मुजफ्फरनगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत खतौली तहसील प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो लेखपालों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। दोनों पर रिश्वत से जुड़े कथित वीडियो और ऑडियो वायरल होने तथा भूमि संबंधी मामलों में अनियमितता के आरोप हैं। उप जिलाधिकारी खतौली डॉ. ललित कुमार मिश्र ने अलग-अलग आदेश जारी कर दोनों के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं। कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है।

पहला मामला खतौली तहसील में तैनात लेखपाल अश्वनी कुमार का है। प्रशासन के अनुसार सोशल मीडिया पर उनका एक कथित वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह भूमि पैमाइश के संबंध में कुछ लोगों से पैसों के लेन-देन को लेकर बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं।

इसी मामले में सेनीनगर निवासी किसान अर्जुन सैनी ने भी शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि भूमि विवाद से जुड़े एक प्रकरण में लेखपाल ने गलत और भ्रामक आख्या प्रस्तुत की थी। तहसीलदार की प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम ने प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर मानते हुए अश्वनी कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय राजस्व निरीक्षक कार्यालय खतौली निर्धारित किया गया है।
दूसरा मामला नौना हल्के में तैनात लेखपाल नीरज शर्मा का है। तहसीलदार की जांच रिपोर्ट के अनुसार सोशल मीडिया पर एक कथित ऑडियो क्लिप वायरल हुई, जिसमें ग्राम मोधपुर निवासी एक व्यक्ति सरकारी रिपोर्ट लगाने के एवज में रिश्वत देने की बात करता सुनाई दे रहा है।
प्रशासन के अनुसार बातचीत के दौरान लेखपाल ने मोबाइल पर इस तरह की चर्चा न करने की बात तो कही, लेकिन कथित रिश्वत की पेशकश का स्पष्ट विरोध नहीं किया और न ही इसकी सूचना अपने उच्चाधिकारियों को दी। इसे सरकारी सेवा की मर्यादा के प्रतिकूल मानते हुए नीरज शर्मा को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर राजस्व निरीक्षक कार्यालय खतौली से संबद्ध कर दिया गया।
एसडीएम डॉ. ललित कुमार मिश्र ने दोनों मामलों की विस्तृत विभागीय जांच खतौली तहसीलदार को सौंपी है। जांच पूरी होने तक दोनों लेखपालों को नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा तथा बिना सक्षम अनुमति के मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।
प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की विभागीय एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

