मुजफ्फरनगर। जिले में शराब की दुकानों पर निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने की आशंका को देखते हुए आबकारी विभाग ने निगरानी तेज कर दी है। मदिरा की बिक्री में पारदर्शिता बनाए रखने, स्टॉक संबंधी अनियमितताओं पर अंकुश लगाने और ग्राहकों से निर्धारित मूल्य से अधिक रकम वसूले जाने की शिकायतों की जांच के उद्देश्य से विभाग की टीमों ने विभिन्न शराब की दुकानों का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान बिक्री व्यवस्था से लेकर स्टॉक रजिस्टर, पीओएस मशीन, सीसीटीवी कैमरों और शराब की बोतलों पर लगे क्यूआर कोड तक की जांच की गई।

निरीक्षण अभियान के दौरान आबकारी निरीक्षकों ने दुकान संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मदिरा की शत प्रतिशत बिक्री पीओएस मशीन के माध्यम से की जाए। बिक्री का रिकॉर्ड नियमित रूप से दर्ज किया जाए और दुकानों पर उपलब्ध स्टॉक का विवरण पूरी तरह दुरुस्त रखा जाए। अधिकारियों ने निर्धारित मूल्य पर ही शराब की बिक्री सुनिश्चित करने और निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।

विभागीय स्तर पर चलाए गए इस अभियान का उद्देश्य शराब की दुकानों पर नियमों के अनुपालन की स्थिति का आकलन करना और बिक्री प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश को कम करना है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने दुकानों में उपलब्ध मदिरा और अभिलेखों का मिलान करने के साथ ही तकनीकी व्यवस्थाओं की भी पड़ताल की।
शासन के निर्देश पर सक्रिय हुआ आबकारी विभाग
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव और आबकारी आयुक्त कार्यालय के निर्देशों के क्रम में यह अभियान चलाया गया। जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में आबकारी विभाग की टीमों ने जिले की विभिन्न मदिरा दुकानों का निरीक्षण कर निर्धारित नियमों के पालन की स्थिति जांची।
अभियान के दौरान अधिकारियों ने दुकानों पर बिक्री से संबंधित अभिलेखों, स्टॉक के रखरखाव और निगरानी के लिए उपलब्ध उपकरणों का जायजा लिया। दुकान संचालकों को निर्देशित किया गया कि आबकारी विभाग की ओर से निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करने में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। बिक्री और स्टॉक से जुड़े सभी रिकॉर्ड नियमित रूप से अपडेट रखे जाएं, ताकि जरूरत पड़ने पर उनका सत्यापन किया जा सके।
पीओएस मशीन से बिक्री पर विशेष जोर
शराब की दुकानों पर बिक्री प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए आबकारी विभाग ने पीओएस मशीन के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी। निरीक्षण के दौरान टीमों ने दुकानदारों को निर्देश दिए कि मदिरा की शत प्रतिशत बिक्री पीओएस मशीन के माध्यम से ही सुनिश्चित की जाए।
इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रत्येक बिक्री का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखना और बिक्री संबंधी आंकड़ों में पारदर्शिता बनाए रखना है। पीओएस मशीन के माध्यम से दर्ज होने वाले विवरण से बिक्री की निगरानी और उपलब्ध स्टॉक का हिसाब रखने में मदद मिलती है।
अधिकारियों ने दुकान संचालकों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बिक्री करने और अभिलेखों को नियमित रूप से अद्यतन रखने के निर्देश दिए। विभागीय निगरानी के तहत यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि दुकानों पर बिक्री व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित हो।
स्टॉक रजिस्टर से मिलाया दुकानों में उपलब्ध शराब का विवरण
निरीक्षण अभियान के दौरान आबकारी विभाग की टीमों ने दुकानों में उपलब्ध मदिरा के स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी किया। इसके तहत दुकानों में रखी शराब की मात्रा और स्टॉक रजिस्टर में दर्ज विवरण का मिलान किया गया, ताकि वास्तविक उपलब्धता और अभिलेखों में दर्ज आंकड़ों के बीच किसी प्रकार की विसंगति का पता लगाया जा सके।
स्टॉक का सही हिसाब रखना शराब की दुकानों के संचालन में महत्वपूर्ण माना जाता है। इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर बिक्री और उपलब्ध मदिरा के रिकॉर्ड का सत्यापन प्रभावित हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने दुकानदारों को स्टॉक रजिस्टर सही रखने और प्रत्येक आवश्यक विवरण को समय पर दर्ज करने के निर्देश दिए।
टीमों ने निरीक्षण के दौरान उपलब्ध व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि दुकान में रखी मदिरा का विवरण अभिलेखों से मेल खाता हो।
