लखनऊ। समाजवादी पार्टी में टूट को लेकर ओमप्रकाश राजभर के दावे से उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के नेता इस टूट से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने राजभर के बयान पर जवाब देते हुए कहा है कि अगर कोई पागल हो जाए तो उसकी दवा नहीं है।

समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने राजभर के दावों पर कहा, “अगर कोई पागल हो जाए तो उसकी दवा नहीं है। अगर पागल की दवा किसी के पास है तो वह जनता के पास है। पागलपन की बात कोई करता है तो उसके लिए न कोई लगाम है और न कोई इलाज है।” सपा सांसद नीरज कुशवाहा मौर्य ने अपने जवाब में कहा कि ओमप्रकाश राजभर को अपने भविष्य की चिंता है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि ओम प्रकाश राजभर, जो पहले समाजवादी पार्टी से चुने गए थे, अब अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित हैं। आने वाले समय में, जिस सीट से वे अभी विधायक हैं, वहां उन्हें बड़ी हार का सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए वे ऐसे बेबुनियाद बयान दे रहे हैं।” नीरज कुशवाहा ने कहा कि उन्होंने पत्र को लेकर दावा किया है।

उस पत्र को भी सोशल मीडिया पर शेयर करना चाहिए था। सपा सांसद ने कहा, “इन सभी बातों को कोई मतलब नहीं है। ये (राजभर) लोग अपने भविष्य की चिंता में लगे हैं। मेरा मानना यह भी है कि इन लोगों को कोई गंभीरता से भी नहीं लेता है।” वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा, “हर सुबह ओपी राजभर ट्वीट करते हैं और शाम को केशव प्रसाद मौर्य ट्वीट करते हैं। आप इसके पीछे की रणनीति समझ सकते हैं। भाजपा ने ‘पीडीए’ की काट के लिए पीडीए समुदाय के नेताओं को आगे किया है। पहले राजभर, फिर मौर्य और जल्द ही निषाद सामने आ सकते हैं और उसके बाद अनुप्रिया पटेल। हालांकि, भाजपा का कोई ठाकुर, ब्राह्मण या ऊंची जाति का नेता ऐसे बयान नहीं देगा, क्योंकि वे जानते हैं कि पिछड़ों को पिछड़ों से लड़ाओ और राज करो।”
आशुतोष वर्मा ने आगे कहा, “37 सांसदों को तोड़ने के लिए दो-तिहाई बहुमत (25 सांसद) चाहिए होते हैं।” केशव प्रसाद मौर्य के दावों पर उन्होंने कहा, “आप खुद वरिष्ठ नेता होते हुए मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल नहीं कर पाए और मंत्री बनकर रह गए। तब भी हम आपकी बहुत इज्जत करते हैं। आप हमारे पीडीए परिवार के सदस्य हैं और आप भाजपा की चालों में न आएं।” सुपा में टूट पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा, “दारा सिंह चौहान, धर्मसिंह सैनी, स्वामी प्रसाद मौर्य और ओमप्रकाश राजभर आपके (भाजपा) कैबिनेट मंत्री थे। 15 और विधायक 2022 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सरकार रहते हुए समाजवादी पार्टी में आए थे। हमने सभी का स्वागत किया था। आपके (भाजपा) कम से कम 50 विधायक समाजवादी पार्टी के संपर्क में हैं, उन्हें बचाएं। समाजवादी पार्टी सभी का स्वागत करती है।”

