नयी दिल्ली। बंगलादेश की जानी-मानी चित्रकार रुकैया सुल्ताना ने पेंटिंग को अपना कैरियर बनाने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा है कि उन्हें किसी की नकल करने की जरूरत नहीं है और वे दुनिया को जिस तरह से समझते हैं, उसी तरह की पेंटिंग बनायें।
उन्होंने कहा,“ आज की पीढ़ी बहुत समझदार और प्रतिभावान है। इसे किसी और की पेंटिंग की नकल करने की ज़रूरत नहीं। आज का युवा अपने जीवन के अनुभव से पेंटिंग बनाये। वह चीजों को जिस तरह देखता है, दुनिया को जिस तरह समझता है, उसी तरह पेंटिंग बनाये। ऐसा करने से वे जरूर कामयाब होंगे।”
रुकैया ने कहा, “ मैं अब तक हजार से ज्यादा पेंटिंग बना चुकी हूं। मैं अपने डर की वजह से पेंटिंग बनाने में ही समय व्यतीत करती थी। मैं काम से वापस आकर पेंटिंग बनाया करती थी। उम्र के एक पड़ाव में पहुंचने के बाद मुझे कुछ खालीपन महसूस हुआ, इसलिये अपनी पहचान ढूंढने के लिये पेंटिग बनाती हूं। दूसरा कारण है कि मैं अपने डर से छुटकारा पाने के लिये लिखती हूं। मेरे अंदर कुछ डर है, मेरे अंदर एक असुरक्षा का भाव है। मुझे नहीं पता यह क्या है। मैं पेंट करती हूं, ताकि इससे दूर रह सकूं। ”
सुल्ताना ने कहा कि सभी होनहार और उभरते पेंटर को अपने ऊपर भरोसा करके इस क्षेत्र की ओर निरंतर प्रयास करना होगा। आधुनिक युग में उनके पास तकनीक का सहारा है जिससे वे सहायता ले सकते हैं, लेकिन सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। उन्हें लगातार सीखते रहना होगा।
सुल्ताना ने कहा कि अपनी पुस्तक ‘रुकैया सुल्ताना’ में अपने 40 वर्षों के काम को इस तरह से संजोकर रखा है, जो युगों-युगों तक भावी पीढ़ियों के मानसिक पटल पर छाप छोड़ते रहेंगे। उन्होंने 1978 में पेंटिंग शुरू की थी। कला क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं को करीब से छूने वाली चित्रकार श्रीमती सुल्ताना को ‘मैडोना एंड चाइल्ड’ नामक पेंटिग ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि दिलाई। इसने उन्हें हिमालय की चोटी पर लाकर खड़ा किया जहां से अब वह पूरी दुनिया को अपनी कलाकारी से चित्रकार में समेटने को तैयार हैं। ‘मैडोना इन ए बस’ के लिए उन्हें 1992 में भारत भवन अंतरराष्ट्रीय प्रिंट द्विवार्षिक ग्रैंड प्राइज प्रदान किया गया था। उन्हें 90 के दशक में उनका काम ज्यादातर एक्वाटिंट, लिथोग्राफ, ड्राई पॉइंट और सॉफ्ट ग्राउंड में किया गया था। ‘मैडोना एंड चाइल्ड’ नामक चित्रों और प्रिंटों की उनकी पिछली श्रृंखला उनके मातृत्व भाव को दर्शाती है।
उन्होंने भारत और बंगलादेश के रिश्ते की चर्चा करते हुए यूनीवार्ता से कहा कि दोनों देशाें की कला-संस्कृति में ज्यादा अंतर नहीं है। अगर वह खान-पान की बात करें तो दोनों में लगभग समानता है। उन्होंने कहा कि वह सभी धर्मों को एक नजरिए से देखती हैं, क्योंकि सभी की अपनी-अपनी जगह अहमियत है, इसलिए सभी की इज्जत करना हमारा फर्ज है।
सुल्ताना इस साल 2022 में दिल्ली ललित कला अकादमी में अपनी प्रदर्शनी के जरिए कला क्षेत्र सहित अन्य क्षेत्रों से जुड़े भावी पीढ़ियों के बीच लोकप्रिय हो रही हैं। यहां उनकी सात से 26 जून तक प्रदर्शनी लगायी गयी हैं, जिसको देखने देश के अलग-अलग क्षेत्रों से यहां पहुंच रहे हैं।
सुल्ताना की यहां पेंटिंग प्रदर्शनी शुरू होने के मौके पर उनकी पुस्तक ‘रुकैया सुल्ताना’ का विमोचन विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने किया।

