3 साल की मासूम की संपत्ति पर ‘फर्जी वसीयत’ का खेल! दादी ने अपने नाम कराई जमीन-मकान, फिर बुआ को किया दान; कोर्ट ने दिए FIR के आदेश

3 साल की मासूम की संपत्ति पर ‘फर्जी वसीयत’ का खेल! दादी ने अपने नाम कराई जमीन-मकान, फिर बुआ को किया दान; कोर्ट ने दिए FIR के आदेश

मुजफ्फरनगर। तीन साल की नाबालिग बच्ची के हिस्से की संपत्ति को कथित तौर पर हड़पने और इसके लिए फर्जी वसीयत तैयार कराने के आरोपों से जुड़े मामले में अदालत ने थाना खालापार पुलिस को मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना के आदेश दिए हैं। बच्ची की मां सोनिका की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एवं अपर सिविल जज सिविल डिवीजन द्वितीय जसीम खान की अदालत ने मामले को प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध माना है। अदालत ने पुलिस को संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू करने तथा प्राथमिकी की प्रति तीन दिन के भीतर न्यायालय में भेजने के निर्देश दिए हैं।

मामला सोनिका बनाम सरोज देवी आदि से संबंधित है। अदालत में धारा 173(4) बीएनएसएस के तहत दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई हुई। इस दौरान थाना खालापार से प्राप्त आख्या के साथ शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों और अन्य अभिलेखों का भी अवलोकन किया गया। पुलिस की आख्या में इस मामले में पहले से किसी अन्य अभियोग के पंजीकृत नहीं होने की जानकारी दी गई थी।

पति की मौत के समय सात माह की गर्भवती थीं सोनिका

शिकायत के अनुसार सोनिका का विवाह बागपत जिले के बड़ौत थाना क्षेत्र के ग्राम वाजिदपुर निवासी विख्यात विवेक पुत्र स्वर्गीय कृष्णपाल सिंह के साथ हुआ था। सोनिका के मुताबिक 27 जून 2023 को उनके पति विख्यात विवेक की मृत्यु हो गई थी। उस समय सोनिका सात माह की गर्भवती थीं। पति की मृत्यु के करीब डेढ़ माह बाद 14 अगस्त 2023 को उन्होंने एक पुत्री को जन्म दिया, जिसका नाम तेजस्वी बताया गया है।

शिकायतकर्ता ने तेजस्वी को स्वर्गीय विख्यात विवेक की एकमात्र वैध वारिस बताया है। आरोप है कि पिता की मृत्यु के बाद नाबालिग बच्ची के हिस्से में आने वाली संपत्ति को कथित तौर पर अपने कब्जे में लेने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर की गई और एक कथित वसीयत का सहारा लिया गया।

कृषि भूमि और मकान को लेकर विवाद

शिकायत में कहा गया है कि स्वर्गीय विख्यात विवेक के नाम ग्राम वाजिदपुर और ग्राम बड़ावद, तहसील बड़ौत, जिला बागपत में कृषि भूमि थी। इसके अलावा मुजफ्फरनगर के मौहल्ला मीनाक्षीपुरम अलमासपुर में करीब 300.69 वर्गगज का मकान भी था। शिकायत के अनुसार इस मकान में विख्यात विवेक और उनकी माता सरोज देवी का आधा आधा हिस्सा था।

पति की मृत्यु के बाद सोनिका अपनी बेटी तेजस्वी और सास सरोज देवी के साथ मुजफ्फरनगर स्थित मकान नंबर 68, फेज छह, वसुंधरा कॉलोनी में रहने लगी थीं। बाद में पारिवारिक परिस्थितियों के चलते दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ने का आरोप लगाया गया है।

दूसरी शादी के बाद बच्ची को अपने पास रखने का आरोप

अदालत में दिए गए प्रार्थना पत्र में सोनिका ने बताया कि उन्होंने 18 जून 2024 को शिवांग कुमार पुत्र स्वर्गीय जयकुमार सिंह से दूसरी शादी की थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस विवाह की जानकारी उनकी सास सरोज देवी, ननद, ननदोई और अन्य रिश्तेदारों को थी।

आरोप है कि दूसरी शादी के बाद सरोज देवी ने नाबालिग तेजस्वी को उसकी मां की इच्छा के विरुद्ध अपने पास रख लिया। बच्ची को वापस पाने के लिए सोनिका ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका संख्या एचएबीसी 434/2024 दाखिल की।

