मुजफ्फरनगर। बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में जनपद मुजफ्फरनगर के 20 गांवों ने मिसाल कायम की है। इन गांवों में पिछले पांच वर्षों के दौरान बाल विवाह की एक भी घटना सामने नहीं आई। लगातार पांच साल तक बाल विवाह से मुक्त रहने वाले इन गांवों को अब बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत के रूप में सम्मानित किया जा रहा है। गांधी जयंती के अवसर पर विकास खंड मुजफ्फरनगर में आयोजित ग्राम प्रधान सम्मान समारोह में इन ग्राम पंचायतों की उपलब्धि को रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम में जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि पांच वर्षों के कार्यकाल में जिन 20 गांवों में एक भी बाल विवाह नहीं हुआ, उन्हें बाल विवाह मुक्त गांव के रूप में घोषित किया गया है। इस उपलब्धि के लिए संबंधित ग्राम प्रधानों को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बाल विवाह की रोकथाम में ग्राम पंचायतों और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता को और मजबूत करना तथा ग्राम पंचायतों को बाल विवाह रोकने के लिए सक्रिय रूप से आगे आने के लिए प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों को यह संदेश भी दिया गया कि बच्चों का विवाह कम उम्र में कराने के बजाय उन्हें शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का अवसर देना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम में जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन एवं ग्रामीण समाज विकास केंद्र, जनपद मुजफ्फरनगर की ओर से सहयोग किया गया। कार्यक्रम का आयोजन खंड विकास अधिकारी मुजफ्फरनगर, जिला प्रोबेशन अधिकारी मुजफ्फरनगर और मुख्य विकास अधिकारी मुजफ्फरनगर के निर्देशानुसार किया गया।
जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार ने कहा कि बाल विवाह की रोकथाम किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए ग्राम पंचायत, जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के प्रत्येक वर्ग को मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि गांवों में लगातार जागरूकता, निगरानी और सामुदायिक सहभागिता के जरिए बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
समारोह के दौरान बच्चों के अधिकारों, उनकी सुरक्षा और शिक्षा के महत्व को लेकर भी ग्रामीणों को जागरूक किया गया। ग्रामीणों से अपील की गई कि यदि कहीं बाल विवाह की जानकारी मिलती है तो उसे नजरअंदाज न करें और तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचना दें, ताकि समय रहते बाल विवाह को रोका जा सके।
कार्यक्रम में बाल विवाह की सूचना के लिए 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन के बारे में भी जानकारी दी गई। इसके अलावा पोस्टर पर दिए गए टोल फ्री नंबर 1800-102-7222 के माध्यम से भी सूचना देने की अपील की गई।
ग्रामीण समाज विकास केंद्र के सचिव मेहरचंद ने बताया कि पांच वर्षों तक बाल विवाह से पूरी तरह मुक्त रहना इन 20 गांवों के लिए केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज में बढ़ती जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी की मिसाल है। इन ग्राम पंचायतों की पहल दूसरे गांवों के लिए भी बाल विवाह के खिलाफ अभियान को मजबूत करने की प्रेरणा बन सकती है। इस दौरान जिला कोर्डिनेटर सचिन समेत अन्य सहयोगी व ग्रामीण समाज विकास केंद्र का स्टाफ मौजूद रहा।

