मुजफ्फरनगर में गैंगस्टर एक्ट में इरफान उर्फ फाना को 5 साल की सजा, गोहत्या-गोमांस तस्करी गिरोह से जुड़े मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला

मुजफ्फरनगर में गैंगस्टर एक्ट में इरफान उर्फ फाना को 5 साल की सजा, गोहत्या-गोमांस तस्करी गिरोह से जुड़े मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला

मुजफ्फरनगर। थाना सिविल लाइन क्षेत्र में गोहत्या और गोमांस की तस्करी जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े संगठित गिरोह का हिस्सा होने के मामले में विशेष गैंगस्टर न्यायालय ने कड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट एवं अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या पांच मुजफ्फरनगर काशिफ शेख की अदालत ने आरोपी इरफान उर्फ फाना पुत्र सुंडा कुरैशी निवासी गहराबाग थाना कोतवाली नगर मुजफ्फरनगर को गैंगस्टर एक्ट के तहत दोषी करार दिया है। अदालत ने आरोपी को पांच वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।

यह फैसला थाना सिविल लाइन में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 60/2024 से संबंधित है। मामले में उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम 1986 की धारा 3(1) के तहत कार्रवाई की गई थी।

संगठित गिरोह बनाकर अपराध करने का आरोप

अभियोजन के अनुसार आरोपी इरफान उर्फ फाना समेत कई लोगों ने एक संगठित गिरोह बना रखा था। पुलिस की ओर से तैयार गैंगचार्ट में आरोप लगाया गया था कि गिरोह के सदस्य आर्थिक, भौतिक और दुनियावी लाभ के लिए गोहत्या और गोमांस की तस्करी जैसे अपराधों में संलिप्त थे।

पुलिस के अनुसार इस गिरोह का नेतृत्व मुल्ला कासिम कर रहा था। गैंगचार्ट में मुल्ला कासिम, दीन मोहम्मद उर्फ दीनू, कल्लू उर्फ अमजद, इरफान उर्फ फाना, नवाब, रियायत उर्फ रियासत, ताज मोहम्मद और शहजादा उर्फ मुल्ला समेत अन्य आरोपियों के नाम शामिल किए गए थे।

अभियोजन पक्ष का कहना था कि गिरोह की आपराधिक गतिविधियों के कारण क्षेत्र में भय और आतंक का माहौल बना हुआ था। इसी आधार पर आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।

पुराने मुकदमों को बनाया गया गैंगचार्ट का आधार

अदालत में हुई सुनवाई के दौरान तत्कालीन थाना सिविल लाइन प्रभारी निरीक्षक ओमप्रकाश सिंह ने अभियोजन पक्ष की ओर से गवाही दी। उन्होंने बताया कि आरोपियों के खिलाफ गैंगचार्ट तैयार करते समय पूर्व में दर्ज गोवध अधिनियम से संबंधित मुकदमों का भी उल्लेख किया गया था।

गैंगचार्ट में मुकदमा अपराध संख्या 256/2022 में धारा 3, 5 और 8 गोवध अधिनियम तथा मुकदमा अपराध संख्या 211/2023 में धारा 3 और 8 गोवध अधिनियम का उल्लेख किया गया था।

पुलिस द्वारा तैयार गैंगचार्ट को उच्चाधिकारियों के माध्यम से तत्कालीन जिलाधिकारी के समक्ष अनुमोदन के लिए भेजा गया था। अनुमोदन मिलने के बाद चार मार्च 2024 को थाना सिविल लाइन में गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया।

अदालत में पेश किए गए दस्तावेजी साक्ष्य

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेजी साक्ष्य भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। निरीक्षक ओमप्रकाश सिंह के माध्यम से गैंगचार्ट, एफआईआर, आरोपपत्र और अभियोजन स्वीकृति से संबंधित दस्तावेज अदालत में दाखिल किए गए।

अभियोजन के अनुसार विवेचना पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की धारा 2 और 3 के तहत आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।

अदालत ने सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाह के बयान का परीक्षण किया। इसके बाद पत्रावली पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर आरोपी इरफान उर्फ फाना के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की धारा 3(1) का आरोप सिद्ध माना गया।

आरोपी ने अदालत से मांगी थी माफी

अभियोजन साक्ष्य समाप्त होने के बाद आरोपी का बयान भी दर्ज किया गया। अदालत के फैसले में उल्लेख है कि आरोपी ने अपने कृत्य के लिए क्षमा मांगी और भविष्य में अपराध नहीं करने की बात कही।

हालांकि अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों, अभियोजन गवाह के बयान और दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी माना। इसके बाद अदालत ने उसे पांच वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।

पांच साल की सजा से अपराधियों में गया कड़ा संदेश

विशेष गैंगस्टर न्यायालय के इस फैसले को संगठित अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि गैंगस्टर एक्ट के तहत लगाए गए आरोपों को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर परखा गया और दोष सिद्ध होने पर आरोपी को निर्धारित सजा दी गई।

अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दिनेश पुंडीर ने मामले की पैरवी की। उन्होंने बताया कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाह के बयान के आधार पर अदालत ने आरोपी इरफान उर्फ फाना को गैंगस्टर एक्ट के तहत दोषी माना और पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।

अदालत ने आरोपी पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह फैसला एक सितंबर 2026 को सुनाया गया।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *