खतौली (मुजफ्फरनगर)। कस्बे में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। गली मोहल्लों से लेकर सार्वजनिक स्थानों तक बंदरों के झुंड खुलेआम घूम रहे हैं। आए दिन लोगों पर बंदरों के हमले के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। शुक्रवार को मिशन कंपाउंड क्षेत्र में घरेलू काम करके लौट रही एक महिला पर बंदरों के झुंड ने हमला कर दिया। हमले में महिला का एक कान कट गया, जबकि शरीर के कई अन्य हिस्सों पर भी बंदरों ने काटकर गंभीर घाव कर दिए। महिला की चीख पुकार सुनकर आसपास के लोगों ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह उसे बंदरों के चंगुल से बचाया।

घरेलू काम से लौट रही थी महिला

प्राप्त जानकारी के अनुसार गांव अंबरपुर निवासी शारदा पत्नी मुकेश कस्बे के मिशन कंपाउंड क्षेत्र में घरेलू कार्य करती हैं। शुक्रवार को वह मिशन कंपाउंड निवासी निकिता रॉय के घर का काम पूरा करने के बाद वापस लौट रही थीं। इसी दौरान रास्ते में पहले से मौजूद बंदरों के झुंड ने अचानक उन्हें घेर लिया।
महिला कुछ समझ पाती, इससे पहले ही बंदरों ने उस पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से शारदा घबरा गईं और खुद को बचाने के लिए शोर मचाने लगीं। बंदरों ने उनके शरीर के कई हिस्सों को काटकर घायल कर दिया। हमले के दौरान महिला का एक कान भी बुरी तरह जख्मी होकर कट गया।
शोर सुनकर लोगों ने बंदरों को भगाया
महिला की चीख पुकार सुनकर आसपास मौजूद लोग मौके पर पहुंच गए। लोगों ने काफी मशक्कत के बाद बंदरों के झुंड को वहां से भगाया और घायल महिला को सुरक्षित बाहर निकाला। घटना की जानकारी मिलने के बाद निकिता रॉय घायल शारदा को उपचार के लिए सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचीं।
अस्पताल में चिकित्सकों ने महिला का प्राथमिक उपचार किया। शरीर पर कई घाव होने और कान में गंभीर चोट के कारण चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया।
शिकायतों के बावजूद बंदरों से नहीं मिली निजात
निकिता रॉय का आरोप है कि मिशन कंपाउंड क्षेत्र में बंदरों का आतंक लंबे समय से बना हुआ है। बंदरों के झुंड दिनभर क्षेत्र में घूमते रहते हैं और राहगीरों तथा स्थानीय निवासियों को परेशान करते हैं। उन्होंने बताया कि बंदरों की समस्या से निजात दिलाने के लिए कई बार नगर पालिका परिषद के अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराकर बंदरों को पकड़ने की मांग की गई, लेकिन इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। लोगों का कहना है कि बंदरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और वे मकानों की छतों, दुकानों तथा गलियों में झुंड बनाकर घूमते रहते हैं।
घर और दुकानों में घुसकर सामान उठा ले जाते हैं बंदर
स्थानीय नागरिकों के मुताबिक बंदर कई बार घरों और दुकानों में घुस जाते हैं। वे खाद्य सामग्री के साथ घरेलू सामान भी उठा ले जाते हैं। विरोध करने या उन्हें भगाने का प्रयास करने पर बंदर आक्रामक होकर लोगों पर हमला कर देते हैं। इस वजह से क्षेत्र के लोगों में लगातार डर बना हुआ है।
व्यापारियों का कहना है कि बंदरों के कारण दुकानों में रखा सामान भी कई बार क्षतिग्रस्त हो जाता है। बंदरों को भगाने के दौरान दुकानदारों को उनके काटने का खतरा भी बना रहता है, जिससे व्यापारी भी परेशान हैं।
बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में दहशत
कस्बे के लोगों का कहना है कि बंदरों के झुंड के कारण बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। कई बार लोग रास्ते में बंदरों का झुंड देखकर अपना रास्ता बदलने को मजबूर हो जाते हैं। नागरिकों का कहना है कि बंदरों के हमले की घटनाएं लगातार सामने आने के बावजूद संबंधित विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
नागरिकों ने तत्काल अभियान चलाने की मांग की
शुक्रवार को महिला पर हुए हमले के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है। नागरिकों ने नगर पालिका परिषद से मांग की है कि किसी बड़ी घटना का इंतजार करने के बजाय बंदरों की समस्या को गंभीरता से लिया जाए। लोगों ने प्रभावित इलाकों में विशेष अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ने और समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

