अर्थशास्त्री डॉ. केट ने खाद्य पदार्थों पर जीएसटी को लेकर केन्द्र की आलोचना की

औरंगाबाद। जानेमाने अर्थशास्त्री एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. डी एस केट ने खाद्यान्न, डेयरी उत्पादों, फ्लोर प्रॉडक्ट और कई खाद्य प्रसंस्कृत उत्पादों पर जीएसटी लगाने के लिए केन्द्र की बुधबार को आलोचना करते हुए कहा कि यह लोगों , खासकर गरीबों के अस्तित्व के लिए आवश्यक चीजें हैं और यह ऐसे समय में लगाया गया है जब दुनिया भर में भयंकर मुद्रास्फीति है।
डॉ. केट ने ‘यूनीवार्ता’ से कहा,“ खाद्य पदार्थों पर जीएसटी ऐसे समय में लगाया गया है जब कोरोना के बाद के दौर में दुनिया भर में व्यापक मुद्रास्फीति है। अमेरिका में महंगाई 40 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। ऐसी विकट वित्तीय स्थिति में जीएसटी बढ़ाने के लिए सुविधाजनक निर्णय लेना संभव नहीं लगता। यह अर्थशास्त्र का एक नियम है कि उच्च अप्रत्यक्ष करों वाले देश का पतन निश्चित है। अप्रैल देश में 1.67 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी टैक्स जमा हुआ। जीएसटी संग्रह दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है।”
उन्होंने कहा,“ जीएसटी से सरकार को काफी आमदनी होती है लेकिन फिर जीएसटी का दायरा बढ़ाने की बजाय सरकारी खर्च को कम करने के बारे में क्यों नहीं सोचा जा रहा है?
एक बात तय है कि यहां से खाद्य पदार्थों और अन्य सभी आवश्यक वस्तुओं पर भी जीएसटी लागू होने जा रहा है।यह बात तो सामने है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक सामग्री और कपड़े पर पहले से ही जीएसटी की तरह अप्रत्यक्ष रूप से कर लगाया जाता है।”
डॉ.केट ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर कई किताबें लिखी हैं। उन्हें विभिन्न संगठनों ने सम्मानित किया है।

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