वरुण गांधी ने बतौर सांसद पेंशन छोड़ने की पेशकश की, कहा- अग्निवीर हकदार नहीं तो जनप्रतिनिधियों को क्यों?

भाजपा सांसद वरुण गांधी ने अनुबंध के आधार पर सशस्त्र रक्षा कर्मियों की भर्ती के लिए सरकार की नई ‘अग्निपथ’ योजना को लेकर शुक्रवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा। गांधी ने अग्निवीरों को पेंशन का प्रावधान नहीं करने की सरकार की योजना पर सवाल उठाया। बीजेपी सांसद ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा, “अल्पावधि की सेवा करने वाले अग्निवीर पेंशन के हकदार नही हैं तो जनप्रतिनिधियों को यह ‘सहूलियत’ क्यूँ? राष्ट्ररक्षकों को पेन्शन का अधिकार नही है तो मैं भी खुद की पेन्शन छोड़ने को तैयार हूँ। क्या हम विधायक/सांसद अपनी पेन्शन छोड़ यह नही सुनिश्चित कर सकते कि अग्निवीरों को पेंशन मिले?

विभिन्न मुद्दों पर अक्सर पार्टी से अलग राय रखने वाले पीलीभीत के सांसद वरुण गांधी ने इससे पहले अग्निपथ प्रदर्शनकारियों को “जिहादी” कहने के लिए अपनी पार्टी के विधायक पर निशाना साधते हुए कहा था कि देश के युवा सेना में सेवा के लिए अपनी “हड्डियां गला देते हैं”, तब कहीं जाकर उन्हें सेना में नौकरी मिलती है। साथ ही उन्होंने कहा किशांतिपूर्ण प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है। गांधी ने सांसदों द्वारा सभी को एक ही तराज़ू में तौलने पर आपत्ति जताई और सेना में शामिल होने वाले युवाओं और इस प्रक्रिया में उनके द्वारा किए गए प्रयासों की प्रशंसा की थी।

बता दें कि केंद्र ने 14 जून को भारतीय युवाओं के लिए सशस्त्र बलों में सेवा करने के लिए एक नई अल्पकालिक भर्ती नीति का ऐलान किया। अग्निपथ नामक यह योजना 17.5 से 21 वर्ष की आयु के युवाओं को चार साल की अवधि के लिए तीन सेवाओं में से किसी एक को ‘अग्निपथ’ के रूप में शामिल करने में सक्षम बनाएगी। प्रत्येक बैच में 25 प्रतिशत अग्निशामकों को सशस्त्र बलों में स्थायी संवर्ग के लिए चुना जाएगा और शेष 75 प्रतिशत को बिना किसी ग्रेच्युटी या पेंशन लाभ के ड्यूटी से मुक्त किया जाएगा।

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