मुजफ्फरनगर। शहर की पेयजल व्यवस्था को संचालित करने वाले नगर पालिका परिषद के जलकल विभाग की ऑटोमेशन व्यवस्था में तकनीकी खराबी आने से कई इलाकों में करीब 24 घंटे तक पेयजल संकट बना रहा। बुधवार को स्काडा सिस्टम के सर्वर में आई खराबी के कारण कई ट्यूबवेलों को ऑटो कमांड मिलना बंद हो गया। इससे शहर के कई मोहल्लों में पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई। गुरुवार तक समस्या पूरी तरह सामान्य नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। घरों की टंकियां खाली रहने के कारण लोगों को पानी के लिए इधर उधर भटकना पड़ा।

पेयजल संकट को लेकर नगर पालिका के सभासदों में भी नाराजगी फैल गई। कई सभासद टाउनहाल पहुंचे और ईओ पवन कुमार के नाम पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा जिम्मेदारी तय करने की मांग की। सभासदों ने जांच में दोषी पाए जाने वाले ठेकेदार की जमानत राशि जब्त करने और उसके भुगतान रोकने की मांग भी उठाई है।

81 ट्यूबवेल से होती है शहर में पेयजलापूर्ति
नगर पालिका परिषद के जलकल विभाग के अनुसार, शहरी क्षेत्र में कुल 81 ट्यूबवेलों के माध्यम से पेयजलापूर्ति की जाती है। इनमें से 70 ट्यूबवेल स्काडा तकनीक आधारित ऑटोमेशन पैनल से जुड़े हैं। इसी सिस्टम के माध्यम से ट्यूबवेलों को स्वचालित कमांड देकर उनका संचालन किया जाता है।
बुधवार को स्काडा सिस्टम के सर्वर में तकनीकी खराबी आने के बाद कई ट्यूबवेलों को ऑटो कमांड मिलना बंद हो गया। इसके चलते संबंधित क्षेत्रों में पेयजलापूर्ति प्रभावित हुई। कई मोहल्लों में लोगों को लंबे समय तक पानी नहीं मिल सका।
सभासदों ने टाउनहाल पहुंचकर जताई नाराजगी
पेयजल संकट की जानकारी मिलने के बाद सभासद राजीव शर्मा, मनोज वर्मा, रजत धीमान, रविकांत शर्मा उर्फ काका और शौकत अंसारी समेत अन्य सभासद टाउनहाल पहुंचे। सभासदों ने ईओ पवन कुमार के नाम पत्र सौंपकर मामले की जांच कराने की मांग की।
सभासदों ने आरोप लगाया कि ऑटोमेशन व्यवस्था को लेकर पुराने और नए ठेकेदारों के बीच खींचतान चल रही है और इसका खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ा। उनका कहना था कि ठेकेदारों के बीच किसी भी प्रकार का विवाद हो, लेकिन इसके कारण शहर की पेयजलापूर्ति प्रभावित होना गंभीर मामला है।
सभासदों ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था विफल होने से पालिका की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठते हैं। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
दोषी ठेकेदार की जमानत राशि जब्त करने की मांग
सभासदों ने मांग की कि जांच में यदि किसी ठेकेदार की लापरवाही सामने आती है तो उसकी जमानत राशि जब्त की जाए। इसके साथ ही ठेकेदार के सभी प्रकार के भुगतानों पर रोक लगाई जाए।
सभासदों ने चेतावनी दी कि यदि मामले में उचित कार्रवाई नहीं हुई तो इसे आगामी बोर्ड बैठक में प्रमुखता से उठाया जाएगा। इसके बाद सभासदों ने जलकल विभाग के एई अनुज कुमार से भी मुलाकात की और पूरे मामले पर नाराजगी जताते हुए जल्द जांच पूरी कर कार्रवाई की मांग की।
जलकल विभाग ने बताया तकनीकी खराबी को कारण
जलकल विभाग के एई अनुज कुमार ने बताया कि पेयजलापूर्ति प्रभावित होने की सूचना मिलने के बाद विभागीय टीम को तत्काल लगाया गया था। जांच में स्काडा सिस्टम के सर्वर में तकनीकी खराबी सामने आई। विशेषज्ञ को बुलाकर सिस्टम की जांच कराई गई तो पता चला कि सर्वर ठप हो गया था और इसके कारण ट्यूबवेलों को ऑटो कमांड नहीं मिल पा रही थी।
एई के अनुसार, बुधवार सुबह करीब नौ बजे से शाम सात बजे तक फक्करशाह चौक पर सीवर लाइन का कार्य चल रहा था। इस दौरान जल निगम सीएंडडीएस के अधिकारियों द्वारा पेयजलापूर्ति बंद कराई गई थी। बाद में आपूर्ति दोबारा शुरू कर दी गई, लेकिन कुछ क्षेत्रों में पानी की समस्या बनी रही।
सभी 70 ट्यूबवेल प्रभावित होने की बात से विभाग का इनकार
एई अनुज कुमार ने बताया कि स्काडा सिस्टम में आई तकनीकी खराबी के कारण शहर के सभी 70 ट्यूबवेल प्रभावित नहीं हुए थे। उनके अनुसार करीब 20 से 25 ट्यूबवेलों की पेयजलापूर्ति मुख्य रूप से प्रभावित हुई।
समस्या सामने आने के बाद विभाग ने कर्मचारियों की टीम लगाकर प्रभावित ट्यूबवेलों को मैनुअल तरीके से संचालित कराया। विभाग के अनुसार रात करीब 12 बजे तक प्रभावित ट्यूबवेलों को दोबारा चालू कर दिया गया था।
मौजूदा फर्म से मांगा जवाब
मामले को लेकर ईओ पवन कुमार के निर्देश पर औपचारिक जांच शुरू कर दी गई है। वर्तमान में ऑटोमेशन व्यवस्था का संचालन कर रही सर्वेस इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, लखनऊ के मालिक सर्वेस सिंह से जवाब मांगा गया है।
इसके अलावा जलकल विभाग के जेई धर्मवीर सिंह और जितेंद्र कुमार को मामले की जांच सौंपी गई है। दोनों जेई से जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
जांच रिपोर्ट से सामने आएगी जिम्मेदारी
पालिका अधिकारियों के अनुसार, जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि स्काडा सिस्टम के सर्वर में तकनीकी खराबी किस वजह से आई। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि सिस्टम के रखरखाव में किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं।
अधिकारियों का कहना है कि जांच में यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल विभाग का दावा है कि प्रभावित ट्यूबवेलों को मैनुअल संचालन के जरिए शुरू कराकर पेयजलापूर्ति बहाल करने का प्रयास किया गया है।

