लड्डू गोपाल जी थाने में ‘बंद’… चोर आजाद, जन्माष्टमी पर मंदिर सूना!

जयपुर। नांगल जैसा बोहरा स्थित गोपाल जी का मंदिर में तीन महीने पहले लड्डू गोपालजी और गोपियों की दो मूर्तियां चोरी हो गई थी। पुलिस ने दो चोरों को पकड़ मूर्तियां बरामद कर ली। अब मूर्तियां तो मालखाने में बंद है और चोर जमानत के बाद से आजाद घूम रहे हैं। स्थानीय श्रद्धालु इस बात से आहत है कि जन्माष्टमी नजदीक है और लड्डू गोपाल के ‘आजाद’ होने के आसार नहीं हैं। नतीजा, 200 वर्ष पुराने इस मंदिर में हर जन्माष्टमी पर होने वाले आयोजन की परम्परा इस बाद टूट जाएगी। क्योंकि, जब मंदिर में भगवान ही विराजमान नहीं तो कैसे करेंगे पूजन।

28 मई 2022 की शाम को मंदिर के पुजारी जितेंद्र शर्मा नित्य-पूजा करने मंदिर पहुंचे तो लड्डू गोपाल और उनके साथ दो गोपियों की मूर्ति अपने स्थान से गायब दिखी। चोरी की रिपोर्ट लेकर जितेंद्र करधनी थाने पहुंचे तो पुलिसवालों ने एफआइआर दर्ज करने से बचने के बहाने बनाए। हालांकि, जनभावना को देखते हुए मूर्ति की तलाश जरूर शुरू कर दी। खैर, एफआइआर तीन जून 22 को तब दर्ज हुई, जब चोरी के आरोप में हरियाणा निवासी गोपाल कुमार और यूपी निवासी असलम हुसैन पुलिस के हत्थे चढ़ गए और मूर्तियां बरामद कर ली।

पुजारी ने बताया कि उन्होंने मूर्तियों की सुपुर्दगी के लिए अदालत से दरख्वास की। अदालत ने आदेश दिया कि अभी नतीजा पेश नहीं हुआ। विचारण के दौरान मूर्तियों की जरूरत होगी। लिहाजा उन्हें छोड़ना न्यायोचित नहीं होगा। बात की तो मालूम चला कि सितंबर से पहले कोई रास्ता निकलना संभव नहीं है।

यह अजीब संयोग है कि मंदिर से लड्डू गोपाल की मूर्ति चुराने वाले का नाम गोपाल ही है। स्थानीय लोगों ने बताया कि जमानत पर छूटने के बाद गोपाल ने मंदिर में आकर माफी भी मांगी। गोपाल और असलम ने लड्डू गोपाल की एक आंख निकाल ली। धातु का परीक्षण कराने के लिए गोपियों के पैर तक काट डाले।

पुजारी ने बताया कि कृष्ण जन्मोत्सव पर पूरा गांव आयोजन का हिस्सा बनता था। तरह-तरह की लीलाएं होती थी। मंदिर में पैर रखने की जगह भी नहीं होती थी। स्थानीय निवासी देवेंद्र शर्मा बताते हैं कि बचपन से लड्डू गोपाल की पूजा रोजाना होते देखी है। ऐसे में इतने सालों बाद जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल का न होना अखरेगा।

बरामदगी के बाद पुजारी और स्थानीय श्रद्धालुओं बहुत खुश हुए कि अब लड्डू गोपाल गोपियों के साथ फिर से मंदिर में विराजेंगे। लेकिन, यह सोचना दुस्वप्न जैसा ही साबित हुआ। पुलिस-अदालत के कुछ दिनों तक चक्कर लगाते ही पता चल गया कि कलयुग में लड्डू गोपालजी भी कानून से ऊपर नहीं हैं। इधर, दोनों आरोपी कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए नौ जून 22 को जमानत पर जेल से ’आजाद’ हो गए।

मैं तो चाहता हूं कि लड्डू गोपाल की मूर्ति जन्माष्टमी से पहले मंदिर पहुंच जाए। लेकिन, न्यायालय के आदेशों के कारण मेरे हाथ बंधे हुए हैं। सारा काम कानून के तहत ही करना संभव है।

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