मुजफ्फरनगर। दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी शुक्रवार को करीब 19 वर्ष पुराने चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के मामले में मुजफ्फरनगर की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत में पेश हुए। दिल्ली पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उनकी पेशी पूरी तरह गोपनीय रखी गई। अदालत में पेश होने के बाद उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट रिकॉल कर दिए गए और न्यायालय ने उन्हें जमानत प्रदान कर दी। मामले की अगली सुनवाई अब 23 अगस्त को होगी।

शाही इमाम की पेशी को लेकर सुबह से ही मुजफ्फरनगर पुलिस, दिल्ली पुलिस और खुफिया एजेंसियां पूरी तरह सतर्क रहीं। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर उनकी अदालत में पेशी को गोपनीय रखा गया। सुबह करीब साढ़े दस बजे वह दिल्ली पुलिस की सुरक्षा में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत पहुंचे, जहां उन्होंने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से कानूनी प्रक्रिया पूरी की। उनकी मौजूदगी की जानकारी मीडिया को भी काफी देर बाद मिल सकी।

यह मामला वर्ष 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान का है। उस समय सैयद अहमद बुखारी ने खतौली विधानसभा क्षेत्र में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के प्रत्याशी साबिर अली के समर्थन में आयोजित एक चुनावी सभा को संबोधित किया था। आरोप था कि जिस हेलीकॉप्टर से वह सभा स्थल पर पहुंचे थे, उसे प्रशासन की पूर्व अनुमति के बिना उतारा गया था। इसे चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए चुनाव आयोग के निर्देश पर खतौली कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में शाही इमाम के साथ जामा मस्जिद की सलाहकार समिति के सदस्य ईनाम कुरैशी और तत्कालीन प्रत्याशी साबिर अली को भी नामजद किया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान लगातार अदालत में अनुपस्थित रहने के कारण सैयद अहमद बुखारी के खिलाफ समय-समय पर गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे। शुक्रवार को वह दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं के साथ अदालत पहुंचे, जहां उनके वकीलों ने वारंट रिकॉल करने का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। अदालत ने उनकी उपस्थिति दर्ज करने के बाद गैर-जमानती वारंट वापस ले लिए और आवश्यक विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें जमानत दे दी।
अदालत परिसर से बाहर निकलने के बाद मीडिया से बातचीत में शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने कहा कि उन्हें लंबे समय तक इस मुकदमे की जानकारी ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्हें मामले की जानकारी मिली, उन्होंने कानून का सम्मान करते हुए स्वयं न्यायालय में उपस्थित होकर कानूनी प्रक्रिया पूरी की। उन्होंने न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा कि वह आगे भी अदालत के सभी निर्देशों का पालन करेंगे।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 अगस्त की तिथि निर्धारित की है। अब आगामी सुनवाई में चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के इस बहुचर्चित मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
शाही इमाम की पेशी के दौरान कोर्ट परिसर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। दिल्ली पुलिस और स्थानीय पुलिस की संयुक्त निगरानी में पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद शाही इमाम कड़ी सुरक्षा के बीच वापस दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

