मेरठ। अवैध हिरासत में लेकर 20 लाख मांगने वाले दो सिपाही पंकज और राजू शर्मा चोरी के मामले में निलंबित हो गए हैं। वहीं, एसओजी प्रभारी अखिलेश गौड़ पर भी गाज गिर गई है। अधिकारियों ने इन पुलिसकर्मियों पर अवैध हिरासत के मामले में कार्रवाई करने की बजाय दूसरे मामलों में संलिप्तता पाए जाने पर कार्रवाई की है।

टीपीनगर थाना क्षेत्र के शिवपुरम निवासी रमेश चंद और उसके दामाद सूरज को 17 जुलाई को एसओजी की टीम उठाकर ले गई थी। रमेशचंद के परिजनों ने अपहरण, मारपीट और घर में तोड़फोड़ का आरोप लगाते हुए अज्ञात के खिलाफ टीपीनगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। पोल खुलते ही एसओजी ने ससुर-दामाद को बावरिया गैंग के सदस्य बताकर फलावदा थाने में 24 घंटे बाद चाकू की बरामदगी में गिरफ्तारी दिखा दी।

मामला लखनऊ तक गूंजने पर डीजीपी ने मेरठ पुलिस से जवाब तलब किया। एसएसपी ने एसओजी के दो सिपाही पंकज और राजू शर्मा को परतापुर क्षेत्र में होटल में कैसिनो खेलते पकड़े गए लोगों के लैपटॉप, टैबलेट व मोबाइल चोरी के मामले में शनिवार रात सस्पेंड कर दिया। उक्त दोनों सिपाही ससुर व दामाद को अवैध हिरासत में रखने के मामले में शामिल थे। एसओजी प्रभारी को भी रविवार को एसएसपी ने हटा दिया।
एसओजी की पूरी टीम पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है। टीपी नगर व फलावदा थाने में दर्ज मुकदमे की पूरी कहानी एसओजी टीम की पोल खोल रही है। इसके बावजूद पुलिस अधिकारी इन्हें बचाने में लगे हैं। वसूली को छोड़कर दूसरे मामलों में दो सिपाही और एसओजी प्रभारी पर कार्रवाई कर अधिकारी अन्य पुलिसकर्मियों को बचा रहे हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि एसओजी की टीम में दो फाड़ है। उनमें से एक फाड़ को बचाया जा रहा है।