मंसूरपुर में 12 लाख से ज्यादा चुकाए, फिर भी रजिस्ट्रेशन के लिए खुद खर्च किए 1.16 लाख! कार शोरूम पर धोखाधड़ी का आरोप, 4 पर मुकदमा

मंसूरपुर में 12 लाख से ज्यादा चुकाए, फिर भी रजिस्ट्रेशन के लिए खुद खर्च किए 1.16 लाख! कार शोरूम पर धोखाधड़ी का आरोप, 4 पर मुकदमा

मुजफ्फरनगर। जिले के थाना मंसूरपुर क्षेत्र के बेगराजपुर स्थित एक कार शोरूम से वाहन खरीदने के मामले में अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। शिकायतकर्ता ने शोरूम प्रबंधन पर कार की कीमत और अन्य भुगतान के रूप में 12 लाख रुपये से अधिक लेने के बावजूद वाहन का स्थायी पंजीकरण नहीं कराने, रकम वापस नहीं करने और लगातार टालमटोल करने के आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि उसे बाद में अपनी कार का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए अलग से एक लाख रुपये से अधिक की रकम खुद खर्च करनी पड़ी।

शामली जनपद के मसावी गांव निवासी इमरान अली ने इस मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय, मुजफ्फरनगर का दरवाजा खटखटाया था। न्यायालय के निर्देश के बाद थाना मंसूरपुर पुलिस ने नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

12 लाख से ज्यादा देकर खरीदी सोनट कार

इमरान अली के मुताबिक, उन्होंने बेगराजपुर स्थित मैसर्स महलका मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड से सफेद रंग की सोनट कार HTKO मॉडल खरीदी थी। कार खरीदने को लेकर उनकी शोरूम में मौजूद कंपनी के जेएम से बातचीत हुई थी। सौदा तय होने के बाद उन्होंने वाहन की कीमत और अन्य भुगतान की प्रक्रिया पूरी की।

शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने अपने एचडीएफसी बैंक खाते से कंपनी के बैंक खाते में 7 लाख 99 हजार 831 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए। इसके अलावा 57 हजार रुपये भी कंपनी के खाते में जमा कराए गए। पुरानी स्विफ्ट डिजायर कार भी शोरूम में जमा की गई, जिसकी कीमत शोरूम प्रबंधन की ओर से 3 लाख 50 हजार रुपये निर्धारित की गई थी।

इस तरह शिकायतकर्ता के मुताबिक कुल 12 लाख 6 हजार 831 रुपये का भुगतान शोरूम को किया गया। भुगतान के बाद शोरूम की ओर से उन्हें कार सौंप दी गई।

अस्थायी नंबर मिला, स्थायी रजिस्ट्रेशन का इंतजार करता रहा ग्राहक

इमरान अली का कहना है कि कार की डिलीवरी 18 नवंबर 2024 को की गई थी। वाहन सौंपते समय शोरूम की ओर से अस्थायी नंबर T1124UP2618H जारी किया गया। उस समय जिम्मेदार अधिकारियों ने कथित तौर पर भरोसा दिलाया था कि करीब एक महीने के भीतर कार का स्थायी रजिस्ट्रेशन नंबर उपलब्ध करा दिया जाएगा।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि एक महीने की अवधि बीतने के बाद भी उसे स्थायी रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं दिया गया। जब उसने शोरूम के अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क कर रजिस्ट्रेशन की जानकारी मांगी तो उसे कथित तौर पर लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा।

काफी समय बीतने के बाद इमरान अली ने खुद ही अपनी कार का रजिस्ट्रेशन कराने का फैसला किया।

रजिस्ट्रेशन के लिए खुद जमा किए 1 लाख 16 हजार रुपये

शिकायतकर्ता के अनुसार, अपनी कार का पंजीकरण कराने के लिए उन्होंने आरटीओ देहरादून की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी की और 1 लाख 16 हजार 90 रुपये की राशि स्वयं जमा की।

इमरान अली का आरोप है कि कार की खरीद के दौरान रजिस्ट्रेशन से संबंधित रकम शोरूम को देने के बावजूद उन्हें अपना पंजीकरण खुद कराना पड़ा। इसके बाद उन्होंने शोरूम पहुंचकर अपने पैसे और संबंधित दस्तावेज वापस मांगे।

