नूपुर शर्मा की याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट, निलंबित भाजपा नेता ने कहा- जान का खतरा बढ़ा!

नूपुर शर्मा पैगंबर विवाद: सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को निलंबित भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा की एक याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें गिरफ्तारी से सुरक्षा के साथ-साथ उनकी वापस ली गई याचिका को फिर से शुरू करने का आग्रह किया गया था। इसके अलावा नुपुर ने मांग की थी कि उनके खिलाफ पूरे देश में अलग-अलग जगहों पर जो शिकायतें दर्ज की गयी हैं उसे एक जगह पर क्लब कर दिया जाए। हालात को देखते हुए उनकी जान को काफी खतरा हैं इस लिए वह एक अलग-अलग जगह की यात्रा नहीं कर सकती हैं।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया और अपनी वापस ली गई याचिका को बहाल करने का आग्रह किया। नुपुर शर्मा ने टीवी पर प्रसारित एक कार्यक्रम के दौरान पैगंबर मोहम्मद पर की गई उनकी आपत्तिजनक टिप्पणी के संबंध में दर्ज अलग-अलग प्राथमिकियों को एक साथ जोड़ने के आग्रह वाली याचिका को शीर्ष अदालत से पुन: बहाल करने का अनुरोध किया है।

शर्मा ने पैगंबर मोहम्मद पर की गई उनकी टिप्पणी के संबंध दर्ज अलग-अलग प्राथमिकियों को एक साथ जोड़ने के आग्रह वाली याचिका पर एक जुलाई को सुनवाई के दौरान अवकाशकालीन पीठ की ओर से की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने की भी गुजारिश की।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला की पीठ ने पैगंबर मोहम्मद खिलाफ टिप्पणी को लेकर कई राज्यों में दर्ज प्राथमिकियों को एक साथ मिलाने की शर्मा की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड की गयी जानकारी के अनुसार वही पीठ नुपुर शर्मा की नयी याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करेगी।

शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड की गयी कार्यालय रिपोर्ट की जानकारी के मुताबिक इस संबंध में नुपुर शर्मा की रिट याचिका न्यायालय की ओर से एक जुलाई 2022 को खारिज कर दी गयी थी।याचिकाकर्ता नुपुर शर्मा की ओर से अधिवक्ता रचिता राय ने नौ जुलाई को एक याचिका दायर कर आदेश के स्पष्टीकरण की मांग की है। इसके अलावा नोटरीकृत हलफनामा दाखिल करने से छूट के लिए आवेदन के साथ उचित निर्देश जारी करने की भी मांग की गयी है। शीर्ष अदालत ने पैगंबर के खिलाफ शर्मा की विवादित टिप्पणियों के लिए उन्हें आड़े हाथों लिया था और कहा था कि उनकी ‘बेलगाम जुबान’ ने ‘पूरे देश को आग में झोंक दिया और देश में जो भी हो रहा है, उसके लिए वह ‘अकेले’ जिम्मेदार हैं।

अदालत ने कहा था, “ उनका अपनी जुबान पर काबू नहीं है और टीवी पर गैर जिम्मेदाराना बयान दिए और पूरे देश को आग में झोंक दिया। फिर भी वह 10 साल से वकील होने का दावा करती हैं…उन्हें अपनी टिप्पणियों के लिए पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए।” नुपुर शर्मा ने अपनी याचिका में केंद्रीय गृह मंत्रालय, दिल्ली, महाराष्ट्र, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और असम को पक्षकार बनाया है।

टिप्पणी के लिए विभिन्न राज्यों में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को जोड़ने के लिए शर्मा की याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए, पीठ ने कहा था कि टिप्पणी या तो सस्ते प्रचार, राजनीतिक एजेंडे या कुछ नापाक गतिविधियों के लिए की गई थी।

एक टीवी डिबेट के दौरान पैगंबर पर शर्मा की टिप्पणी का देश भर में विरोध शुरू हो गया था और कई खाड़ी देशों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। बाद में भाजपा ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया।

पीठ ने कहा था “ये टिप्पणियां बहुत परेशान करने वाली और अहंकार की बू आती हैं। इस तरह की टिप्पणी करने का उनका क्या काम है? इन टिप्पणियों से देश में दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुई हैं … ये लोग धार्मिक नहीं हैं। वे अन्य धर्मों के लिए सम्मान नहीं रखते हैं। ये टिप्पणियां सस्ते प्रचार या राजनीतिक एजेंडे या कुछ अन्य नापाक गतिविधियों के लिए बनाए गए थे।

प्राथमिकी को क्लब करने की शर्मा की याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए पीठ ने उन्हें याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी थी। निलंबित भाजपा नेता के खिलाफ अदालत की टिप्पणी उदयपुर में दो लोगों द्वारा एक दर्जी की नृशंस हत्या की पृष्ठभूमि में आई थी, जिन्होंने ऑनलाइन वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें दावा किया गया था कि वे इस्लाम के अपमान का बदला ले रहे थे।

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