मुजफ्फरनगर। प्रकाश चौक से नाबालिग दलित युवती के अपहरण के मामले में वांछित 25 हजार रुपये के इनामी और कुख्यात अपराधी सतपाल उर्फ सत्तू का मंगलवार को उपचार के दौरान निधन हो गया। सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात थाना सिविल लाइन पुलिस तथा एसओजी की संयुक्त टीम के साथ हुई मुठभेड़ में उसे दोनों पैरों में गोली लगी थी। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। चिकित्सकों के अनुसार अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब 19 जून को थाना सिविल लाइन क्षेत्र के प्रकाश चौक से एक नाबालिग दलित युवती के अपहरण की सूचना पुलिस को मिली थी। पीड़ित पक्ष की तहरीर पर तत्काल गंभीर धाराओं और पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने विशेष निगरानी में जांच के लिए दस अलग-अलग टीमों का गठन किया।

पुलिस के अनुसार टीमों ने लगातार कई दिनों तक तकनीकी और मैनुअल सर्विलांस के माध्यम से काम किया। एक हजार से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, टोल प्लाजा रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की मदद से आरोपी की गतिविधियों का पता लगाया गया। जांच के दौरान सामने आया कि अपहरण की वारदात में एक ओरा कार का इस्तेमाल किया गया था, जिसके आधार पर पुलिस लगातार आरोपी की तलाश में जुटी रही।
सोमवार देर रात पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी अपनी कार के साथ शहर क्षेत्र में मौजूद है। सूचना मिलते ही सिविल लाइन पुलिस और एसओजी ने संयुक्त अभियान चलाया। रामपुर तिराहा और शहर के बीच कई स्थानों पर चेकिंग अभियान शुरू किया गया। इसी दौरान संदिग्ध ओरा कार दिखाई दी। पुलिस ने वाहन रोकने का प्रयास किया, लेकिन चालक ने कार को तेजी से मोड़कर बामनहेड़ी रेलवे स्टेशन रोड की ओर भगा दिया।
पुलिस टीम ने पीछा जारी रखा। कुछ दूरी पर आगे का रास्ता बाधित होने के कारण आरोपी ने कार छोड़ दी और पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। अधिकारियों के अनुसार आरोपी को कई बार आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी गई, लेकिन उसने लगातार पुलिस पर गोलियां चलाईं। इस दौरान दो पुलिसकर्मी घायल हो गए और सरकारी वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गया।
पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें सतपाल उर्फ सत्तू के दोनों पैरों में गोली लगी। घायल होने के बाद उसे मौके से गिरफ्तार कर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। मुठभेड़ में घायल पुलिसकर्मियों का उपचार भी कराया गया और वरिष्ठ अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर उनकी स्थिति का जायजा लिया।
मुठभेड़ स्थल से पुलिस ने एक पिस्टल, एक अवैध तमंचा, जिंदा और खोखा कारतूस, वारदात में प्रयुक्त ओरा कार, अपहृत युवती से संबंधित आभूषण, एक कूटरचित पहचान पत्र, मोबाइल फोन, पर्स और नकदी बरामद की है। बरामदगी को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार सतपाल उर्फ सत्तू मूल रूप से चंडीगढ़ का निवासी था और लंबे समय से संगठित अपराध की दुनिया में सक्रिय था। वह कई गंभीर मामलों में आरोपी रहा और उसके खिलाफ हत्या के प्रयास, रंगदारी, डकैती, गैंगस्टर एक्ट, अवैध हथियार, अपहरण तथा अन्य संगीन अपराधों से जुड़े लगभग तीस मुकदमे विभिन्न राज्यों में दर्ज थे। पुलिस का दावा है कि वह अंडरवर्ल्ड से भी जुड़ा रहा था और पूर्व में कई वर्षों तक जेल में रह चुका था।
बताया गया कि वह इसी वर्ष पंजाब से पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया था और उसके बाद अलग-अलग राज्यों में लगातार ठिकाने बदल रहा था। हाल के दिनों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में उसकी सक्रियता की सूचनाएं भी पुलिस को मिली थीं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नाबालिग युवती के अपहरण प्रकरण सहित उससे जुड़े अन्य मामलों की जांच जारी रहेगी। बरामद साक्ष्यों और उसके नेटवर्क से जुड़े लोगों की भी पहचान की जा रही है। वहीं इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली सिविल लाइन पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम की सराहना की जा रही है, जिसने लगातार प्रयास कर आरोपी तक पहुंचने में सफलता हासिल की।

