हमीरपुर का सैकड़ों साल पुराना मां अम्बे मंदिर, यमुना-बेतवा की भीषण बाढ़ में भी रहा सुरक्षित

हमीरपुर का सैकड़ों साल पुराना मां अम्बे मंदिर, यमुना-बेतवा की भीषण बाढ़ में भी रहा सुरक्षित

हमीरपुर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर सदर विधानसभा क्षेत्र में यमुना, बेतवा नदियों के संगम किनारे स्थित मां अम्बे के मंदिर में नवदुर्गा महोत्सव की धूम इन दिनों मची हुई है। इस मंदिर का इतिहास करीब सैकड़ों साल पुराना है जहां विराजमान मां अम्बे की प्रतिमा मराठाकालीन है। दोनों नदियों की बाढ़ से पूरा गांव ही उजड़ गया था लेकिन मंदिर टस से मस नहीं हुआ।

हमीरपुर मुख्यालय से करीब 14 किमी दूर बीहड़ में बसा बड़ागांव मां अम्बे के मराठाकालीन मंदिर होने के कारण पूरे क्षेत्र में विख्यात है। यह गांव यमुना और बेतवा नदी के संगम से कुछ किमी दूर बसा है। यमुना नदी के तल से करीब डेढ़ सौ मीटर की ऊंचाई में मां अम्बे का मंदिर स्थित है। कंकर और चूने से निर्मित मंदिर में स्थापित मां अम्बे और काली की मूर्ति बड़ी ही चमत्कारी है। मंदिर के अंदर दोनों देवियों की मूर्ति के ठीक सामने शिव लिंग स्थापित है। मंदिर के पुजारी सुखदेव ऋषि ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण मराठा शासन काल में हुआ था। मंदिर के आसपास किसी जमाने में घनी आबादी थी। कई बार यमुना और बेतवा नदियों में आई बाढ़ से गांव ही उजड़ गया था। अब मंदिर से दो किमी दूर बड़ागांव बस चुका है।

यमुना और बेतवा की बाढ़ में बह गया था गांवमंदिर के पुजारी सुखदेव ऋषि ने बताया कि वर्ष 1978 व 1983 में यमुना और बेतवा नदियों में आई भीषण बाढ़ में पूरा गांव ही जलमग्न हो गया था। अम्बे मां का मंदिर पूरी तरह से सुरक्षित रहा। महंत के अलावा सुरौली गांव के पूर्व सरपंच रामफूल निषाद ने बताया कि बाढ़ के समय मां अम्बे की मूर्ति का चमत्कार देख लोग दंग रह गए थे। प्रलयकारी बाढ़ में मंदिर के आसपास का इलाका पानी में डूब जाने से क्षेत्र में हाहाकार मचा रहा। हजारों लोग गांव छोड़कर ऊंचाई वाले स्थानों पर भागने को मजबूर हुए थे।

बाढ़ के कारण दो किमी दूर बसा था बड़ागांवयमुना और बेतवा नदियों की बाढ़ के कारण मंदिर से करीब दो किमी दूर नया बड़ागांव बसा था। मंदिर के पुजारी ने बताया कि इस मराठाकालीन मंदिर में नवरात्र में पूरे गांव की मदद से धार्मिक आयोजन होता है। नवरात्र के आठवें दिन गांव के लोगों की मदद से मंदिर में भंडारे का आयोजन होता है। इसमें हजारों लोग शामिल होते हैं। पुजारी ने बताया कि इस मंदिर में विराजमान मां अम्बे की मूर्ति बड़ी ही चमत्कारी है जो दिन में कई बार रंग बदलती है। यहां मां के दरबार में हाजिरी लगाने पर मन की मुरादें पूरी होती है।

मंदिर में माथा टेकने पर पूरी होती है मुरादें मंदिर के पुजारी ने बताया कि मां के इस मंदिर में कई लोगों को संतान का सुख मिला है। करीब 32 साल पहले पड़ोसी फतेहपुर जनपद के अमौैली से एक व्यापारी के बेटे का अपहरण हुआ था। तब व्यापारी ने किसी के कहने पर यहां मंदिर में आकर माता रानी के दरबार में पूजा अर्चना की थी। उसने रोते हुए मां अम्बे से मन्नत मांगी थी। मां के आशीर्वाद से अगले ही दिन उसका बेटा सकुशल घर लौट आया था। व्यापारी ने मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम कराया था।

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