नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने जिमखाना क्लब को केंद्र सरकार की ओर से परिसर खाली करने के नोटिस के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार के नोटिस पर कोई भी अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। जस्टिस अवनीश झींगन की बेंच ने केंद्र सरकार की इस सूचना पर गौर किया कि खाली करने की कोई भी कार्रवाई नोटिस जारी करने के बाद ही की जाएगी।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जिमखाना क्लब को खाली करने की किसी भी कार्रवाई के पहले कानून के मुताबिक नोटिस जारी किया जाएगा। ये कहना सही नहीं है कि जिमखाना क्लब का प्रबंधन सरकार अपने हाथों में ले रही है। उसके बाद कोर्ट ने कहा कि ऐसे में केंद्र के नोटिस पर रोक लगाने का कोई मतलब नहीं है।

आज ही दिल्ली जिमखाना क्लब का आंतरिक विवाद भी उच्च न्यायालय में उठाया गया। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल क्लब की चुनी हुई कमेटी की ओर से कोर्ट में पेश हुए। जिमखाना क्लब में प्रबंधन और सदस्यों के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही है। दिल्ली जिमखाना क्लब ने केंद्र सरकार की ओर से परिसर खाली करने के नोटिस के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने जिमखाना क्लब को नोटिस जारी कर उसके 27.3 एकड़ में फैले परिसर को 5 जून तक खाली करने का आदेश दिया है। याचिका दिल्ली जिमखाना क्लब के विजय खुराना ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि 22 मई को भूमि और विकास कार्यालय ने जिमखाना क्लब का परिसर खाली करने का आदेश दिया।
केंद्र सरकार ने कहा है कि जिमखाना क्लब प्रधानमंत्री आवास और दूसरे महत्वपूर्ण सुरक्षा ठिकानों के पास है। केंद्र सरकार ने कहा है कि रक्षा और दूसरे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने के लिए जिमखाना क्लब की भूमि की जरूरत है।

