किसी भी देश के विकास में वहां की जनसंख्या तब लाभदायक है जब उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का समुचित रूप से दोहन हो सकें, साथ ही जमीनी आवश्यकताओं की पूर्ति भी पक्ति में खड़े अंतिम पायदान तक के व्यक्ति तक पहुँच सकें । विभिन्न विषमताओं से पूर्ण इस देश में सभी के पीछे प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष कारणों में से देश की जनसख्याँ ही बड़े कारण के रूप में दिखाई पड़ती है। देश में जनसँख्या नियंत्रण की मांग लम्बे समय से हो रही है जिसका कही सहयोग तो कही विरोध भी दिख रहा है। हाल ही में सामने आये राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण यानि की एनएचएफएस – 5 की रिपोर्ट का कुछ लोग खूब हवाला दे रहें है। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रजनन दर में लगातार कमी आ रही है। साथ ही देश अब प्रतिस्थापन दर को प्राप्त करने वाला है | इसके आधार पर यह भी कहा जा रहा है कि देश में अब जनसंख्या नियंत्रण की कोई आवश्यकता नहीं है। जबकि हकीकत यह है की यह एक सीमित समूह का सर्वेक्षण है, जो वास्तव में जमीनी सच्चाई को बयां नहीं कर रहा है।

