मुजफ्फरनगर में नकली नोट छापने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 5.26 लाख की जाली करेंसी बरामद; ‘फर्जी’ वेब सीरीज देखकर आया था आइडिया!

मुजफ्फरनगर में नकली नोट छापने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 5.26 लाख की जाली करेंसी बरामद; ‘फर्जी’ वेब सीरीज देखकर आया था आइडिया!

मुजफ्फरनगर। नकली नोट छापकर बाजार में चलाने के कथित कारोबार का खुलासा करते हुए बुढ़ाना पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे और दिल्ली के नरेला स्थित एक फ्लैट की तलाशी के दौरान 500 रुपये के कुल 5 लाख 26 हजार 500 रुपये के नकली नोट बरामद किए गए। मौके से नोट तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले लैपटॉप, रंगीन प्रिंटर, कॉटन पेपर, बटर पेपर, रंगीन पन्नी के रोल, फर्मे और विभिन्न रसायन भी बरामद किए गए हैं। पुलिस का दावा है कि गिरोह का कथित सरगना शुभम दिल्ली स्थित अपने फ्लैट में नकली नोट तैयार करता था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार राय ने पुलिस लाइन में पत्रकारों को कार्रवाई की जानकारी दी। पुलिस अब गिरोह के अन्य संपर्कों और नकली करेंसी की आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क की जांच कर रही है।

हाईवे के पास नकली नोटों के साथ पकड़े गए तीन आरोपी

एसएसपी सूरज कुमार राय के अनुसार, 14 अक्टूबर 2026 को बुढ़ाना थाना पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि मेरठ-करनाल हाईवे पर वाजिद होटल के पास बुढ़ाना-कांधला मार्ग पर ट्यूबवेल के निकट तीन व्यक्ति नकली नोट लेकर खड़े हैं। सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और संदिग्धों की घेराबंदी कर तलाशी ली। इस दौरान उनके पास से 500 रुपये के नकली नोट बरामद हुए।

पुलिस ने मौके से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में शुभम ने कथित तौर पर दिल्ली के नरेला स्थित अपने फ्लैट में नकली नोट तैयार करने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस टीम ने दिल्ली स्थित फ्लैट की तलाशी ली, जहां से अतिरिक्त जाली करेंसी और नोट बनाने में इस्तेमाल होने वाला सामान बरामद किया गया।

पुलिस के अनुसार, बुढ़ाना में आरोपियों के कब्जे से चार लाख रुपये कीमत के नकली नोट मिले थे, जबकि दिल्ली के फ्लैट से एक लाख 26 हजार 500 रुपये की अतिरिक्त नकली करेंसी बरामद हुई। इस तरह कुल बरामदगी 5 लाख 26 हजार 500 रुपये बताई गई है।

लैपटॉप, प्रिंटर और नोट बनाने का सामान बरामद

पुलिस ने नकली नोटों के अलावा एक लैपटॉप, एक रंगीन प्रिंटर, कॉटन पेपर और बटर पेपर के बंडल, रंगीन पन्नी के रोल तथा पांच फर्मे बरामद किए हैं। इसके साथ ही प्रिंटर में इस्तेमाल होने वाले रंग की चार डिब्बियां, तीन फेवी स्टिक, दो पेपर कटर, एक बोतल स्टेनर, फेविकोल की दो डिब्बियां, स्क्रीन कोटिंग रसायन की दो डिब्बियां और अन्य रासायनिक सामग्री भी मिली है।

पुलिस इन उपकरणों और सामग्री की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित तौर पर नकली नोट तैयार करने का काम किस स्तर पर चल रहा था और इसमें अन्य कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

‘फर्जी’ वेब सीरीज देखकर आया नकली नोट छापने का विचार

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में मुख्य आरोपी शुभम ने कथित तौर पर बताया कि अमेजन प्राइम पर ‘फर्जी’ नाम की वेब सीरीज देखने के बाद उसके मन में नकली नोट छापकर पैसा कमाने का विचार आया। इसके बाद उसने अपने साथियों के साथ मिलकर योजना बनाई और दिल्ली के नरेला स्थित फ्लैट में नकली नोट तैयार करने का काम शुरू कर दिया।

