बरेली मंडल में अवैध बसों पर बड़ी कार्रवाई: 42 बसें सीज, 51 के चालान, ₹10.50 लाख जुर्माना
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बरेली मंडल में अवैध बसों पर बड़ी कार्रवाई: 42 बसें सीज, 51 के चालान, ₹10.50 लाख जुर्माना

बरेली। बरेली मंडल में अवैध और अनधिकृत रूप से संचालित बसों के खिलाफ परिवहन विभाग ने तीन दिवसीय विशेष प्रवर्तन अभियान चलाकर बड़ी कार्रवाई की है। अभियान के दौरान बरेली, बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर में कुल 51 बसों के चालान किए गए, जबकि 42 बसों को निरुद्ध (सीज) कर दिया गया। इन वाहनों पर करीब 10.50 लाख रुपये का जुर्माना भी अधिरोपित किया गया है।

यह अभियान परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश के निर्देश पर संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) बरेली प्रणव झा के निर्देशन में 22 से 24 जुलाई तक चलाया गया। अभियान का उद्देश्य बिना वैध दस्तावेजों, परमिट की शर्तों का उल्लंघन करने वाले और अन्य अनियमितताओं के साथ संचालित बसों के खिलाफ कार्रवाई कर सुरक्षित एवं नियमसम्मत परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करना था।

विभाग के अनुसार, कार्रवाई के दौरान बरेली में 15 बसों के चालान और 15 बसें निरुद्ध, बदायूं में छह चालान और तीन बसें निरुद्ध, पीलीभीत में नौ चालान और नौ बसें निरुद्ध तथा शाहजहांपुर में 21 चालान और 15 बसें निरुद्ध की गईं। इस प्रकार पूरे मंडल में कुल 51 चालान और 42 बसों को सीज किया गया।

अभियान के बाद निरुद्ध बसों के परमिट और राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआर) डाटाबेस की जांच में सामने आया कि कोई भी बस संबंधित मार्ग पर स्थायी स्टेज कैरिज परमिट से संचालित नहीं हो रही थी। अधिकांश बसें ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट या ऑल यूपी कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट पर संचालित थीं और दिल्ली, पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान जैसे राज्यों के लिए यात्रियों का परिवहन कर रही थीं। जहां-जहां परमिट की शर्तों का उल्लंघन, वैध अभिलेखों की कमी अथवा मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन मिला, वहां नियमानुसार चालान और निरुद्धीकरण की कार्रवाई की गई।

परिवहन विभाग अब निरुद्ध बसों की तकनीकी जांच भी कराएगा। इसके लिए सभी जिलों में तकनीकी अधिकारियों को नामित किया गया है और जिलाधिकारियों से मजिस्ट्रेट नामित करने का अनुरोध किया गया है। परिवहन विभाग और नामित मजिस्ट्रेट की संयुक्त टीम प्रत्येक बस की बॉडी संरचना, सीटों की स्वीकृत क्षमता, चेसिस व बॉडी में किए गए बदलाव, फिटनेस, कर, बीमा, पंजीकरण और परमिट संबंधी दस्तावेजों की विस्तार से जांच करेगी। जांच पूरी होने के बाद ही वाहनों को छोड़ा जाएगा। यदि किसी बस में अनधिकृत संरचनात्मक परिवर्तन या गंभीर अनियमितता पाई जाती है तो उसके फिटनेस प्रमाणपत्र के निलंबन, परमिट और पंजीकरण पर भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) प्रणव झा ने गुरुवार काे बताया कि अभियान के दौरान अधिकांश बसों में यात्रियों की संख्या स्वीकृत क्षमता के अनुरूप मिली और वे सड़क सुरक्षा मानकों के अनुसार संचालित हो रही थीं। केवल एक-दो बसों में क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने या दस्तावेजों में कमी मिलने पर तत्काल कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि किसी भी बस को निरुद्ध करने से पहले उसमें सवार यात्रियों को सुरक्षित रूप से निकटतम रोडवेज डिपो या बस अड्डे तक पहुंचाया गया, ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग का उद्देश्य वैध रूप से संचालित वाहनों को परेशान करना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा, यात्री सुरक्षा और मोटरयान अधिनियम के प्रभावी पालन को सुनिश्चित करना है। भविष्य में भी ऐसे विशेष अभियान लगातार जारी रहेंगे।

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