Yudh Kaushal 3.0 से चीन को सीधा संदेश! अरुणाचल प्रदेश की दुर्गम चोटियों पर भारतीय सेना का युद्ध अभ्यास, Drone- AI से लैस अगली पीढ़ी की तैयारी

जहां एक तरफ चीन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन के बंदरगाह शहर तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की और दोनों देशों के मतभेदों को खत्म करने की ओर कदम उठा रहे हैं वहीं, दूसरी और भारत पक्ष भी दुनिया को दिखा रहा हैं कि वह अपनी भूमि के साथ एक इंच का भी समझौता नहीं करेगा। चीन हमेशा से ही अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर अपनी दावेदारी ठोकता आया है। वहीं पर भारत युद्ध कौशल 3.0 का अभ्यास कर रहा है।


उन्होंने कहा कि ‘युद्ध कौशल 3.0’ अभ्यास ने उन्नत तकनीक, संचालन नवाचार और सैनिकों की पेशेवर उत्कृष्टता का उल्लेखनीय तालमेल प्रदर्शित किया। उन्होंने कहा कि इस अभ्यास ने ड्रोन निगरानी, वास्तविक समय में लक्ष्य प्राप्ति, सटीक हमले, हवाई-तटीय प्रभुत्व और समन्वित युद्धक्षेत्र युद्धाभ्यास के प्रदर्शनों के साथ बहु-डोमेन वातावरण में काम करने की सेना की क्षमता को रेखांकित किया।
लेफ्टिनेंट कर्नल रावत ने कहा कि अभ्यास का एक प्रमुख आकर्षण नवगठित एएसएचएनआई प्लाटूनों का शामिल किया जाना था, जिसने प्रदर्शित किया कि कैसे अगली पीढ़ी की तकनीक, युद्ध-प्रशिक्षित रणनीतियों के साथ सहज रूप से मिलकर, भविष्य के संघर्षों में निर्णायक बढ़त प्रदान कर सकती है। उन्होंने कहा कि इस सहयोग ने प्रदर्शित किया कि कैसे स्वदेशी रक्षा नवाचार तेजी से युद्धक्षेत्र के लाभ में परिवर्तित हो रहा है, राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत कर रहा है और आत्मनिर्भरता को बढ़ा रहा है।



