कुशीनगर में हादसे के बाद बवाल: वायरल वीडियो से पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
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कुशीनगर में हादसे के बाद बवाल: वायरल वीडियो से पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

कुशीनगर। उत्तर प्रदेश में कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के जंगल पचरुखिया गांव में एक सड़क हादसे के बाद शुरू हुआ विवाद अब पुलिस और ग्रामीणों के बीच टकराव का रूप ले चुका है। मामले से जुड़े दो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।

ग्रामीणों के अनुसार 22 मई को मोरंग लदे एक ट्रक ने सड़क किनारे खड़े संदीप मद्धेशिया को कुचल दिया था। हादसे में संदीप गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिन्हें उपचार के लिए गोरखपुर भेजा गया था। करीब दस दिन तक चले इलाज के बाद एक जून को उनकी मौत हो गई। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने ट्रक को रोक लिया और उस पर पथराव किया। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने ट्रक को अपने कब्जे में लेकर थाना परिसर में खड़ा करा दिया था।

घटना के बाद अब दो वीडियो सामने आए हैं। पहले वीडियो में गांव पहुंचे पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति दिखाई दे रही है। वीडियो में कुछ लोग पुलिस पर महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार और अपशब्दों के प्रयोग का आरोप लगाते सुनाई दे रहे हैं।

दूसरे वीडियो को लेकर ग्रामीणों ने और गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि वीडियो में वही ट्रक दिखाई दे रहा है जो हादसे के बाद पुलिस अभिरक्षा में था। वीडियो में कुछ लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से ट्रक से मोरंग उतारते नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बाद में इस मोरंग को निजी स्तर पर बेच दिया गया। हालांकि इस आरोप की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस ने मामले में दो लोगों को शांति भंग की आशंका के तहत धारा 151 के अंतर्गत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद गांव में नाराजगी बढ़ गई। आरोप है कि पुलिस गांव पहुंचकर कुछ लोगों को हिरासत में लेने लगी, जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

कुबेरस्थान थानाध्यक्ष हर्षवर्धन सिंह ने पुलिस और ग्रामीणों के बीच विवाद होने की पुष्टि की है। हालांकि उन्होंने जब्त ट्रक से मोरंग उतरवाने और उसके कथित निस्तारण संबंधी आरोपों की जानकारी होने से इनकार किया। उनका कहना है कि मामले से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।

कई सवालों के जवाब बाकी

पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि ट्रक पुलिस अभिरक्षा में था तो उससे मोरंग किसके निर्देश पर उतरवाई गई? क्या जब्त वाहन और उसमें मौजूद सामग्री का विधिवत रिकॉर्ड तैयार किया गया था? पथराव की घटना में क्या कार्रवाई हुई और पुलिस तथा ग्रामीणों के बीच विवाद की स्थिति आखिर क्यों बनी,फिलहाल इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे। लेकिन वायरल वीडियो और ग्रामीणों के आरोपों ने कुबेरस्थान पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर क्षेत्र में नई चर्चा और बहस जरूर छेड़ दी है।

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