लखनऊ। आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनं” अर्थात निरोगी होना सबसे बड़ा भाग्य है और बेहतर स्वास्थ्य से ही सभी कार्य सिद्ध होते हैं। संसार की सारी सुख-सुविधाओं, खुशियों और धन-दौलत का भोग भी तभी किया जा सकता है जब निरोगी काया हो। बेहतर स्वास्थ्य नियमित आहार-विहार के पालन से ही प्राप्त हो सकता है। इसके लिए जहाँ जीवनशैली को नियमित बनाने और शारीरिक श्रम को तरजीह देने की जरूरत है वहीँ खानपान का भी ख़ास ख्याल रखने की जरूरत है। सही खानपान और पोषण के बारे में समुदाय में जागरूकता की अलख जगाने के उद्देश्य से ही हर साल एक से सात सितम्बर तक राष्ट्रीय पोषण सप्ताह मनाया जाता है। इसका मूल उद्देश्य समुदाय को स्थानीय स्तर पर सर्वसुलभ पोषक तत्वों से भरपूर मौसमी फलों-सब्जियों और अनाज के बारे में जागरूक बनाना है क्योंकि पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार ही स्वस्थ जीवन का आधार है।

पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मुकेश शर्मा का कहना है कि सही पोषण हालांकि सभी आयु वर्ग के लिए बहुत ही जरूरी है किन्तु गर्भवती महिलाओं, बच्चों और किशोर-किशोरियों के पोषण का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है क्योंकि यह ऐसी अवस्था होती है जहाँ पर इस वर्ग को एक बड़े बदलाव का सामना करना होता है।

गर्भवती को अपने साथ ही गर्भस्थ शिशु के पोषण का ख्याल रखना होता है तो वहीँ बच्चों को शारीरिक वृद्धि के लिए पोषण खास अहमियत रखता है। किशोरावस्था में शरीर के सम्पूर्ण विकास के लिए आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन की अधिक मात्रा की जरूरत होती है। ऐसे में उनके भोजन में हरे पत्तेदार सब्जियों को जरूर शामिल करें ताकि भरपूर मात्रा में शरीर को आयरन की मात्रा मिल सके। इन सब्जियों में स्थानीय स्तर पर पर्याप्त मात्रा में मिलने वाली भिंडी, मटर, सेम की फलियाँ, चौलाई, पालक, बथुआ, मेथी, सहजन और सरसों के साग को शामिल किया जा सकता है। यह सब्जियां हीमोग्लोबिन बढ़ाने में बहुत ही मददगार साबित होती हैं। इनके अवशोषण को बढ़ाने के लिए इनमें नींबू या टमाटर के साथ पकाकर खाना ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। पालक और सहजन में जहाँ आयरन की मात्रा भरपूर होती है वहीँ मेथी में आयरन के साथ फाइबर और अन्य पोषक तत्व भी उच्च मात्रा में होते हैं।
बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध मोटा अनाज और दाल को भी जरूर प्राथमिकता दें। इनमें मक्का, बाजरा, रागी, ज्वार, राजमा, नट्स, चना दाल, काला चना, सोयाबीन और मसूर आदि को भोजन में शामिल कर बेहतर स्वास्थ्य प्राप्त किया जा सकता है। दैनिक आहार में पीले एवं नारंगी फलों को भी शामिल करके शरीर को आकर्षक बनाया जा सकता है।
इनमें पपीता, आम, खरबूज, कद्दू, गाजर आदि को शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा तिल, गुड़, चना और अलसी भी शरीर के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। थाली में विटामिन-सी युक्त आहार को भी शामिल करना आवश्यक होता है क्योंकि बेहतर स्वास्थ्य में यह बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसके लिए जरूरी है कि अंकुरित चना/दाल, आंवला, नींबू, संतरा, टमाटर, अंगूर, अमरूद आदि से युक्त विविधता वाली थाली को जरूर अपनाएं। विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने के लिए भी देश के हर नागरिक का स्वस्थ और निरोगी होना बहुत जरूरी है। इसकी तैयारी में अभी से ही जुटना आवश्यक है, क्योंकि यह सोने पर सुहागा जैसा ही होगा, जब हम विकसित भारत को स्वस्थ विकसित भारत गर्व से कह सकेंगे।

