मुजफ्फरनगर। शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण और लगातार खराब होती हवा की गुणवत्ता को देखते हुए निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल पर अंकुश लगाने की तैयारी तेज कर दी गई है। दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप-1) के तहत लागू प्रतिबंधों के बीच मुजफ्फरनगर में भी निर्माण कार्यों के दौरान प्रदूषण नियंत्रण संबंधी नियमों का पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण से प्राप्त सूची के आधार पर 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली 17 निर्माण साइटों को चेतावनी नोटिस जारी किए हैं।

इन साइटों के संचालकों को निर्माण के दौरान धूल उड़ने से रोकने, निर्माण सामग्री को ढककर रखने और मलबे का परिवहन ढके हुए वाहनों से करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित निर्माण संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

एक्यूआई 210 के पार, प्रदूषण को लेकर बढ़ी चिंता
शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 210 से अधिक दर्ज किए जाने और इससे पहले 300 तक पहुंचने की जानकारी सामने आने के बाद प्रदूषण नियंत्रण को लेकर चिंता बढ़ गई है। हवा में धूल और अन्य प्रदूषक तत्वों की मात्रा कम करने के लिए संबंधित विभागों ने निगरानी बढ़ाने की तैयारी की है।
निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल वायु प्रदूषण के प्रमुख स्थानीय स्रोतों में शामिल हो सकती है। ऐसे में निर्माण गतिविधियों के दौरान आवश्यक सावधानियां बरतना महत्वपूर्ण है। प्रशासन की ओर से निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपायों की जांच और नियमों के पालन की स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
17 निर्माण साइटों की सूची मिलने पर उठे सवाल
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण से 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली 17 निर्माण साइटों की सूची प्राप्त हुई है। इसी सूची के आधार पर इन साइटों को चिह्नित कर चेतावनी नोटिस जारी किए गए हैं।
हालांकि, शहर के एटूजेड रोड, बाईपास और अन्य क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर निर्माण कार्य चलने की जानकारी सामने आती रही है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या जिले में 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली सभी निर्माण साइटों का पूरा विवरण संबंधित विभागों के पास उपलब्ध है या फिर अन्य साइटों की पहचान और सूची तैयार करने का काम अभी बाकी है।
निर्माण स्थलों की सही संख्या और उनके क्षेत्रफल का रिकॉर्ड तैयार करना इसलिए भी जरूरी है, ताकि सभी पात्र साइटों पर प्रदूषण नियंत्रण संबंधी नियमों को समान रूप से लागू कराया जा सके। फिलहाल बोर्ड को उपलब्ध सूची में शामिल 17 साइटों के संचालकों को नोटिस जारी किए गए हैं।
एंटी-स्मॉग गन और पानी के छिड़काव के निर्देश
चिह्नित निर्माण स्थलों पर धूल को नियंत्रित करने के लिए एंटी-स्मॉग गन के नियमित उपयोग और पानी के छिड़काव सहित आवश्यक उपाय अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। निर्माण सामग्री को खुले में छोड़ने के बजाय ढककर रखने को कहा गया है, ताकि हवा चलने पर धूल आसपास के आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों में न फैले।
निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे को ले जाने वाले वाहनों को भी ढककर रखने के निर्देश हैं। इसके अतिरिक्त निर्माण स्थलों पर सफाई, धूल नियंत्रण और संबंधित मानकों के पालन पर ध्यान देना होगा।
इन उपायों का उद्देश्य निर्माण गतिविधियों के कारण हवा में फैलने वाले धूलकणों को कम करना और आसपास रहने वाले लोगों को प्रदूषण के प्रभाव से बचाना है।
वेब पोर्टल और कैमरों से निगरानी की व्यवस्था
निर्माण स्थलों की निगरानी के लिए डिजिटल व्यवस्था अपनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। संबंधित साइटों को निर्धारित वेब पोर्टल पर पंजीकृत रखने तथा पीटीजेड यानी पैन-टिल्ट-जूम कैमरों के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। इन कैमरों की मदद से निर्माण स्थल के अलग-अलग हिस्सों पर नजर रखी जा सकती है।
प्रस्तावित निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्माण स्थल पर धूल नियंत्रण के उपाय केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका पालन भी किया जाए। नियमों की अनदेखी सामने आने पर संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।
पर्यावरण सचिव की बैठक के बाद बढ़ी सक्रियता
वायु प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए पर्यावरण सचिव की अध्यक्षता में संबंधित विभागों के साथ समन्वय बैठक की गई थी। इसमें नगरपालिका, मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण, प्रदूषण नियंत्रण विभाग और कृषि विभाग सहित संबंधित विभागों के बीच तालमेल बढ़ाने और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया।
बैठक के बाद निर्माण स्थलों की जानकारी जुटाने और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी कार्रवाई को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज की गई। अधिकारियों की टीमें क्षेत्र में भ्रमण कर निर्माण स्थलों पर अपनाए जा रहे उपायों का जायजा ले रही हैं। निरीक्षण के दौरान नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित निर्माण संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
नियमों की अनदेखी पर होगी कार्रवाई: गीतेश चंद्रा
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी गीतेश चंद्रा ने बताया कि ग्रेप-1 के संबंध में विभिन्न विभागों की संयुक्त समन्वय बैठक हुई थी। मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण की ओर से 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली 17 निर्माण साइटों की सूची उपलब्ध कराई गई है। इन सभी साइटों के संचालकों को चेतावनी नोटिस जारी किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि निर्माण स्थलों पर निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य है। यदि निरीक्षण के दौरान नियमों की अनदेखी पाई जाती है तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभागीय टीमें क्षेत्र में निगरानी और भ्रमण कर रही हैं।
धूल नियंत्रण से ही मिलेगी प्रदूषण पर अंकुश लगाने में मदद
निर्माण सामग्री को खुले में रखना, मलबे को बिना ढके ले जाना और धूल नियंत्रण के लिए पानी का छिड़काव नहीं करना आसपास के वातावरण को प्रभावित कर सकता है। इससे आम लोगों को सांस लेने में परेशानी सहित प्रदूषण से जुड़ी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
ऐसे में जरूरी है कि निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए और सभी पात्र साइटों का पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाए। प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी रहती है, यह आने वाले दिनों में होने वाले निरीक्षण और कार्रवाई से स्पष्ट होगा।

