
देहरादून। उत्तराखण्ड में पांचवीं विधानसभा के चुनाव में मिली करारी हार के बाद प्रदेश कांग्रेस में नये अध्यक्ष और विधायक दल के नेता की नियुक्ति से उत्तराखंड कांग्रेस में फिर घमासान मच गया है और पार्टी में गुटीय राजनीति खुलकर सामने आ गई है।
कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस सोनिया गांधी ने उत्तराखंड के साथ ही विधानसभा चुनाव में हारने वाले सभी पांच राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों को पद छोड़ने के लिए कहा था। श्रीमती गांधी के इस आदेश के 23 दिन बाद कल देर रात पार्टी ने करण माहरा को प्रदेश अध्यक्ष और यशपाल आर्य को विधायक दल का नेता नियुक्त किया है। इन नियुक्तियों के बाद प्रदेश कांग्रेस में तीखे आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरु हो गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के घुर विरोधी पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तथा पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह के समर्थकों ने खुलकर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को चुनौती देनी शुरू कर दी है और पार्टी के हार कारणों की जांच की मांग कर रहे हैं। असंतुष्ट नेताओं का स्पष्ट आरोप है कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पार्टी को कमजोर करने में अहम भूमिका निभाई है।
प्रतीम तो संगठन में इस फेरबदल से इतने नाराज हैं कि वह नये अध्यक्ष की घोषणा के बाद रविवार देर रात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात करने पहुंच गये।
प्रीतम सिंह ने आज सुबह संवाददाताओं से बातचीत करते कहा कि यदि गुटबाज़ी के चलते पार्टी को हार का समाना करना पड़ा है और अगर उस गुटबाज़ी का हिस्सा मैं (प्रीतम सिंह) भी हूँ तो फिर वह अपनी विधायकी से इस्तीफ़ा देने हो तैयार हैं।
उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि श्री अविनाश पांडेय और प्रभारी यादव को वो रिपोर्ट भी सार्वजनिक करनी चाहिए, जिसमें कहा गया है कि पार्टी गुटबाज़ी के चलते हारी है। उन्होंने कहा कि अब वह किसी भी पद पर आसीन होने को तैयार नहीं है। पार्टी को पहले उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सिद्ध पड़ेंगे।
इससे पहले, रविवार को नए प्रदेश पार्टी नेतृत्व की घोषणा के बाद श्री प्रीतम के करीबी माने जाने वाले गिरीश पुनेठा ने पहले राष्ट्रीय महासचिव, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पर खुलकर निशाने साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पहले टिकट बिके थे। अब नेता प्रतिपक्ष का पद करोड़ों में बिक गया। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गाँधी को संज्ञान लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “एआईसीसी संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल, प्रदेश प्रभारी देवेन्द्र यादव, महामहिम पर्यवेक्षक अविनाश पाण्डेय और भस्मासुर जिल्लेइलाही हरीश रावत को हार्दिक बधाई। पहले पैसों के लालच में उत्तराखंड चुनाव में कांग्रेस की जिताऊ सीटों पर भी टिकटें बेची और अब नेता प्रतिपक्ष का पद भी करोड़ों में बेच डाला। श्री राहुल गांधी जी कृपया संज्ञान लें।”
श्री पुनेठा के इस बयान को जारी होने के लगभग 15 घण्टे बाद भी उनके खिलाफ कोई कार्यवाही पार्टी संगठन की ओर से नहीं की गई है। हाँ गढ़वाल मंडल से प्रदेश अध्यक्ष,, नेता प्रतिपक्ष औऱ उप नेता प्रतिपक्ष तीनों पदों में से किसी पर भी किसी की नियुक्ति न करने से इस क्षेत्र के नेता और कार्यकर्ताओं में बेहद असंतोष है। राजनीतिक जानकारों का मानना ह कि इससे पहले भी पूर्व मुख्यमंत्री के व्यवहार के कारण गढ़वाल मंडल के कांग्रेस नेता प्रायः असहज महसूस करते रहे हैं। श्री रावत के कारण ही पूर्व पार्टी प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय और महिला कांग्रेस अध्यक्ष सरिता आर्या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने को मजबूर हुये। दोनों ने भाजपा में जाने के बाद क्रमशः टिहरी और नैनीताल से जीत भी हासिल की।
श्री प्रीतम सिंह के पिता स्वर्गीय गुलाब सिंह पूर्व में संयुक्त उत्तर प्रदेश में आठ बार विधायक रहने के अलावा, कई बार मंत्री भी रहे। खुद श्री प्रीतम सिंह इस बार छठी बार विधायक निर्वाचित हुये हैं। ऐसे में समझा जा रहा था कि उनको ही नेता प्रतिपक्ष बनाया जायेगा, लेकिन श्री रावत से उनके छत्तीस के आंकड़े के कारण उन्हें इससे दरकिनार किया गया।