शोरूम पहुंचने पर अधिकारियों पर टालमटोल का आरोप

शिकायतकर्ता का कहना है कि रजिस्ट्रेशन पूरा कराने के बाद वह कई बार बेगराजपुर स्थित शोरूम पहुंचा। उसका उद्देश्य शोरूम प्रबंधन से अपने पैसे और संबंधित दस्तावेज वापस लेना था। आरोप है कि हर बार उसे जिम्मेदार अधिकारियों से मिलने के बजाय टालमटोल का सामना करना पड़ा।

इमरान अली का दावा है कि उसे रकम और दस्तावेज वापस करने का आश्वासन दिया जाता रहा, लेकिन कथित तौर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

शोरूम कर्मचारियों पर साजिश कर धोखाधड़ी का आरोप

इमरान अली ने न्यायालय में दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि शोरूम से जुड़े लोगों ने आपस में मिलकर उसके साथ धोखाधड़ी की। शिकायत में जुहैब हसन खान, ताबिश जैदी उर्फ ताबिश अली और अन्य कर्मचारियों पर कथित साजिश के तहत रजिस्ट्रेशन के नाम पर रकम हड़पने का आरोप लगाया गया है।

शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया कि उसे बाद में जानकारी मिली कि शोरूम से जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ ग्राहकों के साथ कथित धोखाधड़ी और रकम हड़पने से संबंधित मामले पहले भी दर्ज हो चुके हैं। प्रार्थना पत्र में थाना मंसूरपुर में मुकदमा अपराध संख्या 74/2025 और 33/2025 दर्ज होने का उल्लेख किया गया है।

थाने से एसएसपी कार्यालय तक पहुंची शिकायत

इमरान अली के अनुसार, उसने मामले में कार्रवाई के लिए सबसे पहले 24 फरवरी 2025 को थाना मंसूरपुर में लिखित शिकायत दी थी। इसके बाद 11 फरवरी 2026 को भी थानाध्यक्ष को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की गई।

शिकायतकर्ता का कहना है कि स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं होने पर उसने 9 मार्च 2026 को एसएसपी मुजफ्फरनगर को प्रार्थना पत्र दिया। इसके बाद 1 अप्रैल 2026 को दोबारा एसएसपी कार्यालय में शिकायत भेजी गई। आरोप है कि कई स्तर पर शिकायत करने के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं हुआ।

इसके बाद इमरान अली ने न्यायालय की शरण ली।

सीजेएम कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुआ मुकदमा

इमरान अली ने सीजेएम न्यायालय मुजफ्फरनगर में वाद संख्या 764/2026 के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। इसमें थाना मंसूरपुर पुलिस को मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने के निर्देश देने की मांग की गई थी।

अदालत के आदेश के बाद थाना मंसूरपुर पुलिस ने मामले में नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस ने अब पूरे प्रकरण की विवेचना शुरू कर दी है।

चार लोग नामजद, दस्तावेजों की होगी जांच

मामले में जुहैब हसन खान पुत्र इफ्तेकार हसन खान निवासी कोटला घंटाघर मेरठ, ताबिश जैदी उर्फ ताबिश अली पुत्र रजाउल हसन निवासी ग्राम तिस्सा थाना भोपा मुजफ्फरनगर, अभिषेक जैन पुत्र प्रभाष चंद्र जैन निवासी पल्लवपुरम मेरठ और सिद्धार्थ जैन निवासी परतापुर मेरठ को नामजद किया गया है।

पुलिस जांच के दौरान कार खरीद से संबंधित दस्तावेज, भुगतान का रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन, पुरानी कार के मूल्यांकन से जुड़े कागजात, वाहन रजिस्ट्रेशन से संबंधित दस्तावेज और आरटीओ में जमा की गई रकम की जांच की जाएगी।

पुलिस विवेचना के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए धोखाधड़ी और रकम हड़पने के आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल अदालत के आदेश पर मुकदमा दर्ज होने के बाद बेगराजपुर स्थित कार शोरूम से जुड़ा यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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