गोपनीय खरीद से परखी निर्धारित मूल्य पर बिक्री की व्यवस्था
अभियान के दौरान शराब की दुकानों पर ग्राहकों से निर्धारित मूल्य से अधिक रकम वसूले जाने की आशंका की जांच के लिए गोपनीय खरीद की प्रक्रिया भी अपनाई गई। इसके माध्यम से यह परखने का प्रयास किया गया कि दुकानदार मदिरा की बिक्री निर्धारित मूल्य पर कर रहे हैं या ग्राहकों से अतिरिक्त रकम ली जा रही है।
शराब की दुकानों पर ओवररेटिंग यानी निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने की शिकायतें उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं। ऐसे में गोपनीय खरीद के जरिए बिक्री व्यवस्था की जांच करना विभागीय निगरानी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
इस कार्रवाई का उद्देश्य ग्राहकों को निर्धारित मूल्य पर मदिरा उपलब्ध कराने और मूल्य संबंधी अनियमितताओं पर रोक लगाने की व्यवस्था को मजबूत करना है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी विशेष दुकान पर ओवररेटिंग की पुष्टि या किसी दुकानदार के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई किए जाने का विवरण सामने नहीं आया है।
सीसीटीवी कैमरों की स्थिति जांची, चालू रखने के निर्देश
आबकारी विभाग की टीमों ने शराब की दुकानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की स्थिति का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने कैमरों की उपलब्धता और संचालन से जुड़ी व्यवस्था का जायजा लेते हुए दुकान संचालकों को निर्देश दिए कि निगरानी के लिए लगाए गए कैमरे निर्धारित व्यवस्था के अनुसार लगातार चालू रखे जाएं।
सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से दुकानों पर होने वाली गतिविधियों की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर संबंधित घटनाक्रम की जांच करने में सहायता मिलती है। इसी उद्देश्य से विभाग ने दुकानों पर सुरक्षा और निगरानी से जुड़ी व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने पर जोर दिया।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि दुकान संचालक बिक्री व्यवस्था के साथ सुरक्षा संबंधी निर्देशों का भी पालन करें, ताकि दुकानों का संचालन निर्धारित नियमों के अनुरूप किया जा सके।
शराब की बोतलों के क्यूआर कोड स्कैन कर किया सत्यापन
निरीक्षण के दौरान आबकारी निरीक्षकों ने दुकानों में रखी कुछ मदिरा की बोतलों पर अंकित क्यूआर कोड को भी स्कैन किया। विभागीय एप्लीकेशन के माध्यम से इन कोड का सत्यापन कर बोतलों से संबंधित उपलब्ध विवरण की जांच की गई।
क्यूआर कोड की जांच विभागीय निगरानी प्रक्रिया का हिस्सा है। इसके माध्यम से संबंधित जानकारी का सत्यापन करने और मदिरा की बोतलों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच में सहायता मिलती है। अधिकारियों ने इस प्रक्रिया के जरिए दुकानों पर उपलब्ध मदिरा की जांच व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने पर जोर दिया।
टीमों ने निरीक्षण के दौरान तकनीकी साधनों के इस्तेमाल के साथ बिक्री और स्टॉक से संबंधित व्यवस्थाओं को भी जांच के दायरे में रखा, जिससे दुकानों के संचालन की स्थिति का समग्र आकलन किया जा सके।
पारदर्शी बिक्री व्यवस्था बनाने पर विभाग का जोर
मुजफ्फरनगर में चलाए गए इस निरीक्षण अभियान में आबकारी विभाग ने शराब की दुकानों के संचालन से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच की। इसमें पीओएस मशीन से बिक्री, स्टॉक रजिस्टर का रखरखाव, निर्धारित मूल्य पर मदिरा की बिक्री, सीसीटीवी कैमरों का संचालन और बोतलों पर लगे क्यूआर कोड का सत्यापन शामिल रहा।
विभाग ने दुकान संचालकों को निर्देश दिए कि निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए और बिक्री से जुड़े सभी रिकॉर्ड व्यवस्थित रखे जाएं। इसके साथ ही निगरानी संबंधी व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने और ग्राहकों से निर्धारित मूल्य ही वसूलने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
आबकारी विभाग के इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शराब की दुकानों पर बिक्री व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना, स्टॉक संबंधी अनियमितताओं की आशंका को कम करना और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है। निरीक्षण के माध्यम से विभाग ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि दुकानों के संचालन में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक है।

