क्या है, यह आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद ही सामने आ सकेगा।
कुटबा फायरिंग कांड में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल जयकुमार उर्फ कुक्कू की स्थिति को लेकर है। परिजनों का दावा है कि पुलिस ने उसे पकड़ लिया था, जबकि सीओ बुढ़ाना उसे घटना के बाद से फरार बता रहे हैं। ऐसे में थाने के रिकॉर्ड और पुलिस की विस्तृत सफाई से ही स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपी को हिरासत में लिया गया था या नहीं और उसके संबंध में परिजनों को मिली जानकारी का आधार क्या था।

