मुजफ्फरनगर। दिल्ली-पौड़ी राजमार्ग के चौड़ीकरण की कार्रवाई को लेकर कैलापुर जसमौर गांव में माहौल गरमा गया। हाईवे की जद में आए मकानों और दुकानों को हटाने के लिए एनएचएआई और प्रशासन की टीम भारी पुलिस बल के साथ गांव पहुंची। टीम ने जैसे ही निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू की, बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए और कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच मुआवजे को लेकर तीखी बहस हुई। ग्रामीणों का कहना था कि उनकी संपत्तियों का पूरा मुआवजा अभी तक नहीं मिला है, ऐसे में निर्माण हटाने की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, एनएचएआई के एसडीओ आशीष शर्मा और नायब तहसीलदार बृजेश कुमार पुलिस बल के साथ कैलापुर जसमौर पहुंचे थे। टीम का उद्देश्य दिल्ली-पौड़ी राजमार्ग के चौड़ीकरण की जद में आने वाले निर्माणों को हटाना था। प्रशासनिक टीम ने कार्रवाई शुरू की तो ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर विरोध जताया। ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने अपनी आपत्तियां रखते हुए कहा कि मुआवजे से संबंधित उनकी कई मांगों का अभी तक समाधान नहीं हुआ है।

ग्रामीणों का कहना था कि उनके मकान और दुकानें हाईवे चौड़ीकरण की जद में आ रही हैं, लेकिन संपत्तियों के एवज में उन्हें पूरा मुआवजा नहीं मिला है। उनका आरोप था कि जब तक मुआवजे से जुड़ा विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं होता, तब तक निर्माणों को हटाने की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच काफी देर तक तीखी बहस होती रही।
ग्रामीणों ने मौके पर अधिकारियों को अपनी समस्याओं से अवगत कराया और निर्माण हटाने की कार्रवाई रोकने की मांग की। उनका कहना था कि हाईवे चौड़ीकरण से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में नियमानुसार मुआवजा मिलने के बाद ही किसी तरह की कार्रवाई की जानी चाहिए।
पुल निर्माण की मांग को लेकर पहले से धरना
कैलापुर जसमौर क्षेत्र के ग्रामीण पिछले कई महीनों से पुल निर्माण की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे थे। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पुल का निर्माण होने से आवागमन सुगम होगा और स्थानीय लोगों को काफी राहत मिलेगी। इसी दौरान हाईवे चौड़ीकरण की जद में आ रहे मकानों और दुकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू होने से ग्रामीणों की नाराजगी और बढ़ गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी संपत्तियां सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रही हैं, लेकिन उन्हें अभी तक उनकी मांग के अनुरूप पूरा मुआवजा नहीं मिला है। वहीं दूसरी ओर प्रशासन और एनएचएआई की ओर से यह पक्ष सामने रखा गया कि हाईवे चौड़ीकरण से प्रभावित होने वाले पात्र लोगों को नियमानुसार मुआवजा दिया जा चुका है और इसी आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
पुलिस बल की मौजूदगी में चला बुलडोजर
ग्रामीणों के विरोध और अधिकारियों के साथ हुई तीखी बहस के बावजूद प्रशासन ने कार्रवाई नहीं रोकी। विरोध को देखते हुए मौके पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात रखा गया। इसके बाद प्रशासन और एनएचएआई की टीम ने पुलिस की मौजूदगी में हाईवे की जद में आने वाले निर्माणों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी।
बुलडोजर की मदद से मकानों और अन्य निर्माणों को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे। इस दौरान गांव में काफी देर तक गहमागहमी का माहौल बना रहा। ग्रामीण लगातार मुआवजे और पुल निर्माण से संबंधित अपनी मांगों को अधिकारियों के सामने रखते रहे, जबकि प्रशासन की टीम हाईवे चौड़ीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाती रही।
निर्माण हटाए जाने की कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों में नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों का कहना था कि उनकी समस्याओं और मुआवजे से जुड़े मामलों का पूरी तरह समाधान किए बिना कार्रवाई की गई है। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना था कि हाईवे चौड़ीकरण की निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा रही है।
फिलहाल कैलापुर जसमौर में हाईवे चौड़ीकरण को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी और मुआवजे का मुद्दा प्रमुख बना हुआ है। ग्रामीण पुल निर्माण के साथ ही संपत्तियों के उचित मुआवजे की मांग पर कायम हैं। दूसरी ओर प्रशासन और एनएचएआई की कार्रवाई के बाद अब ग्रामीण आगे की रणनीति बनाने में जुटे हैं।

