श्रावस्ती। ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर, पारदर्शी और विकासोन्मुख बनाने की दिशा में गुरुवार को जिला पंचायत संसाधन केंद्र (डीपीआरसी) भिनगा में विकासखंड स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ फैकल्टी डीपीआरसी बृजेश कुमार पांडेय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) तभी प्रभावी होगी, जब उसका निर्माण स्थानीय आवश्यकताओं, जनसहभागिता और डिजिटल तकनीक के बेहतर उपयोग के साथ किया जाएगा। उन्होंने प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा कि प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को ग्राम स्तर तक पहुंचाकर योजनाओं का गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन को पंचायत कार्ययोजना में शामिल करने पर जोर
जिला कॉर्डिनेटर स्वच्छ भारत मिशन राज कुमार तिवारी ने पंचायतों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों के तहत वर्ष 2026 में पंचायतों में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर नए नियम बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन व्यवस्थाओं को पंचायतों की कार्ययोजना में शामिल किया जाना चाहिए, जिससे गांवों को स्वच्छ और बेहतर बनाया जा सके।
Q-GPDP निर्माण में जनभागीदारी जरूरी
प्रशिक्षक चंचल देवी ने बताया कि ग्राम सभा की बैठकों का शेड्यूल जारी कर उसमें आमजन के साथ-साथ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही लाइन विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की सहभागिता से वित्तीय समावेशन और अन्य संसाधनों को बढ़ावा देकर गुणवत्तापूर्ण ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि सभी पंचायतों को हर हाल में 15 अगस्त 2026 तक Q-GPDP को ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
GPDP की 8 चरणीय प्रक्रिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की दी जानकारी
प्रशिक्षण का संचालन एवं मुख्य प्रशिक्षक अनिल कुमार तिवारी ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों को GPDP की 8 चरणीय प्रक्रिया, Q-GPDP, GPDP ब्लूप्रिंट, पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (PAI), डिजिटल पंचायत ब्लूप्रिंट, ई-ग्राम स्वराज पोर्टल और ग्राम गरीबी निवारण योजना (VPRP) को ग्राम पंचायत विकास योजना में शामिल करने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने डिजिटल माध्यम से योजनाओं के अपलोड, विभागीय योजनाओं के अभिसरण और सहभागी योजना निर्माण की व्यवहारिक प्रक्रिया का प्रदर्शन भी किया।
उन्होंने कहा कि पंचायतों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार योजनाएं तैयार करने, विभागीय योजनाओं के बेहतर समन्वय और डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग से विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता लाई जा सकती है।
बाल हितैषी और महिला हितैषी पंचायत बनाने पर जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रावस्ती की सचिव श्रीमती अनुप्रिया ने सामाजिक रूप से सुरक्षित और न्यायसंगत ग्राम पंचायत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि ग्राम सभा के गरीब और जरूरतमंद लोगों को निशुल्क विधिक सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने पंचायत सहायकों को संबोधित करते हुए कहा कि बाल विवाह, बाल भिक्षावृत्ति, बाल श्रम और घरेलू हिंसा जैसी समस्याओं के प्रति ग्रामीणों को जागरूक किया जाए। साथ ही बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने और पंचायतों को बाल हितैषी एवं महिला हितैषी बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार की जाए।
पंचायत पोर्टल और ई-ग्राम स्वराज की दी तकनीकी जानकारी
जिला परियोजना प्रबंधक श्रीमती सपना यादव ने पंचायत पोर्टल, जीपीडीपी पोर्टल, पंचायत निर्णय ऐप और ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के संबंध में तकनीकी जानकारी दी।
वहीं जिला समन्वयक सी-3 ने पंचायतों में स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़े बजट को जीपीडीपी कार्ययोजना में शामिल करने तथा स्वस्थ पंचायत और महिला हितैषी पंचायत बनाने के संकल्पित विषयों पर जानकारी साझा की।
कार्यक्रम में पंचायत सचिव, पंचायत सहायक सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन की प्रक्रिया को व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया।
