मुजफ्फरनगर के बड़कली सामूहिक हत्याकांड: विक्की त्यागी की पत्नी मीनू त्यागी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, 15 साल बाद जेल से बाहर आने का रास्ता साफ

मुजफ्फरनगर के बड़कली सामूहिक हत्याकांड: विक्की त्यागी की पत्नी मीनू त्यागी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, 15 साल बाद जेल से बाहर आने का रास्ता साफ

मुजफ्फरनगर। जिले के बहुचर्चित बड़कली सामूहिक हत्याकांड मामले में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। मामले में दोषी ठहराई गई कुख्यात विक्की त्यागी की पत्नी मीनू त्यागी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। मीनू करीब 15 वर्षों से जेल में बंद है और वर्तमान में अंबेडकरनगर जिला कारागार में निरुद्ध थी।

मीनू त्यागी ने जमानत के लिए पहले हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन वहां से राहत नहीं मिलने के बाद उसने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। शीर्ष अदालत में सुनवाई के बाद गुरुवार को उसे जमानत प्रदान की गई। हालांकि, उसकी रिहाई जमानत की शर्तों और आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही होगी।

2011 में हुई थी एक ही परिवार के आठ लोगों की हत्या

बड़कली सामूहिक हत्याकांड 11 जुलाई 2011 को हुआ था। अभियोजन के अनुसार, रोहाना गन्ना समिति के पूर्व चेयरमैन उदयवीर सिंह और उनके परिवार के लोगों को ट्रक से कुचलकर हत्या कर दी गई थी। घटना में उदयवीर सिंह के अलावा उनके दो बेटे समरवीर और श्यामवीर, भतीजे गौरव वीर, गौरव वीर की पत्नी कल्पना और तीन मासूम बच्चों समेत कुल आठ लोगों की मौत हुई थी।

इस सामूहिक हत्याकांड ने पूरे मुजफ्फरनगर को हिलाकर रख दिया था और मामला लंबे समय तक सुर्खियों में रहा।

चुनावी रंजिश से जुड़ी थी हत्याकांड की पृष्ठभूमि

मामले की पृष्ठभूमि वर्ष 2005 में हुए चरथावल ब्लॉक प्रमुख चुनाव से जुड़ी बताई जाती है। चुनाव में विक्की त्यागी और उदयवीर सिंह के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता थी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच रंजिश बढ़ती गई।

बताया जाता है कि विक्की त्यागी पर उदयवीर सिंह के मित्र और साझेदार सतीश त्यागी की हत्या का आरोप लगा था। इस मामले की पैरवी उदयवीर सिंह कर रहे थे। बाद में 2010 के ब्लॉक प्रमुख चुनाव को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच विवाद और गहरा गया।

2022 में मीनू समेत 16 दोषियों को उम्रकैद

लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद 4 जुलाई 2022 को अदालत ने मीनू त्यागी समेत 16 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सजा पाने वालों में अनिल, ममता, शुभम, लोकेश, प्रमोद, मनोज, मोहित, धर्मेंद्र, रविंद्र, विनोद, विदित, बबलू, बोबी उर्फ विनीत शर्मा, विनीत त्यागी और हरवीर शामिल थे।

मीनू त्यागी को इस मामले में 19 अगस्त 2011 से जेल में निरुद्ध बताया गया है। उम्रकैद की सजा के बाद उसने हाईकोर्ट से जमानत की मांग की, लेकिन याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

अदालत में पेशी के दौरान विक्की त्यागी की हत्या

बड़कली हत्याकांड से जुड़े प्रमुख नाम विक्की त्यागी की बाद में अदालत परिसर में पेशी के दौरान हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने भी उत्तर प्रदेश में सनसनी फैला दी थी।

अब सुप्रीम कोर्ट से मीनू त्यागी को जमानत मिलने के बाद करीब डेढ़ दशक पुराने बड़कली सामूहिक हत्याकांड का मामला एक बार फिर चर्चा में है। जमानत आदेश की शर्तें पूरी होने के बाद मीनू की जेल से रिहाई की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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