शराब के शौकीनों को लगा जोर का झटका

अमृतसर। पंजाब सरकार की ओर से जब से एक्साइज पॉलिसी में बदलाव किया है तब से शराब के ठेकेदारों ने इसका विरोध तो किया था, वहीं शराब के रेटों में 50 प्रतिशत से भी कम दरों में शराब को बेचा, जिसको लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा रही।

लेकिन 1 जुलाई से फिर से शराब के रेटों में बढ़ौतरी हुई है। पंजाब में अभी एक जैसा रेट नहीं है। अमृतसर में शराब के ठेकों के बाहर लगी रेट लिस् के मुताबिक रेट काफी बढ़ गए हैं जिससे शराब पीने के शौकीनों में काफी मायूसी आई है। जो बोतल 300 की मिलने लगी थी वह अब 600 रुपए की हुई पिछले दिनों सरकार जब नई पॉलिसी लाई तो शराब के ठेकेदारों ने हर बोतल की दरें कम कर दी थीं। जो बोतल लोगों को 300 रुपए में मिल रही थी आज उसके दाम 600 रुपए कर दिए हैं। वहीं बीयर की बोतल 100 रुपए में बिकी जो आज फिर से 200 रुपए पहुंच गई है। अब पहली पॉलिसी रेट के मुकाबले अब प्रति बोतल 100 रुपए रेट का फर्क है।

जब सरकार द्वारा पंजाब में नई पॉलिसी लाई गई तो कई ठेकेदारों ने एकजुटता दिखाकर इसका विरोध किया था, वहीं यह मामला होईकोर्ट भी पहुंचा। लेकिन जिस तरह कई बड़े ठेकेदारों ने ग्रुप लिए हैं कई छोटे शराब के ठेकेदार इससे किनारा कर गए हैं। पंजाब में जिस तरह गत कुछ दिन पहले शराब सस्ती हुई तो सरकार को कई राजनीतिक पाॢटयों ने आड़े हाथों लिया था। उन्होंने कहा था कि पंजाब में सरकार जिन मुद्दों को लेकर आई थी उनको लेकर कुछ नहीं किया है बल्कि शराब सस्ती कर दी है। तब नेताओं ने कहा था कि पहले एजुकेशन और सेहत को लेकर कुछ करना चाहिए था। वहीं सोशल मीडिया पर भी लोगों ने काफी ट्रोल किया था। शराब के शौकीनों को नई एक्साइज पॉलिसी आने के बाद 1 जुलाई से शराब सस्ती मिलने की उम्मीद थी। लेकिन ठेकों के बाहर लगी रेट लिस्टों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। आज शराब के रेट पहले से सिर्फ 100 रुपए बोतल कम हैं। हालांकि पिछले दिनों सस्ती हुई शराब को लेकर कई लोगों ने तो अपना स्टॉक इक_ा कर लिया, लेकिन जिन लोगों ने सस्ती होने के चक्कर में नहीं खरीदी वे पछता रहे हैं। पंजाब में सरकार नई पॉलिसी के तहत किस तरह काम करती है यह आगामी समय में तय होगा।

पहले पंजाब में जो बोतल शराब के ठेके से 700 रुपए की मिलती थी वह बाहर से दो नंबर की 500 रुपए में मिल जाती थी। पंजाब में कई लोग बाहरी रा’यों से सस्ती शराब लाकर यहां बेचते थे। लेकिन जब पंजाब में शराब सस्ती हुई तो दो नंबर की शराब बिल्कुल बंद हो गई थी। जो लोग भट्ठियों से देसी शराब बनाकर बेचते थे वह भी बंद होने से शराब की कालाबाजारी बंद हो गई थी। वहीं जिस तरह शराब के ठेकेदारों ने आधे से भी कम रेट कर दिए थे तो लोगों ने यह बात भी रखी थी कि जो ठेकेदार आधे से भी कम रेटों में शराब बेच रहे हैं वे उसमें भी कमा रहे होंगे।

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