पुलिस का दावा है कि आरोपी ने नोट तैयार करने की प्रक्रिया समझने के लिए यूट्यूब की भी मदद ली। कथित तौर पर लैपटॉप में फोटोशॉप की सहायता से नोट की तस्वीर को स्कैन कर उसका आकार तय किया जाता था और फिर रंगीन प्रिंटर से प्रिंट निकाला जाता था। पुलिस इन बयानों की बरामद उपकरणों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है।

महाराष्ट्र से कॉटन पेपर मंगाने का दावा

पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान कॉटन पेपर की आपूर्ति को लेकर भी जानकारी सामने आई है। शुभम ने कथित तौर पर बताया कि कॉटन पेपर की ए-4 शीट महाराष्ट्र में गणेश नाम के व्यक्ति से मंगाई जाती थीं, जबकि अन्य सामग्री ऑनलाइन खरीदी जाती थी।

पुलिस अब कथित आपूर्तिकर्ता की पहचान और भूमिका की पुष्टि करने के साथ ऑनलाइन खरीदी गई सामग्री से संबंधित विवरण जुटा रही है। जांच में यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि नकली नोट तैयार करने के बाद उन्हें किन स्थानों पर और किस माध्यम से खपाया जाता था।

पुलिस का दावा है कि आरोपी नकली नोट तैयार करने के बाद उन्हें आपस में बांट लेते थे और अलग-अलग शहरों में कम कीमत पर बेचने की कोशिश करते थे। घटना वाले दिन भी तीनों के बुढ़ाना और आसपास के क्षेत्रों में नकली नोट चलाने के उद्देश्य से आने की बात कही गई है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि आगे की जांच और साक्ष्यों के आधार पर होगी।

तीनों आरोपियों की पहचान, दूसरे राज्यों से भी जुड़ी शिकायतें

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शुभम पुत्र रण सिंह, निवासी ग्राम सांकरौद, थाना खेकड़ा, जनपद बागपत, हाल निवासी मंशा देवी अपार्टमेंट, नरेला, दिल्ली; महेन्द्र पुत्र आसाराम, निवासी ग्राम कनौठा, थाना सतपुली, जनपद पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड; और टीनू पुत्र सुमित, निवासी ग्राम दौलतपुर, थाना सरधना, जनपद मेरठ के रूप में हुई है।

पुलिस ने बताया कि पहले की बरामदगी रिपोर्ट में संजय आहूजा निवासी देहरादून और रावड़ी उर्फ अनुराग शर्मा निवासी बरेली के नाम भी कथित साथियों के रूप में सामने आए थे। पुलिस इनके संबंध में भी जांच कर रही है। इसके अलावा महेन्द्र के खिलाफ उत्तराखंड के सतपुली थाने में वर्ष 2025 का एक अन्य मामला दर्ज होने की जानकारी भी पुलिस अभिलेख में बताई गई है।

पुलिस का कहना है कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, नकली नोटों की आपूर्ति और कथित बिक्री के नेटवर्क की जांच जारी है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मुकदमा दर्ज, पुलिस टीम ने की कार्रवाई

पुलिस अभिलेख के अनुसार, थाना बुढ़ाना में मुकदमा संख्या 464/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 178, 179, 180, 3(5) और 61(2) में अभियोग दर्ज किया गया है।

इस कार्रवाई को प्रभारी निरीक्षक सुभाष अत्री के नेतृत्व में अंजाम दिया गया। पुलिस टीम में उपनिरीक्षक आशीष चौधरी, ललित कसाना, छविकांत, संदीप कुमार, सूर्यप्रताप सिंह और तेजवीर सिंह के साथ हेड कांस्टेबल पुष्पेन्द्र सिंह, अमित तेवतिया, अमरदीप, सुनील कुमार, निर्वेश कुमार, संजय कुमार और नकुल सांगवान शामिल रहे। सर्विलांस सेल, मुजफ्फरनगर के हेड कांस्टेबल विकास सिरोही ने भी कार्रवाई में सहयोग किया।

पुलिस के मुताबिक, तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। अब पुलिस का ध्यान नकली करेंसी तैयार करने के कथित नेटवर्क की अन्य कड़ियों तक पहुंचने और यह पता लगाने पर है कि इस कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

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