कोर्ट ने जताई नाराजगी: 3 साल बाद भी पुलिस नहीं करा सकी सुशील मूंछ को नोटिस तामील

कोर्ट ने जताई नाराजगी: 3 साल बाद भी पुलिस नहीं करा सकी सुशील मूंछ को नोटिस तामील

मुजफ्फरनगर। जनपद की एक अदालत ने कुख्यात अपराधी सुशील उर्फ मूंछ को नोटिस तामील कराने में पुलिस की विफलता पर कड़ी नाराजगी जताई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/एफटीसी कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने सुनवाई के दौरान कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि नोटिस तामील न होने से अभियुक्त को कानूनी प्रक्रिया में विलंब का अनुचित लाभ मिल रहा है।

अदालती अभिलेखों के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन मई 2023 को रतनपुरी क्षेत्र के गांव मथेड़ी निवासी सुशील उर्फ मूंछ के खिलाफ आपराधिक अपील दाखिल की थी। लगभग तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद पुलिस अब तक अभियुक्त को नोटिस तामील कराने में सफल नहीं हो सकी है।

मामले को गंभीर मानते हुए अदालत ने सुशील उर्फ मूंछ को 15 जुलाई 2026 के लिए नोटिस जारी कर तलब किया है। साथ ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा को निर्देश दिए हैं कि वे व्यक्तिगत पर्यवेक्षण में हर हाल में नोटिस की तामीली सुनिश्चित कराएं।

गौरतलब है कि सुशील उर्फ मूंछ का आपराधिक इतिहास लंबा रहा है। वर्ष 2001 में हत्या और हत्या के प्रयास के मामलों के आधार पर उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में अन्य आरोपियों में कुंवरपाल और चंदन भी शामिल थे। बाद में लंबी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आरोपी चंदन की मृत्यु हो गई, जबकि सुशील मूंछ के लगातार अदालत में पेश न होने पर पिछले वर्ष अदालत ने उसके खिलाफ स्थायी वारंट जारी करते हुए उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था। पुलिस पहले ही उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर चुकी है।

हाल ही में मंसूरपुर थाना क्षेत्र में न्यू मैक्स सोसाइटी के मैनेजर से अंतरराष्ट्रीय व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से दो करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में भी सुशील उर्फ मूंछ का नाम सामने आया था। इस प्रकरण में पुलिस ने उसके बेटों मनजीत उर्फ टोनी और अक्षयजीत उर्फ मोनी के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया था। बाद में पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान अक्षयजीत और उसके साथी अमरदीप को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जांच के दौरान पुलिस ने इस रंगदारी प्रकरण में सुशील उर्फ मूंछ को भी मुख्य साजिशकर्ता के रूप में शामिल किया।

अदालत के कड़े रुख के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि निर्धारित तिथि से पहले पुलिस अदालत के आदेश का पालन करते हुए नोटिस की तामीली सुनिश्चित कर पाती है या नहीं।

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