मुजफ्फरनगर में किसानों का ट्रैक्टर काफिला रोका तो गरमाया माहौल, नवला कट पर पुलिस से तनातनी; 23 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन

मुजफ्फरनगर में किसानों का ट्रैक्टर काफिला रोका तो गरमाया माहौल, नवला कट पर पुलिस से तनातनी; 23 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन

मुजफ्फरनगर। जिला मुख्यालय पहुंचकर सरकार के नाम 23 सूत्रीय सुझाव पत्र सौंपने जा रहे किसानों के ट्रैक्टरों को सोमवार को थाना मंसूरपुर क्षेत्र के नवला कट पर पुलिस और प्रशासन ने रोक दिया। सैकड़ों ट्रैक्टरों के काफिले को रोके जाने के बाद मौके पर कई घंटे तक हंगामे और तनातनी का माहौल बना रहा। किसानों और पुलिस के बीच हुई बहस और खींचतान के बाद किसान नेताओं में भी नाराजगी देखने को मिली।

स्थिति को देखते हुए नवला कट पर मंसूरपुर पुलिस के साथ भारी पुलिस बल तैनात किया गया। एसडीएम खतौली और सीओ खतौली भी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और लगातार स्थिति पर नजर बनाए रखी। अधिकारियों और किसान नेताओं के बीच काफी देर तक बातचीत का दौर चलता रहा।

सैकड़ों ट्रैक्टरों के सामने खड़ी कर दी गईं पुलिस की गाड़ियां

किसानों का कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने ट्रैक्टरों के साथ जिला मुख्यालय की ओर जा रहे थे। उनका उद्देश्य डीएम कार्यालय पहुंचकर सरकार के नाम 23 सूत्रीय सुझाव पत्र सौंपना था। किसानों के अनुसार, जब उनका काफिला नवला कट पहुंचा तो पुलिस ने ट्रैक्टरों को आगे बढ़ने से रोक दिया।

किसानों का आरोप था कि उन्हें ट्रैक्टरों के साथ ही पैदल भी आगे जाने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। काफिले के सामने पुलिस और प्रशासन की गाड़ियां खड़ी कर दी गईं। इसके बाद किसानों और पुलिसकर्मियों के बीच बहस शुरू हो गई और देखते ही देखते मौके पर खींचतान की स्थिति बन गई।

कई घंटे नवला कट पर डटे रहे किसान

पुलिस द्वारा काफिला रोके जाने के बाद बड़ी संख्या में किसान नवला कट पर ही जमा हो गए। किसान जिला मुख्यालय तक जाने की अनुमति देने की मांग करते रहे। वहीं पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे रहे।

किसान नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बातचीत के कई दौर हुए। इस दौरान नवला कट क्षेत्र में काफी देर तक गहमागहमी बनी रही। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल को भी मौके पर तैनात रखा गया।

बातचीत के बाद कुछ ट्रैक्टरों को मिली आगे जाने की अनुमति

काफी देर तक चले हंगामे और बातचीत के बाद एसडीएम खतौली तथा सीओ खतौली की ओर से किसानों के कुछ ट्रैक्टरों को आगे जाने की अनुमति दी गई। इसके बाद किसानों का काफिला जिला मुख्यालय की ओर रवाना हुआ।

इस दौरान पुलिस और प्रशासन की करीब छह गाड़ियां किसानों के काफिले के साथ चलती रहीं। वहीं नवला कट पर भी पुलिस बल की तैनाती जारी रही। अधिकारियों ने काफिले की गतिविधियों पर नजर बनाए रखी, ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।

एक महीने से कार्यक्रम की तैयारी का दावा

किसान चिंतक एवं किसान सेवक विनीत कुमार त्यागी ने पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर नाराजगी जताई। उन्होंने प्रशासन पर किसानों के साथ दोहरे रवैये का आरोप लगाया।

विनीत कुमार त्यागी के अनुसार, किसान करीब एक महीने से इस कार्यक्रम की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने बताया कि पहले किसानों ने 24 जुलाई को जिला मुख्यालय पहुंचने का कार्यक्रम तय किया था, लेकिन प्रशासन की ओर से माहौल का हवाला दिए जाने के बाद कार्यक्रम की तारीख बढ़ाकर 24 अगस्त कर दी गई।

उनका दावा है कि कार्यक्रम की जानकारी एलआईयू टीम को दी गई थी। इसके अलावा सिटी मजिस्ट्रेट को लिखित ज्ञापन देकर भी किसानों के कार्यक्रम की जानकारी दी गई थी।

न पार्टी का झंडा, न संगठन का डंडा

विनीत कुमार त्यागी ने कहा कि किसान किसी राजनीतिक दल का झंडा लेकर नहीं आए हैं और न ही किसी संगठन का डंडा लेकर पहुंचे हैं। उनका उद्देश्य केवल किसानों की समस्याओं और सुझावों को सरकार तक पहुंचाना है।

उन्होंने कहा कि किसानों के पास सरकार को सौंपने के लिए 23 बिंदुओं का सुझाव पत्र है। किसान नेता ने दावा किया कि इन सुझावों में यदि एक भी मांग गलत साबित होती है तो वह सरकार से माफी मांगने के लिए तैयार हैं।

चीनी और गन्ने की कीमतों का मुद्दा भी उठाया

किसान नेता ने चीनी और गन्ने की कीमतों के बीच के अंतर का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि बाजार में चीनी की कीमत करीब 40 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि चीनी बनाने वाले गन्ने की कीमत में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है।

उन्होंने मुख्यमंत्री से किसानों की 23 सूत्रीय मांगों और सुझावों पर गंभीरता से विचार करने तथा किसानों की समस्याओं का समाधान कराने की मांग की।

शांतिपूर्ण तरीके से मांग रखने जा रहे किसानों को रोकने पर सवाल

विनीत त्यागी ने सवाल उठाया कि जब किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के लिए जिला मुख्यालय जा रहे थे तो उन्हें रास्ते में रोकने की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने प्रशासन से किसानों को आगे जाने की अनुमति देने और उनके सुझाव पत्र को सरकार तक पहुंचाने की मांग की।

किसान नेताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं है। वे केवल अपनी समस्याओं और सुझावों को प्रशासन तथा सरकार के सामने रखना चाहते हैं।

डीएम कार्यालय पर धरने पर बैठे किसान

किसान नेता के अनुसार, जिला मुख्यालय पहुंचने के बाद किसान अपनी मांगों को लेकर डीएम कार्यालय पर धरने पर बैठ गए। किसानों ने कहा कि 23 सूत्रीय सुझाव पत्र के माध्यम से वे सरकार का ध्यान किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों की ओर आकर्षित करना चाहते हैं।

किसानों ने प्रशासन से मांग की कि उनके सुझावों को गंभीरता से लिया जाए और संबंधित मांगों पर सरकार स्तर से विचार किया जाए।

पुलिस की निगरानी में आगे बढ़ा किसानों का काफिला

नवला कट पर कई घंटे तक चले हंगामे के बाद अधिकारियों और किसान नेताओं के बीच बातचीत से स्थिति कुछ सामान्य हुई। इसके बाद कुछ ट्रैक्टरों को जिला मुख्यालय की ओर आगे बढ़ने की अनुमति दी गई।

किसानों के काफिले के साथ पुलिस और प्रशासन की गाड़ियां भी चलती रहीं। वहीं नवला कट पर पुलिस की मौजूदगी बनी रही। अब किसानों के 23 सूत्रीय सुझाव पत्र और उनकी मांगों पर प्रशासन तथा सरकार की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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