ऑफ द रिकॉर्डः दिल्ली-चंडीगढ़-अमृतसर बुलेट ट्रेन परियोजना के सर्वेक्षण के आदेश

नई दिल्ली। सरकार ने दिल्ली-चंडीगढ़-अमृतसर बुलेट ट्रेन परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डी.पी.आर.) और सर्वे तैयार करने के आदेश दिए हैं। सर्वे का काम पहले से ही चल रहा है। इसके अलावा, रेल मंत्रालय ने अन्य राज्यों में भी 6 और बुलेट ट्रेन परियोजनाओं के लिए सर्वेक्षण कार्य के आदेश दिए हैं।

मंत्रालय ने पहली अहमदाबाद-मुम्बई बुलेट ट्रेन परियोजना की तर्ज पर 7 और हाई स्पीड रेल (एच.एस.आर.) कॉरिडोर की पहचान की है, जिसे सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने लॉन्च किया था। दिल्ली-चंडीगढ़-अमृतसर परियोजना के अलावा, मुम्बई-नागपुर, मुम्बई-हैदराबाद, दिल्ली-वाराणसी, दिल्ली-अहमदाबाद, चेन्नई-बेंगलुरु-मैसूर और वाराणसी-हावड़ा के लिए भी सर्वेक्षण कार्य का आदेश दिया गया है।

हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि इनमें से किसी भी गलियारे को अभी तक मंजूरी नहीं दी गई है और सर्वेक्षण कार्य पूरा होने और डी.पी.आर., तकनीकी-आर्थिक व्यवहार्यता अध्ययन आदि के परिणाम के बाद निर्णय लिया जा सकता है। वर्तमान में, केवल एक हाई स्पीड रेल अहमदाबाद-मुम्बई के बीच 320-350 कि.मी. प्रति घंटे की डिजाइन गति वाली परियोजना कार्यान्वयन के अधीन है। रेल मंत्री, अश्विनी वैष्णव ने कुछ दिन पहले लोकसभा में श्रीकांत एकनाथ  शिंदे और अन्य को बताया कि सरकार पहले से ही दो सैमी-हाई स्पीड (एस.एच.एस.) ट्रेनें चला रही है और ऐसी 100 से अधिक ट्रेनों को एकीकृत कोच फैक्ट्री में निर्मित करने की योजना है।

इस बीच, अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना अभी भी भूमि अधिग्रहण बाधाओं से जूझ रही है। सरकार ने कहा, ‘मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (एम.ए.एच. एस.आर.) परियोजना के लिए आवश्यक कुल 1396 हैक्टेयर भूमि में से लगभग 90 प्रतिशत भूमि (1264 हैक्टेयर) का अधिग्रहण किया जा चुका है।’ जाहिर है, (एम.ए.एच.आर.एस.) को महाराष्ट्र में शेष भूमि का अधिग्रहण करना मुश्किल हो रहा है क्योंकि ग्रामीण अभी भी कुछ हिस्सों में विरोध कर रहे हैं। हालांकि, व्यवस्था में बदलाव के साथ इस बात की प्रबल संभावना है कि इस प्रक्रिया में तेजी आएगी।

 

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