मुजफ्फरनगर में दहेज में कार नहीं मिली तो विवाहिता को घर से निकाला! समझौते के दौरान गला घोंटने की कोशिश, 6 पर मुकदमा

मुजफ्फरनगर में दहेज में कार नहीं मिली तो विवाहिता को घर से निकाला! समझौते के दौरान गला घोंटने की कोशिश, 6 पर मुकदमा

मुजफ्फरनगर। दहेज में कार की मांग पूरी नहीं होने पर विवाहिता को कथित रूप से प्रताड़ित करने, घर से निकालने और समझौते के लिए बुलाई गई बैठक में उसका गला घोंटने की कोशिश करने का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़िता के पिता की शिकायत पर न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि विवाहिता के साथ मारपीट करने के अलावा बीच-बचाव करने पहुंचे उसके पिता को भी पीटा गया। पीड़ित परिवार ने पुलिस से शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

मामला मोरना निवासी एक व्यक्ति की बेटी से जुड़ा है, जिसका निकाह 14 फरवरी 2024 को संभलहेड़ा निवासी साजिद के साथ हुआ था। पीड़ित पिता के मुताबिक, बेटी के निकाह में करीब 15 लाख रुपये खर्च किए गए थे। इस दौरान घरेलू सामान, मोटरसाइकिल, जेवरात, कीमती कपड़े और अन्य जरूरी सामान भी दिया गया था। आरोप है कि निकाह के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग विवाहिता पर मायके से कार लाने का दबाव बनाने लगे। मांग पूरी नहीं होने पर उसे कथित रूप से परेशान किया जाने लगा।

कार की मांग पूरी नहीं होने पर घर से निकालने का आरोप

पीड़ित पिता ने न्यायालय में दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि कार की मांग पूरी नहीं होने पर करीब छह महीने पहले उनकी बेटी को ससुराल से बाहर निकाल दिया गया। आरोप है कि विवाहिता को केवल पहने हुए कपड़ों में घर से निकालते हुए कह दिया गया कि जब तक वह मायके से कार लेकर नहीं आएगी, तब तक उसे वापस ससुराल में नहीं रखा जाएगा।

पिता के अनुसार, इस घटना के बाद परिवार ने दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने के कई प्रयास किए। परिवार को उम्मीद थी कि बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकल आएगा और उनकी बेटी को दोबारा ससुराल में सम्मानपूर्वक रहने का अवसर मिलेगा। इसी सिलसिले में चार जून 2026 को समझौते के लिए ससुराल पक्ष की ओर से उन्हें संभलहेड़ा बुलाया गया।

समझौते की बैठक में गला घोंटने की कोशिश का आरोप

शिकायत के मुताबिक, चार जून को पीड़ित पिता अपनी बेटी और भाई के साथ संभलहेड़ा पहुंचे थे। वहां दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही थी। आरोप है कि इसी दौरान विवाद बढ़ गया और साजिद तथा दिलशाद ने विवाहिता के गले में रस्सी डालकर उसका गला घोंटने की कोशिश की।

प्रार्थना पत्र के अनुसार, मौके पर मौजूद पिता और उनके भाई ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए विवाहिता को बचाया। आरोप है कि इसके बाद साजिद, वाजिद और दिलशाद ने मिलकर पिता और बेटी के साथ लाठी-डंडों से मारपीट की। बीच-बचाव करने पहुंचे पिता के साथ भी लात-घूंसों से मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है।

घटना के बाद पीड़ित परिवार ने मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की। हालांकि, गला घोंटने की कोशिश और मारपीट से जुड़े आरोपों की पुष्टि पुलिस की जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होनी बाकी है।

सरकारी अस्पताल में उपचार और मेडिकल दस्तावेजों का हवाला

पीड़ित पिता ने न्यायालय में बताया कि कथित हमले के बाद वह अपनी बेटी के साथ जानसठ स्थित सरकारी अस्पताल पहुंचे थे, जहां उनका उपचार और चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। शिकायत में मेडिकल रिपोर्ट, एक्स-रे और विवाहिता के हाथ पर प्लास्टर चढ़ाए जाने से संबंधित दस्तावेजों का भी उल्लेख किया गया है।

पिता का दावा है कि घटना से जुड़े इन दस्तावेजों की प्रतियां न्यायालय में दिए गए प्रार्थना पत्र के साथ संलग्न की गई थीं। उनका कहना है कि चिकित्सकीय दस्तावेज घटना में लगी चोटों की जांच के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन दस्तावेजों और शिकायत में लगाए गए आरोपों का वास्तविक महत्व पुलिस की विवेचना के दौरान स्पष्ट होगा।

मीरापुर थाने और एसएसपी कार्यालय में शिकायत के बाद न्यायालय पहुंचे पिता

शिकायतकर्ता के अनुसार, घटना के दिन चार जून 2026 को उन्होंने मीरापुर थाने में शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी। आरोप है कि थाने में शिकायत देने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद आठ जून को उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुजफ्फरनगर के कार्यालय में रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से प्रार्थना पत्र भेजा।

पिता का आरोप है कि इसके बाद भी उनकी शिकायत पर सुनवाई नहीं हुई। लगातार प्रयासों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने न्यायालय की शरण ली। उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 175(3) के तहत प्रार्थना पत्र देकर मुकदमा दर्ज कराने और मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की।

छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

मामले में संभलहेड़ा, थाना मीरापुर निवासी साजिद, रईसा, वाजिद, दिलशाद और शमा के अलावा शेरनगर निवासी शाकिर पुत्र नामालूम को आरोपित बनाया गया है। शिकायत के आधार पर कुल छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

आरोपितों पर दहेज की मांग को लेकर विवाहिता को प्रताड़ित करने, घर से निकालने, समझौते के दौरान गला घोंटने की कोशिश करने और मारपीट करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, मुकदमा दर्ज होने का अर्थ आरोपों का साबित होना नहीं है। मामले में सभी आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी।

पुलिस जांच पर टिकी पीड़ित परिवार की निगाहें

न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद मुकदमा दर्ज होने से पीड़ित परिवार को मामले में कार्रवाई की उम्मीद जगी है। अब पुलिस के सामने शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करने, मेडिकल दस्तावेजों का परीक्षण करने और घटना से जुड़े तथ्यों की पड़ताल करने की जिम्मेदारी होगी।

मामले में विवाहिता और उसके पिता के साथ कथित मारपीट, दहेज में कार की मांग तथा समझौते के दौरान गला घोंटने की कोशिश जैसे आरोपों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है। पुलिस की विवेचना और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी। फिलहाल पीड़ित परिवार की निगाहें मामले में आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *