परीक्षा सुधार विधेयक पर विपक्ष का सरकार पर हमला, बोले- कानून के नाम पर छात्रों और जनता को किया जा रहा गुमराह

परीक्षा सुधार विधेयक पर विपक्ष का सरकार पर हमला, बोले- कानून के नाम पर छात्रों और जनता को किया जा रहा गुमराह

नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान सोमवार को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026, छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर विपक्ष ने प्रदर्शन किया। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने सरकार पर छात्रों के साथ कठोर व्यवहार करने, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप लगाया। वहीं, विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी और गृह मंत्री अमित शाह की निंदा की भी मांग दोहराई। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि उन्हें यह जानकारी मिली है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में छात्रों के खिलाफ अब भी एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस सूचना की अभी पुष्टि नहीं हुई है।

 

उन्होंने कहा कि यदि इसकी पुष्टि ही नहीं हुई है, तो फिर इस पर बहस का क्या औचित्य है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सार्वजनिक परीक्षाओं संशोधन विधेयक पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार पहले भी इस विषय पर कानून बना चुकी है। उन्होंने पूछा कि यदि पहले के कानून पर्याप्त थे, तो नए संशोधन की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया और सवाल किया कि क्या सरकार को पढ़े-लिखे छात्रों से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा महसूस हो रहा था। यदि सरकार वास्तव में कार्रवाई करना चाहती, तो अब तक जांच एजेंसियां ठोस नतीजे सामने ला चुकी होतीं। इमरान मसूद ने पेपर लीक के मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाया है और मुख्य आरोपी फरार बताया जा रहा है। उनके अनुसार सरकार केवल नए कानून लाने की बात कर रही है, जबकि प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही।

उन्होंने कहा कि यदि समय पर कार्रवाई होती, तो उसके परिणाम भी दिखाई देते। लोकसभा में कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान आरोप लगाया कि सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों को बचाना चाहती है। उन्होंने कहा कि हाल ही में एक अदालत ने एक आरोपी को जांच में खामियों के कारण बरी कर दिया था, जिससे स्पष्ट होता है कि केवल कानून में बदलाव पर्याप्त नहीं है, बल्कि निष्पक्ष और प्रभावी जांच भी जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार को लेकर गंभीर हैं। कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी कानून की सफलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है।

उन्होंने कहा कि यदि 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं होती, तो आरोपी कानूनी प्रक्रिया के तहत रिहा हो सकता है। उनके अनुसार असली मुद्दा सरकार की नीयत का है। यदि सरकार की मंशा साफ है तो कोई भी कानून प्रभावी हो सकता है, लेकिन यदि इच्छाशक्ति नहीं है तो नया विधेयक भी बेअसर साबित होगा। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में सुधार के लिए हाई पावर्ड टास्क फोर्स के गठन का स्वागत किया, लेकिन कहा कि इससे विपक्ष की प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की मांग दोहराते हुए छात्रों के खिलाफ कथित पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर गृह मंत्री अमित शाह की निंदा की मांग की। उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम सवाल उठाना है और सबूत देना अदालत का विषय है।

झामुमो सांसद महुआ माजी ने कहा कि उनकी पार्टी विधेयक पर गंभीर चर्चा चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहले भी पेपर लीक रोकने के आश्वासन देती रही है, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की घटनाएं सामने आईं और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए विपक्ष की राय लेकर कानून बनाया जाना चाहिए। टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे युवाओं के खिलाफ पैलेट गन और अन्य बल प्रयोग के उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने दावा किया कि कनॉट प्लेस क्षेत्र में पैलेट गन से कई राउंड फायरिंग हुई। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि निहत्थे और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ इतनी कठोर कार्रवाई क्यों की गई।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *