केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहां की जैन धर्म पर आधारित प्राचीन पांडुलिपियों में भारतवर्ष का इतिहास समाहित है। प्राचीन पांडुलिपियों का संरक्षण, संवर्धन करना अपने आप में अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है। श्रुत संवर्धन समिति के द्वारा किया जा रहा पांडुलिपियों का सूचीकरण भविष्य में देश के इतिहास एवं प्राचीन तथ्यों पर शोध करने वाले शोधार्थियों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
राजनाथ सिंह से भेंटवार्ता कर प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ अमित राय जैन ने उन्हें शहजाद राय शोध संस्थान में संग्रहित प्राचीन पांडुलिपियों के आधार पर किए जा रहे हैं शोध कार्यों की जानकारी दिए जाने पर उन्होंने यह बात कही! रक्षा मंत्री ने कहा कि अगर देश का इतिहास और संस्कृति को जीवित रखना है तो प्राचीन साहित्य की रक्षा की जानी परम आवश्यक है।

डॉ अमित राय जैन ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का सम्मान अंग वस्त्र ओढ़ाकर एवं अपने द्वारा लिखित पुस्तक भेंट स्वरूप प्रदान करके किया! साथ ही उन्होंने यह भी निवेदन किया कि प्रसिद्ध प्रकाशन किताब वाले द्वारा प्रकाशित एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र संचालक डॉक्टर बजरंग लाल गुप्ता व उनके द्वारा संपादित “दीनदयाल उपाध्याय- जीवन दर्शन एवं समसामयिकता” (पांच भागों में) पुस्तक का विमोचन उनके द्वारा किया जाए ! उनके निवेदन को स्वीकार करते हुए रक्षा मंत्री ने सितंबर माह के अंतिम रविवार उनकी पुस्तक का विमोचन दिल्ली में किए जाने की स्वीकृति प्रदान की! पांच भागों में लिखित पुस्तक के विषय में जानकारी देते हुए डॉ अमित राय जैन ने बताया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के संपूर्ण जीवन तथा उनके विचारों पर पुस्तकों के पांचों भाग आधारित है! पंडित दीनदयाल उपाध्याय के भाषणों एवं लेखन में व्यक्त आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, कश्मीर समस्या तथा एकात्म मानववाद दर्शन के सभी सिद्धांतों को प्रस्तुत पुस्तकों के सेट में समाहित किया गया है।
