मुजफ्फरनगर। राजधानी लखनऊ में हाल ही में हुए भीषण अग्निकांड में 18 युवाओं की दर्दनाक मौत के बाद पूरे प्रदेश में शासन के निर्देश पर अग्नि सुरक्षा मानकों की जांच और अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में मुजफ्फरनगर में जिला प्रशासन, मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण (एमडीए), फायर विभाग और विद्युत विभाग द्वारा की जा रही ताबड़तोड़ छापेमारी और सीलिंग की कार्रवाई पर उत्तर प्रदेश सरकार के व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए स्पष्ट कहा कि सुरक्षा नियमों का पालन आवश्यक है, लेकिन इसकी आड़ में व्यापारियों, अस्पताल संचालकों और शिक्षण संस्थानों के साथ दमनात्मक व्यवहार स्वीकार नहीं किया जाएगा।

शहर के एक बाजार में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि लखनऊ की घटना बेहद दुखद है और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा मानकों की जांच होना जरूरी है। शासन की मंशा भी यही है कि सभी संस्थानों में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं, लेकिन मुजफ्फरनगर में जिस तरह बिना किसी पूर्व सूचना के बड़े पैमाने पर छापेमारी और सीलिंग की कार्रवाई की गई, उससे व्यापारियों और संस्थान संचालकों में भय और असमंजस का माहौल पैदा हो गया है।

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन, एसएसपी, एमडीए और फायर विभाग के अधिकारियों ने बिना किसी पूर्व तैयारी के शहर के विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, अस्पतालों और कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई शुरू कर दी। कई प्रतिष्ठानों को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया, जिससे न केवल व्यापार प्रभावित हुआ बल्कि लोगों की आजीविका पर भी सीधा असर पड़ा। मंत्री ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य लोगों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करना होना चाहिए, न कि उन्हें भयभीत करना।
कपिल देव अग्रवाल ने अधिकारियों को नसीहत देते हुए कहा कि यदि किसी प्रतिष्ठान में अग्नि सुरक्षा संबंधी कोई कमी या अन्य तकनीकी विसंगति पाई जाती है तो सबसे पहले संबंधित संचालक को लिखित नोटिस दिया जाना चाहिए। नोटिस के माध्यम से कमियों की जानकारी देकर उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर सुधार करने का अवसर मिलना चाहिए। यदि इसके बाद भी नियमों का पालन नहीं किया जाता, तभी प्रशासन को आगे की कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना किसी चेतावनी के सीधे प्रतिष्ठानों को बंद कर देना और सील कर देना प्रशासनिक अधिकारों का कठोर प्रयोग है, जिससे जनता और व्यापारियों में असंतोष बढ़ता है।
राज्य मंत्री ने कहा कि व्यापारी वर्ग प्रदेश की अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ है। व्यापारियों के सहयोग से ही शहर और प्रदेश का आर्थिक विकास संभव है। ऐसे में प्रशासन को व्यापारियों को विश्वास में लेकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों और व्यापारियों के बीच संवाद बना रहेगा तो सुरक्षा मानकों का पालन भी बेहतर तरीके से होगा और किसी प्रकार के टकराव की स्थिति भी उत्पन्न नहीं होगी।
मंत्री ने व्यापारियों से भी जिम्मेदारी निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आग जैसी दुर्घटनाएं किसी के साथ भी कभी भी हो सकती हैं, इसलिए सभी व्यापारियों को स्वयं आगे बढ़कर अपने प्रतिष्ठानों में अग्निशमन उपकरण लगाने चाहिए और आवश्यक फायर एनओसी सहित सभी सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सभी लोग अपनी जिम्मेदारी समझेंगे तो भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका भी कम होगी और प्रशासन को कठोर कार्रवाई करने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी।
उन्होंने दोहराया कि व्यापारी व्यवस्था सुधारने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और अधिकांश लोग नियमों का पालन करना चाहते हैं। ऐसे में प्रशासन को दंडात्मक कार्रवाई के बजाय सहयोगात्मक रवैया अपनाना चाहिए। अधिकारियों को चाहिए कि वे पहले कमियों को दूर कराने का प्रयास करें और केवल गंभीर लापरवाही की स्थिति में ही कठोर कदम उठाएं। मंत्री के इस बयान के बाद मुजफ्फरनगर में चल रही सीलिंग कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है। व्यापारिक संगठनों ने भी मंत्री के बयान का स्वागत करते हुए प्रशासन से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की मांग की है।

