मुजफ्फरनगर। नगर पंचायत चरथावल में विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये के सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का मामला अब कानूनी शिकंजे तक पहुंच गया है। करीब आठ वर्ष पुराने इस प्रकरण में मेरठ सेक्टर विजिलेंस की जांच के बाद शासन के निर्देश पर तत्कालीन चेयरमैन, पूर्व अधिशासी अधिकारियों, अवर अभियंता और वर्तमान वरिष्ठ लिपिक समेत सात लोगों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। विजिलेंस जांच में करोड़ों रुपये के विकास बजट के कथित दुरुपयोग और नियमों की अनदेखी के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है।

जांच रिपोर्ट के अनुसार अनुसूचित जाति एवं जनजाति बहुल क्षेत्रों के विकास के लिए शासन द्वारा लगभग 3.56 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी। इस राशि का उपयोग दलित बस्तियों में मूलभूत सुविधाओं के विकास, सड़कों, नालियों और अन्य जनहित कार्यों पर किया जाना था। आरोप है कि निर्धारित उद्देश्य के विपरीत इस धनराशि को नगर पंचायत क्षेत्र से बाहर स्थित ग्राम पंचायत चरथावल देहात के खुसरोपुर मार्ग के निर्माण पर खर्च कर दिया गया। इससे उन क्षेत्रों के लोग विकास कार्यों से वंचित रह गए, जिनके लिए यह बजट विशेष रूप से स्वीकृत किया गया था।

विजिलेंस जांच में कान्हा पशु आश्रय स्थल के लिए स्वीकृत लगभग 1.81 करोड़ रुपये की धनराशि के उपयोग पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार गौशाला निर्माण कार्य को पूर्ण किए बिना शेष धनराशि का उपयोग नगर पंचायत कार्यालय भवन के प्रथम तल के निर्माण में कर लिया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कार्य निर्धारित मानकों और स्वीकृत योजना के विपरीत किया गया।
मामले में सोलर लाइट स्थापना कार्य भी जांच के घेरे में है। आरोप है कि इस कार्य के लिए नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया अपनाने के बजाय कोटेशन के आधार पर एक फर्म को कार्य आवंटित कर दिया गया। विजिलेंस जांच में इसे वित्तीय नियमों और पारदर्शिता संबंधी प्रक्रियाओं का उल्लंघन माना गया है।
इन्हीं तथ्यों के आधार पर तत्कालीन चेयरमैन बीना त्यागी, पूर्व ईओ वेदप्रकाश, अवर अभियंता कौशलवीर सिंह, वर्तमान वरिष्ठ लिपिक महेश प्रसाद समेत सात लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले में अन्य संबंधित व्यक्तियों और ठेकेदारों की भूमिका की भी जांच जारी है।
इस पूरे प्रकरण का एक भावनात्मक और महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि मामले को लगातार शासन, विजिलेंस और न्यायालयों तक पहुंचाने वाले पूर्व सभासद बिजेन्द्र त्यागी का कुछ माह पूर्व निधन हो चुका है। वहीं, मामले से जुड़े तत्कालीन अधिशासी अधिकारी रमेश चंद सहगल का भी देहांत हो चुका है। बावजूद इसके, वर्षों तक चली जांच के बाद अब कार्रवाई के चरण में पहुंचा यह मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है।
वर्तमान नामित सभासद प्रशांत त्यागी ने मांग की है कि केवल मुकदमा दर्ज कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस अवधि में हुए सभी विकास कार्यों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच भी कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि गहन जांच कराई जाए तो विकास योजनाओं में हुए कई अन्य अनियमितताओं के मामले भी सामने आ सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार विजिलेंस ने वर्ष 2018 से 2022 के बीच नगर पंचायत में कराए गए विभिन्न विकास कार्यों से संबंधित फाइलें और दस्तावेज तलब कर लिए हैं। आरोपियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं तथा वित्तीय लेन-देन और निर्माण कार्यों से जुड़े अभिलेखों की बारीकी से जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां दस्तावेजी साक्ष्यों को मजबूत करने में जुटी हैं और आने वाले समय में मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
विजिलेंस विभाग का कहना है कि सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और सरकारी धन की वसूली के लिए भी नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
चरथावल में सामने आए इस बहुचर्चित प्रकरण ने एक बार फिर स्थानीय निकायों में विकास कार्यों की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पूरे मामले पर प्रशासन, राजनीतिक दलों और आम जनता की निगाहें टिकी हुई हैं।