दो मार्च 2023 की कथित वसीयत पर उठे सवाल

सोनिका ने शिकायत में आरोप लगाया है कि उनकी नाबालिग बेटी की पैतृक संपत्ति को अपने नाम कराने के उद्देश्य से स्वर्गीय विख्यात विवेक के नाम से दो मार्च 2023 की तारीख वाली एक कथित वसीयत तैयार की गई। उनका कहना है कि उनके पति ने जीवनकाल में अपनी माता सरोज देवी के पक्ष में ऐसी कोई वसीयत नहीं की थी।

शिकायत के अनुसार इस कथित वसीयत को उपनिबंधक कार्यालय, तहसील बड़ौत, जिला बागपत में पंजीकृत होना दर्शाया गया है। दस्तावेज का उल्लेख बही संख्या तीन, जिल्द संख्या 102, पृष्ठ संख्या 371 से 378 और क्रमांक संख्या 23 के रूप में किया गया है।

सोनिका ने यह भी आरोप लगाया कि कथित वसीयत तैयार कराने के दौरान प्रमोद कुमार और राहुल कुमार पुत्र सुरेशपाल सिंह को गवाह बनाया गया और उनके हस्ताक्षर कराए गए। इन आरोपों की वास्तविकता पुलिस की विवेचना में सामने आने की बात अदालत के आदेश के बाद तय होगी।

वसीयत के आधार पर मकान अपने नाम कराने का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इसी कथित वसीयत के आधार पर सरोज देवी ने मीनाक्षीपुरम अलमासपुर स्थित 300.69 वर्गगज के मकान में अपने मृत बेटे विख्यात विवेक के हिस्से को अपने नाम दर्ज करा लिया। इसके बाद आरोप है कि उन्होंने इस संपत्ति को अपनी बेटी अलका तोमर पत्नी संजीव तोमर के नाम दान कर दिया।

शिकायत के मुताबिक यह दान बैनामा 30 मई 2025 को पंजीकृत कराया गया। इसका उल्लेख बही संख्या एक, जिल्द संख्या 15044, पृष्ठ संख्या 29 से 44 और क्रमांक संख्या 8013 के रूप में किया गया है। सोनिका का कहना है कि ऑनलाइन अभिलेखों की जांच के दौरान उन्हें कथित वसीयत और संपत्ति के हस्तांतरण से संबंधित जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने कानूनी कार्रवाई की।

अदालत में कई दस्तावेज किए गए पेश

शिकायतकर्ता की ओर से अदालत में आरोपों के समर्थन में कई दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। इनमें शपथ पत्र, आधार कार्ड, उपनिबंधक बड़ौत कार्यालय से प्राप्त रिपोर्ट, आरटीआई से संबंधित रिपोर्ट, विलेखों की प्रमाणित प्रतिलिपियों की भुगतान पावती और अन्य अभिलेख शामिल हैं।

इसके अलावा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुजफ्फरनगर को दिए गए प्रार्थना पत्र की छायाप्रति भी अदालत के समक्ष रखी गई। अदालत ने शिकायत और प्रस्तुत दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद आदेश में कहा कि विपक्षीगण द्वारा धोखाधड़ी से प्रार्थिया के पति का मकान हड़पने के लिए झूठी वसीयत की कूटरचना किए जाने का कथन किया गया है।

अदालत ने प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध माना

अदालत ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध होना माना और मामले में पुलिस जांच को आवश्यक बताया। अदालत ने धारा 173(4) बीएनएसएस के तहत दाखिल प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए थाना खालापार के थानाध्यक्ष को संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए।

अदालत ने मुकदमा दर्ज करने के बाद तत्काल विवेचना शुरू करने और अभियोग पंजीकृत होने के तीन दिन के भीतर प्रथम सूचना रिपोर्ट की प्रति न्यायालय में भेजने का भी आदेश दिया है। यह आदेश 24 सितंबर 2026 को पारित किया गया।

अब पुलिस की विवेचना में कथित वसीयत की वास्तविकता, उसके तैयार और पंजीकृत होने की परिस्थितियों, दस्तावेज में दर्ज गवाहों की भूमिका तथा संपत्ति के हस्तांतरण से जुड़े तथ्यों की जांच की जाएगी। जांच के बाद ही आरोपों और दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *