मुजफ्फरनगर में निर्माण कार्य पर सवाल, घरों के ड्रेनेज पाइप से ऊंची बनाई नाली; जलभराव की आशंका

मुजफ्फरनगर में निर्माण कार्य पर सवाल, घरों के ड्रेनेज पाइप से ऊंची बनाई नाली; जलभराव की आशंका

मुजफ्फरनगर। शहर के नई मंडी थाना क्षेत्र में जानसठ बस स्टैंड के सामने स्थित कंबल वाला बाग की गली नंबर 383 में सड़क और नाली निर्माण कार्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय निवासी ओंकार सिंह ने निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं और घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए संबंधित अधिकारियों से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि नाली का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है और इसका लेवल घरों के टॉयलेट के ड्रेनेज पाइप से करीब तीन इंच ऊंचा कर दिया गया है। इससे भविष्य में जल निकासी की गंभीर समस्या पैदा होने की आशंका है।

ओंकार सिंह के मुताबिक, यदि नाली का स्तर घरों के ड्रेनेज पाइप से ऊंचा रहता है तो घरों से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में पानी वापस घरों में घुसने का खतरा बना रहेगा। उन्होंने निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने और नाली का लेवल व ढलान सही कराए जाने की मांग उठाई है।

पुराने निर्माण के मुकाबले नाली का लेवल ऊंचा करने का आरोप

स्थानीय निवासी ओंकार सिंह ने बताया कि गली में वर्ष 2016 में सड़क पर टाइलें लगाई गई थीं। करीब दस साल बाद अब सड़क और नाली का दोबारा निर्माण कराया जा रहा है। उनका आरोप है कि नए निर्माण के दौरान नाली का लेवल पहले की अपेक्षा काफी ऊंचा कर दिया गया है, जिससे घरों की जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।

उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ठेकेदार की ओर से आश्वासन दिया गया था कि नाली का स्तर घरों के टॉयलेट के ड्रेनेज पाइप से करीब छह इंच नीचे रखा जाएगा। इससे घरों से निकलने वाला पानी आसानी से नाली में पहुंच सकेगा और निकासी व्यवस्था सुचारु बनी रहेगी।

हालांकि, ओंकार सिंह का दावा है कि निर्माण के दौरान इस बात का ध्यान नहीं रखा गया और अब नाली का लेवल ड्रेनेज पाइप से करीब तीन इंच ऊंचा कर दिया गया है। उन्होंने इस स्थिति पर आपत्ति जताते हुए कहा कि निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों और जल निकासी की जरूरतों का ध्यान रखा जाना चाहिए, ताकि बाद में स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

घरों में गंदा पानी घुसने की जताई आशंका

ओंकार सिंह ने आशंका जताई कि नाली का लेवल ऊंचा होने से घरों के टॉयलेट और ड्रेनेज पाइप से निकलने वाले पानी की निकासी बाधित हो सकती है। यदि पानी को बाहर निकलने के लिए पर्याप्त ढलान नहीं मिलती है तो गंदा पानी वापस घरों की ओर लौट सकता है। इससे लोगों को स्वच्छता संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि नाली का निर्माण केवल सड़क के किनारे दीवार खड़ी करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसके लेवल, गहराई और ढलान का निर्धारण आसपास के घरों की निकासी व्यवस्था को ध्यान में रखकर किया जाना जरूरी है। यदि निर्माण के दौरान इन पहलुओं की अनदेखी होती है तो भविष्य में नाली बनने के बावजूद जल निकासी की समस्या बनी रह सकती है।

स्थानीय निवासी ने संबंधित अधिकारियों से मौके पर पहुंचकर नाली के स्तर की जांच कराने और आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने की मांग की है।

सीमेंट और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल

नाली के लेवल को लेकर आपत्ति जताने के साथ ही ओंकार सिंह ने सड़क और नाली निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सड़क पर डाला गया सीमेंट कमजोर दिखाई दे रहा है और कुछ स्थानों पर निर्माण सामग्री उखड़ने लगी है।

उन्होंने मांग की कि निर्माण कार्य में इस्तेमाल किए जा रहे सीमेंट की मात्रा, सड़क की मोटाई और अन्य निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि सड़क और नाली का निर्माण इस तरह होना चाहिए कि वह लंबे समय तक टिकाऊ रहे और स्थानीय लोगों को बार-बार मरम्मत की समस्या का सामना न करना पड़े।

ओंकार सिंह के अनुसार, निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता होने पर सरकारी धन का उचित उपयोग सुनिश्चित नहीं हो पाएगा और कुछ समय बाद सड़क व नाली की मरम्मत की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र तकनीकी जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

सामने मौजूद नाले की गहराई का दिया हवाला

स्थानीय निवासी ने बताया कि गली के सामने स्थित नाला करीब पांच फीट गहरा है। ऐसे में सड़क किनारे बनाई जा रही नाली की गहराई और ढलान का निर्धारण उचित तकनीकी आकलन के आधार पर किया जाना चाहिए, ताकि पानी की निकासी बिना रुकावट के हो सके।

उन्होंने कहा कि यदि नाली का लेवल सही नहीं रखा गया तो घरों के ड्रेनेज पाइप और मुख्य नाले के बीच पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है। इसलिए निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही इस समस्या की जांच कर उसका समाधान करना जरूरी है।

उनकी मांग है कि संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर पूरे निर्माण कार्य का निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि नाली का स्तर, ढलान तथा सड़क की मोटाई निर्धारित मानकों के अनुरूप हो।

निर्माण रोकना नहीं, मानकों के अनुसार काम पूरा कराना चाहते हैं निवासी

ओंकार सिंह ने स्पष्ट किया कि वह सड़क और नाली का निर्माण कार्य रुकवाने के पक्ष में नहीं हैं। उनकी मांग केवल इतनी है कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप और सही तरीके से पूरा कराया जाए, जिससे स्थानीय लोगों को भविष्य में जल निकासी या निर्माण की गुणवत्ता से जुड़ी समस्याओं का सामना न करना पड़े।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों से नाली के लेवल की तकनीकी जांच कराने, सड़क और नाली में इस्तेमाल की जा रही निर्माण सामग्री की गुणवत्ता परखने तथा जरूरत पड़ने पर आवश्यक सुधार कराने की मांग की है।

फिलहाल, निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय निवासी की ओर से उठाए गए सवालों और आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की जांच तथा प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है और निर्माण कार्य में बताई जा रही संभावित खामियों को दूर कराने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।

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