मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों की हड़ताल के बीच मुजफ्फरनगर स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि हड़ताल के कारण लगातार अनुपस्थित चल रहे संविदा कर्मचारी यदि अगले 12 कार्यदिवस के भीतर अपने कार्यस्थल पर लौटकर काम शुरू नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति जिला स्वास्थ्य समिति को भेजी जाएगी। इस आदेश के बाद कर्मचारियों की अनुपस्थिति और स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन को लेकर विभागीय निगरानी और सख्त होने की संभावना है।

13 अक्टूबर को जारी हुआ आधिकारिक पत्र

मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय की ओर से 13 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में जिले की विभिन्न चिकित्सा इकाइयों के अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है। पत्र जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक एवं अधीक्षिका, सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सा अधीक्षकों तथा प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों को भेजा गया है। इसके अलावा जिला क्षय रोग अधिकारी, जिला कुष्ठ अधिकारी और जिला मलेरिया अधिकारी को भी आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
पत्र में मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश की ओर से 8 अक्टूबर 2026 को जारी दिशा-निर्देशों का हवाला दिया गया है। इनमें आम जनता को आवश्यक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने को शासन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताया गया है। विभाग ने स्वास्थ्य सेवाओं को आवश्यक एवं अनिवार्य सेवाओं की श्रेणी में रखते हुए कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति और समयबद्ध कार्य निष्पादन पर जोर दिया है।
बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर रोक
सीएमओ डॉ. सुनील तेवतिया ने निर्देश दिए हैं कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संविदा और आउटसोर्स पर कार्यरत कोई भी कर्मचारी सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना अपना मुख्यालय नहीं छोड़ेगा। हालांकि, गंभीर बीमारी की स्थिति को इस निर्देश में अपवाद के तौर पर शामिल किया गया है।
संबंधित अधिकारियों को अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को आदेशों की जानकारी देने और उनका शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है। विभाग का कहना है कि कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण आम जनता को मिलने वाली जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित नहीं होनी चाहिए। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति आवश्यक बताई गई है।
12 कार्यदिवस में लौटना होगा काम पर
जारी पत्र में 9 अक्टूबर 2026 को मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश की अध्यक्षता में हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का भी उल्लेख किया गया है। बैठक में लगातार अनुपस्थित चल रहे संविदा कर्मचारियों की स्थिति पर निर्देश दिए गए थे।
इन निर्देशों के मुताबिक, यदि संबंधित कर्मचारी अगले 12 कार्यदिवस के भीतर अपने कार्यस्थल पर वापस आकर काम शुरू नहीं करते हैं, तो उनके मामलों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मानव संसाधन नियमावली और लागू दिशा-निर्देशों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति जिला स्वास्थ्य समिति को भेजी जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयसीमा में ड्यूटी पर वापस नहीं लौटने की स्थिति में संबंधित कर्मचारी को अपनी अनुपस्थिति के लिए जवाबदेह माना जाएगा।
अनुपस्थित कर्मचारियों की रोजाना देनी होगी रिपोर्ट
स्वास्थ्य विभाग ने कर्मचारियों की उपस्थिति पर निगरानी रखने के लिए रिपोर्टिंग व्यवस्था भी सख्त कर दी है। सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे ड्यूटी से लगातार अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों की प्रतिदिन की सूचना जिला कार्यक्रम प्रबंधक और जिला लेखा प्रबंधक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को उपलब्ध कराएं।
इसके साथ ही आदेशों के अनुपालन की जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय को भी भेजनी होगी। निर्धारित समयसीमा के भीतर काम पर नहीं लौटने वाले कर्मचारियों के मामलों को नियमानुसार कार्रवाई की संस्तुति के लिए जिला स्वास्थ्य समिति के समक्ष रखा जाएगा।
जिलाधिकारी समेत वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई प्रति
इस आदेश की प्रतिलिपि जिलाधिकारी एवं जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष, मुख्य विकास अधिकारी, अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सहारनपुर मंडल और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मानव संसाधन महाप्रबंधक सहित संबंधित अधिकारियों को भी आवश्यक जानकारी और कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
एनएचएम संविदा कर्मचारियों की हड़ताल के बीच जारी इस निर्देश को स्वास्थ्य विभाग की ओर से कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। एक ओर विभाग ने आम जनता को निर्बाध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने को प्राथमिकता बताया है, वहीं दूसरी ओर लगातार अनुपस्थित कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया भी स्पष्ट कर दी है।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि निर्धारित 12 कार्यदिवस के भीतर कितने कर्मचारी अपने कार्यस्थलों पर वापस लौटते हैं और ड्यूटी पर नहीं आने वाले कर्मचारियों के मामलों में जिला स्वास्थ्य समिति क्या निर्णय लेती है।

